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सीकर की संतोष देवी खेदड़ बनीं राजस्थान की किसान ब्रांड एंबेसडर, शुष्क धरती पर बागवानी से चमकी किस्मतराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 8:45 am (54 मिनट पहले)· 0

सीकर की संतोष देवी खेदड़ बनीं राजस्थान की किसान ब्रांड एंबेसडर, शुष्क धरती पर बागवानी से चमकी किस्मत

कम पानी वाले इलाके में अनार और सेब उगाकर चर्चित हुईं संतोष देवी खेदड़ को राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने ट्रेनर और ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है।

कम बारिश और रेतीली जमीन की चुनौतियों को पछाड़ते हुए सीकर के बेरी गांव की महिला कृषक संतोष देवी खेदड़ ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से अनोखा मुकाम हासिल किया है। जल संकट से जूझते अंचल में आधुनिक कृषि पद्धतियों का सहारा लेकर उन्होंने न केवल शानदार फलों के बाग लहलहाए, बल्कि स्थानीय स्तर पर अनार क्वीन का खिताब भी हासिल किया। अब इसी समर्पण के दम पर वह समूचे राज्य के कृषकों को आधुनिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियां सिखाने का दायित्व संभालेंगी।

रेतीले इलाके में तैयार किया विविध फलों का बगीचा

परंपरागत फसलों के ढर्रे को तोड़ते हुए संतोष देवी ने अपने खेत में कई किस्मों के फलदार वृक्ष रोपे। उनके कृषि प्रक्षेत्र पर अनार की भरपूर पैदावार के साथ-साथ गर्म प्रदेशों के अनुकूल सेब की विशेष किस्म हरमन-99 भी सफलता से फल दे रही है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने बाग में मौसमी, अमरूद, चीकू और नींबू के पौधे भी सहेजे हैं। कम वर्षा वाले मरुस्थलीय वातावरण में ऐसे विविध फल उगाना बेहद कठिन माना जाता है, परंतु उन्होंने सुनियोजित फसल चक्र और जल संरक्षण के दम पर इस असंभव कार्य को सच कर दिखाया।

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टपक सिंचाई और जैविक तरीकों से गढ़ा टिकाऊ ढांचा

सीमित जल स्रोतों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति को अपनी खेती की रीढ़ बनाया। ड्रिप तकनीक के जरिए सीधे पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार नमी पहुंचती है, जिससे पानी का एक कतरा भी व्यर्थ नहीं बहता। इसके साथ ही उन्होंने पूरी तरह रासायनिक खादों से दूरी बनाकर प्राकृतिक तथा जैविक खेती को अपनाया। यह पूरा मॉडल आज उन सभी क्षेत्रों के लिए प्रेरक बन चुका है, जहां किसान अनियमित वर्षा और भूजल स्तर गिरने की दोहरी मार झेल रहे हैं।

पंजीकृत नर्सरी में सालाना एक लाख से अधिक पौधों की तैयारी

बागवानी के साथ-साथ संतोष देवी ने एक बड़े पौधशाला केंद्र की स्थापना भी की है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में विधिवत पंजीकृत उनकी नर्सरी से प्रतिवर्ष 1 लाख से ज्यादा उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं। उनके इस फार्म की ख्याति इतनी फैली है कि कृषि विश्वविद्यालयों के शोधार्थी और छात्र व्यावहारिक जानकारी लेने यहां नियमित आते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों से भी किसान उनके खेत पर भ्रमण और तकनीकी गुर सीखने के लिए पहुंचते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान और शासन की नई जिम्मेदारी

उनकी इस लगन और नवाचार की गूंज देश की राजधानी तक पहुंची, जहां उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित चुनिंदा प्रगतिशील किसानों में जगह मिली। वर्ष 2024 के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने उन्हें प्रतिष्ठित इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड प्रदान किया। अब इसी क्रम में राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने उन्हें राज्य का किसान ब्रांड एंबेसडर और ट्रेनर नियुक्त किया है।

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अधिकृत निर्देशानुसार वह प्रदेश भर में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण शिविरों व कार्यशालाओं में किसानों को पारंपरिक, प्राकृतिक और जैविक खेती का प्रशिक्षण देंगी। इस विशिष्ट भूमिका के तहत श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के माध्यम से उन्हें 11 हजार रुपये का मासिक मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।

सवाल-जवाब

संतोष देवी खेदड़ को राजस्थान में क्या नई जिम्मेदारी सौंपी गई है?
उन्हें राजस्थान कृषि आयुक्तालय द्वारा राज्य का किसान ब्रांड एंबेसडर और ट्रेनर नियुक्त किया गया है।
संतोष देवी किस जिले और गांव की निवासी हैं?
वह राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की निवासी हैं।
उन्हें इलाके में किस उपनाम से जाना जाता है?
शुष्क क्षेत्र में अनार की सफल बागवानी करने के कारण उन्हें अनार क्वीन के नाम से जाना जाता है।
उनके कृषि फार्म पर किन-किन फलों की खेती की जाती है?
उनके फार्म पर अनार, हरमन-99 सेब, अमरूद, मौसमी, नींबू और चीकू के फल उगाए जाते हैं।
उनकी पंजीकृत नर्सरी से हर साल कितने पौधे तैयार किए जाते हैं?
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से पंजीकृत उनकी नर्सरी से प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक पौधे तैयार किए जाते हैं।
उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा कौन सा सम्मान दिया गया था?
वर्ष 2024 में उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड प्रदान किया गया था।
नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें कितना मासिक मानदेय प्राप्त होगा?
उन्हें श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा की तरफ से 11 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 मिनट पहले

रेतीली जमीन में सेब और अनार उगाना गजब कमाल है, मेहनत हो तो कुछ भी संभव है।

Rohan Verma@rohan-verma·12 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मैं खुद एक बार सीकर गया था और वहाँ के किसानों को पानी के लिए तरसते देखा है, ऐसे में संतोष जी का यह काम वाकई हैरान करने वाला है।

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