राजस्थान के कोटा शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कृष्णा नगर रंगबाड़ी क्षेत्र में स्थित केशव एग्रो इंडस्ट्रीज पर अचानक की गई छापेमारी के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहाँ पर साधारण रिफाइंड तेल को पारंपरिक तरीके से निकाला गया वुड प्रेस्ड ऑयल बताकर ग्राहकों को बेचा जा रहा था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान विभाग के अधिकारियों ने मौके से कुल 840 किलो संदिग्ध तेल को अपने कब्जे में लिया है, जिसमें भारी मात्रा में रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल और श्री अनन्तम वुड प्रेस्ड राइस ब्रान ऑयल शामिल हैं। जांच में सामने आया कि इस खेल के तहत केवल चावल की भूसी का तेल ही नहीं, बल्कि तिल्ली, अलसी और सरसों के रिफाइंड तेल को भी लकड़ी से पेरे गए प्राकृतिक तेल के रूप में डिब्बों और बोतलों में पैक किया जा रहा था। इन सभी मिलावटी उत्पादों को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न का सहारा लिया जा रहा था, जहाँ लोग इन्हें शुद्ध और महंगा समझकर खरीद रहे थे।
छापेमारी के दौरान मिले सबूत और भारी मुनाफाखोरी
अधिकारियों ने जब इस औद्योगिक इकाई का निरीक्षण किया तो वहाँ विभिन्न कंपनियों के रिफाइंड तेल के टिन, वुड प्रेस्ड ऑयल के नाम छपे हुए विशेष रैपर और तैयार की गई बोतलें भारी मात्रा में बरामद हुईं। गोदाम की तलाशी के दौरान सर्वोत्तम ब्रांड के रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल से भरे हुए 40 टिन पाए गए, जिनमें प्रत्येक टिन का वजन 15 किलोग्राम था। बाजार के जानकारों और अधिकारियों के मुताबिक इस तेल की मूल खरीद लागत करीब 170 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी सस्ते तेल को श्री अनन्तम ब्रांड के लेबल के तहत एक-एक लीटर की आकर्षक बोतलों में भरा जा रहा था। इसके बाद इसे शुद्ध वुड प्रेस्ड राइस ब्रान ऑयल का नाम देकर ऑनलाइन लगभग 350 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा था। छापेमारी के समय इस तरह की 240 पैक की गई बोतलें मौके पर ही रखी हुई मिलीं, जिन्हें देखकर अधिकारियों ने तुरंत जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी।
तथ्यों की जांच और नमूनों का संग्रह
खाद्य सुरक्षा दल ने मौके पर मौजूद रिफाइंड राइस ब्रान ऑयल और पैक किए गए वुड प्रेस्ड राइस ब्रान ऑयल से गुणवत्ता की जांच के लिए एक-एक नमूना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत एकत्र किया। इसके बाद मौके पर मिले 40 टिन और 236 पैक बोतलों को पूरी तरह से सीज कर दिया गया। निरीक्षण के आगे के चरण में अधिकारियों को सरसों, अलसी और तिल्ली के तेल के पैक किए गए डिब्बे भी मिले, जिनकी जांच के लिए भी अलग से नमूने लिए गए। पूछताछ के दौरान संस्थान के संचालक ने स्वीकार किया कि उसने ये सभी तेल बूंदी स्थित श्रीराम ऑयल मिल्स से खरीदे थे। उसने यह भी बताया कि उसने यह तेल लगभग 180 से 200 रुपये प्रति किलो के भाव से खरीदकर बाजार में 350 से 500 रुपये प्रति किलो तक के मुनाफे पर बेचा है। हालांकि, जब अधिकारियों ने उससे कोई ऐसा वैध दस्तावेज या खरीद बिल मांगा जो यह साबित कर सके कि ये उत्पाद वास्तव में वुड प्रेस्ड हैं, तो वह कोई भी संतोषजनक प्रमाण पेश नहीं कर सका।
कार्रवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि जिस जगह पर वुड प्रेस्ड ऑयल की अनधिकृत पैकिंग का पूरा कारोबार चल रहा था, वहाँ पर तेल निकालने के लिए किसी भी प्रकार की पारंपरिक घाणी या कोल्हू का संचालन नहीं हो रहा था। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने विक्रेता को सख्त हिदायत दी है कि वह अगली अनुमति मिलने तक इस तरह का कोई भी काम दोबारा नहीं करेगा। इसी विशेष अभियान के तहत विभाग की टीम ने इंदिरा विहार इलाके में स्थित मेक्स फूड का भी औचक निरीक्षण किया। इस दूसरी जगह पर अधिकारियों ने दही, आटा और आयोडाइज्ड साल्ट के कुल तीन नमूने गुणवत्ता परखने के लिए लिए। जाँच के दौरान यह भी पता चला कि उस प्रतिष्ठान में काम करने वाले फूड हैंडलर्स का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं रखा गया था और न ही वहाँ किसी तरह का पेस्ट कंट्रोल सर्टिफिकेट मौजूद था। नियमों की अनदेखी करने पर दोनों ही संस्थानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के अंतर्गत इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए जा रहे हैं। विभाग की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि तय समयसीमा में नोटिस की शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित संस्थानों के लाइसेंस को रद्द करने की कठोर कार्रवाई की जाएगी।


















