अलवर जिले के अंतर्गत आने वाले खैरथल-तिजारा क्षेत्र के भिवाड़ी नगर परिषद चुनाव के सिलसिले में कांग्रेस पार्टी ने अपने 28 प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार टिकट वितरण में पुराने और अनुभवी चेहरों के साथ-साथ कई नए लोगों को भी चुनावी मैदान में उतरने का मौका दिया है। भिवाड़ी नगर परिषद के कुल 60 वार्डों में से शुरुआती चरण में केवल 28 सीटों पर ही उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जिसके चलते बाकी बचे 32 वार्डों के प्रत्याशियों के नामों को लेकर उत्सुकता और सस्पेंस अभी भी पूरी तरह से बना हुआ है।
बाकी 32 वार्डों के टिकटों पर टिकी निगाहें
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार को जारी की गई इस पहली सूची के बाद अब सभी की निगाहें शेष बचे हुए 32 वार्डों के टिकट वितरण पर टिक गई हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पार्टी इन शेष सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान रविवार को कर सकती है। जब शनिवार को शुरुआती 28 नामों की घोषणा की जा रही थी, उस दौरान पार्टी के पर्यवेक्षक, शहर अध्यक्ष और पिछले विधानसभा चुनाव में ताल ठोक चुके प्रत्याशी भी वहां मौजूद थे। पार्टी की ओर से यह साफ किया गया है कि सभी उम्मीदवारों का चयन आपसी विचार-विमर्श और मजबूत दावेदारों की जमीनी स्थिति को पूरी तरह परखने के बाद ही किया गया है।
जिलाध्यक्ष की गैरमौजूदगी से बढ़ी राजनीतिक हलचल
हालांकि कांग्रेस पार्टी की तरफ से टिकटों की यह घोषणा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का एक बड़ा विषय बन गई है। खैरथल-तिजारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव इस पूरी टिकट घोषणा प्रक्रिया के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। उनकी गैर-मौजूदगी में ही भिवाड़ी नगर परिषद के 28 वार्डों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया गया। पार्टी के भीतर पहले से ही चल रही आंतरिक खींचतान और मतभेदों के माहौल के बीच जिलाध्यक्ष का इस अहम मौके पर न होना कई प्रकार के गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह और गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
जिलाध्यक्ष की सफाई और स्थानीय समीकरण
दूसरी तरफ जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने खुद इस स्थिति पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया है कि अभी 32 वार्डों के टिकटों का आना बाकी है और इस बात की पूरी संभावना है कि बचे हुए टिकट आज ही घोषित कर दिए जाएंगे। पार्टी ने जिन 28 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है उनमें स्थानीय स्तर पर अपनी गहरी पकड़ रखने वाले दावेदारों को प्राथमिकता दी गई है। निकाय चुनावों में चूंकि वार्ड स्तर पर हर एक उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और स्थानीय समीकरण बेहद निर्णायक साबित होते हैं, इसलिए पार्टी ने भी संभावित प्रत्याशियों की जमीनी ताकत को ही टिकट बंटवारे का मुख्य आधार बनाया है।
बगावत और नाराजगी से पार पाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का यही कहना है कि भिवाड़ी में प्रत्याशियों के नामों पर मुहर आपसी सहमति और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर ही लगाई गई है। टिकट वितरण के समय पर्यवेक्षक और शहर अध्यक्ष जैसे तमाम प्रमुख चेहरे वहां मौजूद थे, लेकिन बलराम यादव की अनुपस्थिति ने अंदरूनी कलह की अटकलों को हवा जरूर दे दी है। हालांकि उनकी तरफ से टिकट प्रक्रिया के खिलाफ कोई खुला विरोध या बयान सामने नहीं आया है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती शेष 32 वार्डों में सही टिकट बांटने के साथ-साथ उन दावेदारों को संतुष्ट करने की होगी जिन्हें मौका नहीं मिल पाता है। टिकट आवंटन के बाद पार्टी के भीतर उठने वाली नाराजगी और बगावत के सुरों को संभालना भी कांग्रेस के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।





















