जयपुर में कोटपूतली नगर परिषद निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया अब अपने अंतिम और सबसे निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। नाम वापसी और पर्चे दाखिल करने की आखिरी तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मी के साथ प्रशासनिक चौकसी भी काफी बढ़ गई है। चुनावी माहौल के इस दौर में किसी भी प्रकार की तकनीकी गलती या अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है। रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद कोटपूतली उपखंड कार्यालय को पूरी तरह से खुला रखा गया था।
रविवार का दिन होने के बावजूद कोटपूतली उपखंड कार्यालय में किसी आम कार्यदिवस की तरह ही कामकाज चल रहा था। कार्यालय परिसर के भीतर सुबह की शुरुआत से ही संभावित उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। प्रत्याशी अपने जरूरी कागजातों और पर्चों के साथ लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दिए। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से टोकन सिस्टम लागू किया गया था, जिसके जरिए उम्मीदवारों को नियमानुसार एक-एक करके बुलाया जा रहा था।
नामांकन पत्रों की गलतियों से बचने के लिए विशेष जांच व्यवस्था
चुनावी सरगर्मी के दौरान अक्सर उम्मीदवारों से पर्चा भरते समय छोटी-मोटी चूक या तकनीकी खामियां रह जाती हैं, जो बाद में उम्मीदवारी खारिज होने की वजह बन सकती हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए उपखंड कार्यालय में बनाई गई हेल्प डेस्क पर खास तौर पर प्रशिक्षित अमले को लगाया गया है। यहां प्रत्याशी अपने भरे हुए नामांकन पत्रों की गहराई से जांच करवा रहे हैं। अधिकारी दस्तावेजों की किसी भी कमी, हस्ताक्षर की गलती या शपथ पत्र से जुड़ी खामियों को समय रहते ठीक करवा रहे हैं। अब तक इस हेल्प डेस्क के जरिए करीब 600 से ज्यादा नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच हो चुकी है, जिससे उम्मीदवारों ने काफी राहत महसूस की है।
प्रशासनिक मॉनिटरिंग और अंतिम तारीख का महत्व
इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसकी निगरानी खुद उपखंड अधिकारी योगेश देवल कर रहे हैं। योगेश देवल लगातार हेल्प डेस्क और पूरे कार्यालय परिसर का मुआयना कर रहे हैं और वहां मौजूद अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे रहे हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने साफ किया कि 31 अगस्त नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम और बेहद अहम तारीख है। यदि प्रत्याशी पहले ही अपने दस्तावेजों की जांच करवा लेते हैं, तो आखिरी दिन कार्यालय में जुटने वाली भारी भीड़ और तकनीकी परेशानियों से आसानी से बचा जा सकेगा।
प्रशासन की ओर से रविवार के दिन भी इस तरह हेल्प डेस्क चलाने के फैसले से चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों और उनके प्रस्तावकों को बहुत राहत मिली है। इस दूरगामी कदम से न केवल प्रशासनिक मुस्तैदी का पता चलता है, बल्कि उम्मीदवारों को भी एक साफ-सुथरे और तनावमुक्त माहौल में अपनी चुनावी प्रक्रिया पूरी करने का बेहतरीन मौका मिला है।



















