अगले हफ्ते आने वाले हैं सात नए आईपीओ, निवेशकों के पास पैसे लगाने का शानदार मौकासिंधु जल समझौते का अस्सी-बीस गणित कैसे बना भारत का ब्रह्मास्त्र, बौखलाया पाकिस्तानलॉरेंस बिश्नोई का राजदार दीपक खत्री 5 दिन की पुलिस रिमांड पर, यमुना बाजार फायरिंग समेत कई मामलों से उठेगा पर्दामानसून में गुलाब के पौधों की ऐसे करें देखभाल, नहीं सड़ेंगी जड़ें और खिलेंगे फूलपौधे भी महसूस करते हैं तनाव, जानें पत्तियों का पीला पड़ना और सूखना क्या बयां करता हैनेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का खौफनाक मंजर, बाल-बाल बचे दीपक तमांग ने सुनाई आपबीतीओडिशा के ढेंकानाल में पति ने की पत्नी की हत्या, सेप्टिक टैंक से मिला शवराजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में फर्जीवाड़े के बाद सख्त हुए नियम, अब डॉक्टर को खुद करनी होगी पर्ची की जांचसुभाष घई ने खोले सलमान खान के साथ हुई हाथापाई के राज, सलीम खान के दखल से ऐसे सुलझा था पुराना विवादबीकानेर में चीनी की कीमतों में उछाल से फीकी पड़ी त्योहारों की मिठास, मिठाई खरीदना हुआ महंगा
परबतसर के वीर तेजा पशु मेले में नागौरी बैलों की धूम, पंजाब और हरियाणा से पहुंच रहे खरीदारराजस्थान
29 अग॰ 2026, 6:04 pm (1 घंटे पहले)· 2

परबतसर के वीर तेजा पशु मेले में नागौरी बैलों की धूम, पंजाब और हरियाणा से पहुंच रहे खरीदार

राजस्थान के परबतसर में प्रसिद्ध वीर तेजा पशु मेले का दूसरा दिन जारी है, जहां नागौरी बैलों की भारी मांग के चलते पंजाब और हरियाणा से व्यापारी पहुंच रहे हैं। हालांकि मेले में कुल पशुओं की आवक पहले के मुकाबले कम हुई है।

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और परबतसर की सदियों पुरानी परंपरा के प्रतीक वीर तेजा पशु मेले का दूसरा दिन चल रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार को ध्वजारोहण के साथ किया गया था, जिसके बाद से ही मेला परिसर में पशुपालकों और कारोबारियों का आना-जाना लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार शाम तक के आंकड़ों के अनुसार मेले में कुल 666 पशुओं की आवक दर्ज की गई थी। शनिवार को सुबह से ही नजदीकी गांवों से भारी संख्या में पशुपालक अपने पशुओं के साथ मैदान में पहुंच चुके हैं, जिससे मेला स्थल पर रौनक बढ़ गई है।

नागौरी बैलों का दबदबा और दूसरे राज्यों के खरीदार

इस पूरे मेले का मुख्य आकर्षण हमेशा की तरह नागौरी नस्ल के बैल बने हुए हैं। अपनी शानदार शारीरिक बनावट, फुर्तीली चाल और दमदार कद-काठी के कारण नागौरी बैलों की धाक सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी कायम है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत कई पड़ोसी राज्यों से व्यापारी इन खास बैलों को खरीदने के लिए परबतसर पहुंच रहे हैं। खासकर पंजाब के व्यापारियों में नागौरी बैलों को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जाता है, क्योंकि इनमें से कई खरीदार इन बैलों को ग्रामीण दौड़ और अन्य पारंपरिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए भी अपने साथ ले जाते हैं।

ये भी पढ़ें

भव्य शुभारंभ और पूजन के साथ सजीं दुकानें

शुक्रवार को आयोजित उद्घाटन समारोह में एसडीएम बलवीर सिंह चौहान ने मेला मैदान में आधिकारिक रूप से झंडारोहण कर कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर प्रसिद्ध ऐतिहासिक वीर तेजा मंदिर में माथा टेका और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मेले की शुरुआत के साथ ही मैदान के चारों ओर बांस, लकड़ी, तिरपाल और अन्य जरूरी घरेलू सामानों की दुकानें सजनी शुरू हो गई थीं। शनिवार को जैसे-जैसे पशुओं की संख्या में इजाफा हुआ, वैसे-वैसे आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है।

ऐतिहासिक वैभव और पशु आवक में आया बदलाव

एक ऐसा दौर भी था जब वीर तेजा पशु मेले में लगभग एक लाख तक पशुओं की आवक हुआ करती थी और यह पूरा क्षेत्र पशु व्यापार का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता था। समय के साथ अब इस मेले की आवक काफी कम हो गई है और वर्तमान समय में यहां करीब 2000 से 3000 पशु ही पहुंच पाते हैं। पुराने पशु व्यापारियों का यह भी कहना है कि बीते वर्षों जैसी भारी भीड़ और बड़े पैमाने पर होने वाली खरीद-फरोख्त अब देखने को नहीं मिलती है, फिर भी नागौरी बैलों की विशेष पहचान इस मेले के वजूद और उसकी पुरानी रौनक को संभाले हुए है।

कीमतों में गिरावट और व्यापार का बदलता स्वरूप

बीते कुछ वर्षों के दौरान नागौरी बैलों के बाजार भाव में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक आज से लगभग 12 साल पहले नागौरी बैलों की एक बेहतरीन जोड़ी आसानी से करीब 2.21 लाख रुपए तक बिक जाया करती थी। वहीं वर्तमान स्थिति यह है कि अब वैसी ही उत्तम नस्ल की जोड़ी की कीमत घटकर करीब 80 से 85 हजार रुपए के आसपास रह गई है। कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट की वजह से समग्र पशु व्यापार के आंकड़े प्रभावित हुए हैं और मेले का स्वरूप भी बदला है, इसके बावजूद दूर-दराज के राज्यों से आने वाले सौदागर मजबूत नस्ल के बैलों की तलाश में यहां आना नहीं छोड़ते।

प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती

मेले के दूसरे दिन जैसे-जैसे पशुओं और लोगों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे मेला प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी भी बढ़ती जा रही है। पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन की तरफ से बिजली आपूर्ति, पेयजल, साफ-सफाई और पशुओं के लिए चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। बाहर से आए हुए व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि मेला परिसर में पुलिस गश्त को और तेज किया जाए ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में पूरी निगरानी रखी जा सके।

आगामी उम्मीदें और नागौरी नस्ल का बढ़ता आकर्षण

रविवार को मेले में पशुओं की आवक और अधिक तेज होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों और अन्य राज्यों के व्यापारियों की मौजूदगी से आने वाले समय में मेला मैदान के और अधिक गुलजार होने के आसार हैं। भले ही अब यह मेला लाखों पशुओं की मौजूदगी और उस स्तर के बड़े कारोबार के लिए नहीं जाना जाता हो, लेकिन नागौरी बैलों की अटूट मांग इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। यही खास नस्ल आज भी वीर तेजा पशु मेले को देश भर के पशु प्रेमियों और व्यापारियों के नक्शे पर एक अलग पहचान दिला रही है।

सवाल-जवाब

वीर तेजा पशु मेला कहां आयोजित किया जाता है?
वीर तेजा पशु मेला राजस्थान के परबतसर में आयोजित किया जाता है।
इस मेले में किस नस्ल के बैल सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं?
इस मेले में नागौरी नस्ल के बैल अपनी मजबूत कद-काठी और तेज रफ्तार के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं।
मेले का शुभारंभ किसने किया था?
मेले का शुभारंभ एसडीएम बलवीर सिंह चौहान ने ध्वजारोहण कर किया था।
वर्तमान में मेले में कितने पशु पहुंच रहे हैं?
वर्तमान में इस मेले में लगभग 2,000 से 3,000 पशुओं की आवक हो रही है।
किन राज्यों के व्यापारी नागौरी बैल खरीदने आते हैं?
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के व्यापारी नागौरी बैल खरीदने के लिए परबतसर पहुंचते हैं।
नागौरी बैलों की एक अच्छी जोड़ी की वर्तमान कीमत क्या है?
वर्तमान में नागौरी बैलों की एक अच्छी जोड़ी की कीमत करीब 80 से 85 हजार रुपए तक रह गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 मिनट पहले

परबतसर के वीर तेजा पशु मेले में पशुओं की आवक एक लाख से घटकर दो-तीन हजार तक सिमट जाना और नागौरी बैलों के व्यापार के स्वरूप में आया बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था व पारंपरिक पशुपालन के सामने खड़े गंभीर संकट को उजागर करता है। यदि इस ऐतिहासिक मेले को बचाना है, तो पशुपालकों के लिए प्रशासनिक प्रोत्साहन और बाजार सुरक्षा पर तुरंत विचार करना होगा, अन्यथा यह विरासत भी इतिहास बन जाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·32 मिनट पहले

परबतसर के वीर तेजा पशु मेले में एक लाख से घटकर मात्र दो से तीन हजार पशुओं की आवक होना और बारह साल पहले के मुकाबले नागौरी बैलों की कीमतों व व्यापार में गिरावट आना पारंपरिक पशुपालन के आर्थिक संकट को साफ दिखाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के इस अहम आधार को बचाने के लिए प्रशासन और पशुपालकों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना यह ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR