राजस्थान के कोटा से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। शहर के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद दो महिलाओं की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई। डॉक्टरों के अनुसार, सिजेरियन ऑपरेशन से गुजरने वाली इन दोनों प्रसूताओं की किडनी पर असर पड़ा है। इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर चिकित्सालय की कार्यप्रणाली और ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल के तौर-तरीकों पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
निजी अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में चल रहा इलाज
प्रभावित महिलाओं में से एक रेशमा का ऑपरेशन बुधवार को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुआ था। सर्जरी के कुछ ही समय बाद उसकी शारीरिक स्थिति तेजी से खराब होने लगी। परिजनों ने किसी तरह का जोखिम न लेते हुए उसे तुरंत एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे गहन चिकित्सा कक्ष यानी आईसीयू में रखा गया है और डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार जारी है। वहीं, दूसरी प्रसूता अनीता को भी इसी तरह की चिकित्सीय जटिलता का सामना करना पड़ा। उसे उसी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। दोनों ही मामलों में किडनी के प्रभावित होने की पुष्टि हुई है, जिससे परिजनों में दहशत और मायूसी का माहौल है।
पांच महीने पहले भी आ चुके हैं ऐसे ही डरावने मामले
यह पूरा मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि लगभग पांच महीने पहले इसी न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ठीक इसी तरह की घटनाएं देखने को मिली थीं। उस दौरान सिजेरियन डिलीवरी के बाद कुल 12 प्रसूताओं की किडनी फेल होने की दर्दनाक जानकारियां सामने आई थीं। हालात इतने बदतर हो गए थे कि उन 12 महिलाओं में से पांच ने अपनी जान गंवा दी थी। उस बड़ी त्रासदी के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भारी दबाव बना था, और अब दो नए मामले सामने आने के बाद पुराने जख्म फिर हरे हो गए हैं।
सामने नहीं आ पाई है किडनी खराब होने की असली वजह
इन ताजा मामलों के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि आखिर इन दोनों महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के पीछे असली चिकित्सकीय कारण क्या था। क्या इसके पीछे कोई विशेष दवा, ऑपरेशन के दौरान कोई संक्रमण या फिर अस्पताल की अंदरूनी व्यवस्था में कोई तकनीकी खामी जिम्मेदार है? फिलहाल इस बारे में अस्पताल प्रबंधन या चिकित्सकों की ओर से कोई भी ठोस और आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक जांच और विस्तृत चिकित्सकीय आकलन के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
पुराने हादसों की यादें हुईं ताजा
करीब पांच महीने पहले हुई पांच महिलाओं की मौत के मामले में भी जांच की मांग उठी थी, लेकिन उन घटनाओं के मूल कारणों का पर्दाफाश आज तक पूरी तरह से जनता के सामने नहीं आ सका है। अब जब एक बार फिर प्रसव के बाद महिलाओं की किडनी पर असर पड़ने की घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो पुराने मामलों से जुड़ी फाइलें और चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। लोग यह जानने को बेताब हैं कि आखिर गर्भवती महिलाओं के जीवन के साथ इस तरह का जोखिम क्यों पैदा हो रहा है। फिलहाल दोनों मरीजों का अलग-अलग स्थानों पर इलाज चल रहा है और हर कोई उनके स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।



















