कम बारिश और रेतीली जमीन की चुनौतियों को पछाड़ते हुए सीकर के बेरी गांव की महिला कृषक संतोष देवी खेदड़ ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से अनोखा मुकाम हासिल किया है। जल संकट से जूझते अंचल में आधुनिक कृषि पद्धतियों का सहारा लेकर उन्होंने न केवल शानदार फलों के बाग लहलहाए, बल्कि स्थानीय स्तर पर अनार क्वीन का खिताब भी हासिल किया। अब इसी समर्पण के दम पर वह समूचे राज्य के कृषकों को आधुनिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियां सिखाने का दायित्व संभालेंगी।
रेतीले इलाके में तैयार किया विविध फलों का बगीचा
परंपरागत फसलों के ढर्रे को तोड़ते हुए संतोष देवी ने अपने खेत में कई किस्मों के फलदार वृक्ष रोपे। उनके कृषि प्रक्षेत्र पर अनार की भरपूर पैदावार के साथ-साथ गर्म प्रदेशों के अनुकूल सेब की विशेष किस्म हरमन-99 भी सफलता से फल दे रही है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने बाग में मौसमी, अमरूद, चीकू और नींबू के पौधे भी सहेजे हैं। कम वर्षा वाले मरुस्थलीय वातावरण में ऐसे विविध फल उगाना बेहद कठिन माना जाता है, परंतु उन्होंने सुनियोजित फसल चक्र और जल संरक्षण के दम पर इस असंभव कार्य को सच कर दिखाया।
टपक सिंचाई और जैविक तरीकों से गढ़ा टिकाऊ ढांचा
सीमित जल स्रोतों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति को अपनी खेती की रीढ़ बनाया। ड्रिप तकनीक के जरिए सीधे पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार नमी पहुंचती है, जिससे पानी का एक कतरा भी व्यर्थ नहीं बहता। इसके साथ ही उन्होंने पूरी तरह रासायनिक खादों से दूरी बनाकर प्राकृतिक तथा जैविक खेती को अपनाया। यह पूरा मॉडल आज उन सभी क्षेत्रों के लिए प्रेरक बन चुका है, जहां किसान अनियमित वर्षा और भूजल स्तर गिरने की दोहरी मार झेल रहे हैं।
पंजीकृत नर्सरी में सालाना एक लाख से अधिक पौधों की तैयारी
बागवानी के साथ-साथ संतोष देवी ने एक बड़े पौधशाला केंद्र की स्थापना भी की है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड में विधिवत पंजीकृत उनकी नर्सरी से प्रतिवर्ष 1 लाख से ज्यादा उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते हैं। उनके इस फार्म की ख्याति इतनी फैली है कि कृषि विश्वविद्यालयों के शोधार्थी और छात्र व्यावहारिक जानकारी लेने यहां नियमित आते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थान के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों से भी किसान उनके खेत पर भ्रमण और तकनीकी गुर सीखने के लिए पहुंचते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान और शासन की नई जिम्मेदारी
उनकी इस लगन और नवाचार की गूंज देश की राजधानी तक पहुंची, जहां उन्हें गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित चुनिंदा प्रगतिशील किसानों में जगह मिली। वर्ष 2024 के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने उन्हें प्रतिष्ठित इनोवेटिव फार्मर अवॉर्ड प्रदान किया। अब इसी क्रम में राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने उन्हें राज्य का किसान ब्रांड एंबेसडर और ट्रेनर नियुक्त किया है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अधिकृत निर्देशानुसार वह प्रदेश भर में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण शिविरों व कार्यशालाओं में किसानों को पारंपरिक, प्राकृतिक और जैविक खेती का प्रशिक्षण देंगी। इस विशिष्ट भूमिका के तहत श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के माध्यम से उन्हें 11 हजार रुपये का मासिक मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।


















