राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा सियासी झटका लगा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का अपना गृह जिला पाली उनके हाथ से फिसल गया है। पाली नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए बीजेपी के एक दशक लंबे शासन को समाप्त कर दिया। पिछले 10 सालों से इस निकाय पर काबिज बीजेपी इस बार बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रह गई, जबकि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
पाली नगर निगम का वार्डवार गणित और सीटों का समीकरण
65 वार्डों वाली पाली नगर निगम में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। चुनाव परिणामों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 29 वार्डों में विजय पताका फहराई है। वहीं, सत्ताधारी बीजेपी को केवल 21 वार्डों में ही जीत हासिल हो सकी। चुनाव में 15 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बाजी मारी है।
हालांकि, 65 सदस्यों वाले बोर्ड में पूर्ण बहुमत का आंकड़ा 33 है, जिसे कोई भी दल अकेले हासिल नहीं कर सका है। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से चार सीट दूर रह गई है, लेकिन 29 सीटें जीतकर वह सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। ऐसे में पाली में महापौर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए अब निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। बीजेपी को दोबारा सत्ता में लौटने के लिए 15 में से कम से कम 12 निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, जो एक कठिन चुनौती नजर आ रही है।
प्रदेश अध्यक्ष के वार्ड 23 में बीजेपी प्रत्याशी की हार
इस चुनाव में बीजेपी के लिए सबसे बड़ा झटका प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के अपने वार्ड से मिला है। मदन राठौड़ मूल रूप से पाली जिले की सुमेरपुर विधानसभा के निवासी हैं, जहाँ से वे दो बार विधायक भी रह चुके हैं और पाली के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। सुमेरपुर में तो बीजेपी ने जीत दर्ज कर ली, लेकिन मदन राठौड़ वर्तमान में पाली नगर निगम के वार्ड नंबर 23 में रहते हैं।
वार्ड नंबर 23 में हुए चुनाव में बीजेपी की अधिकृत उम्मीदवार खुशबू लोढ़ा को हार का सामना करना पड़ा और वहां कांग्रेस प्रत्याशी ने बाजी मार ली। पार्टी के शीर्ष प्रादेशिक नेता के अपने ही निवास वाले वार्ड में हार की खबर से बीजेपी खेमे में निराशा का माहौल है।
नामांकन में अड़चनों के बावजूद कांग्रेस ने दर्ज की बड़ी जीत
कांग्रेस के लिए पाली की यह जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत में ही पार्टी को कई कानूनी और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस के 4 प्रत्याशियों के पर्चे खारिज हो गए थे। इसके अलावा, 2 उम्मीदवारों के दलीय सिंबल समय पर जमा नहीं हो सके थे, जिसके कारण वे चुनाव नहीं लड़ पाए। एक अन्य वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार ने बीजेपी प्रत्याशी का समर्थन कर दिया था।
इन तमाम झटकों के चलते कांग्रेस 65 में से केवल 58 वार्डों में ही अपने प्रत्याशी मैदान में उतार सकी थी। इसके बावजूद, केवल 58 सीटों पर चुनाव लड़कर 29 सीटें जीतना कांग्रेस के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
दिग्गजों का दल-बदल और नगर निगम का ऐतिहासिक संदर्भ
पाली नगर निगम के इस चुनावी मुकाबले में स्थानीय समीकरण तब पूरी तरह बदल गए थे, जब चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की निवर्तमान महापौर रेखा राकेश भाटी और उनके पति राकेश भाटी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। बीजेपी को छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए राकेश भाटी ने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की।
पाली की स्थानीय राजनीति के इतिहास को देखें तो यह पहले एक नगर परिषद हुआ करती थी। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में इसे नगर परिषद से अपग्रेड करके नगर निगम का दर्जा दिया गया था। उस समय नगर परिषद की सभापति रहीं रेखा राकेश भाटी पाली नगर निगम की पहली महापौर बनी थीं। नगर निगम बनने के बाद आयोजित हुए पहले पूर्ण चुनाव में ही बीजेपी को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है।
इसके साथ ही, राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में भी बीजेपी को करारी शिकस्त देकर अपनी बढ़त मजबूत की है।

















