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कोडरमा में मानसूनी नमी से दुधारू पशुओं में फैला थनैला रोग, पशु विशेषज्ञ रजनीश कुमार ने दी सफाई की सलाहझारखंड
26 अग॰ 2026, 10:49 am (2 घंटे पहले)· 2

कोडरमा में मानसूनी नमी से दुधारू पशुओं में फैला थनैला रोग, पशु विशेषज्ञ रजनीश कुमार ने दी सफाई की सलाह

कोडरमा के पशुपालकों के मवेशियों में बारिश के मौसम के दौरान थनैला संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे पशुओं के थन में दर्द और दूध जमने की समस्या आ रही है।

कोडरमा जिले में मानसून के दौरान लगातार बनी रहने वाली नमी और गंदगी के चलते दुधारू मवेशी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चपेट में आ रहे हैं। क्षेत्र के पशुपालकों के बीच अपने गाय और भैंसों में थनैला संक्रमण फैलने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही पशुओं के रहने वाले स्थानों पर कीचड़ और अस्वच्छता बढ़ जाती है, जिससे कीटाणुओं का प्रसार आसान हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है।

संक्रमण फैलने के मुख्य कारण और मानसूनी नमी का प्रभाव

श्री कोडरमा गौशाला के पशु विशेषज्ञ रजनीश कुमार के अनुसार, थनैला की बीमारी मुख्य रूप से गंदगी और असुरक्षित वातावरण के कारण जन्म लेती है। बारिश के दिनों में पशुओं के बाड़े में जलजमाव और नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यह स्थिति हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए बेहद अनुकूल माहौल तैयार करती है। इसके साथ ही, गंदगी के कारण मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप भी काफी बढ़ जाता है, जो संक्रमण को एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलाने में मददगार साबित होते हैं। पशुपालक यदि पशुओं के बैठने के स्थान को सूखा और साफ नहीं रखते हैं, तो थन के सीधे संपर्क में आने वाले कीटाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इस जोखिम को कम करने के लिए बाड़े और आसपास की नियमित सफाई के साथ जरूरत पड़ने पर फिनाइल का छिड़काव करना अत्यंत आवश्यक है।

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थनैला के लक्षण और दूध उत्पादन पर पड़ने वाला असर

थनैला रोग का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव दुधारू पशुओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके दूध उत्पादन की क्षमता पर पड़ता है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर पशु के थन में अत्यधिक सूजन आ जाती है और उसे तेज दर्द का सामना करना पड़ता है। संक्रमण बढ़ने पर दूध का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है, और थन से दूध निकालने पर वह जमा हुआ, गाढ़ा या असामान्य स्वरूप में बाहर आता है। इससे न केवल मवेशी को असहनीय पीड़ा होती है, बल्कि दूध की गुणवत्ता भी पूरी तरह खराब हो जाती है। यदि प्रारंभिक अवस्था में ही इस समस्या का सही इलाज न कराया जाए, तो यह बीमारी अत्यंत गंभीर रूप धारण कर सकती है और पशु हमेशा के लिए दूध देने की स्थिति से बाहर हो सकता है।

अन्य पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा और बचाव के कदम

गौशालाओं या ऐसे फार्मों पर जहां बड़ी संख्या में दुधारू मवेशी एक साथ रखे जाते हैं, वहां थनैला संक्रमण के तेजी से फैलने का जोखिम सबसे अधिक होता है। यदि किसी एक पशु में इस बीमारी के शुरुआती संकेत नजर आते हैं, तो उसे बिना किसी देरी के अन्य स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग कर देना चाहिए। संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाली बाल्टी, कपड़े और अन्य उपकरणों की अच्छी तरह से सफाई और रोगाणुनाशन करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, फर्श, बाड़े और आसपास के पूरे परिसर को हमेशा स्वच्छ बनाए रखना चाहिए।

थन की स्वच्छता और त्वरित डॉक्टरी उपचार की सलाह

दूध निकालने की प्रक्रिया के दौरान विशेष स्वच्छता बनाए रखना इस बीमारी से बचाव का सबसे असरदार तरीका है। रजनीश कुमार ने सलाह दी है कि पशुपालकों को दूध निकालने से ठीक पहले और दूध निकालने के तुरंत बाद पशुओं के थन की अच्छी तरह से धुलाई और सफाई करनी चाहिए। यदि बाड़े में किसी भी पशु में सूजन या दूध में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय तुरंत योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में प्रभावित थन पर मैस्टीलेप दवा लगाने से संक्रमण को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है।

सवाल-जवाब

कोडरमा में दुधारू पशुओं में कौन सा संक्रमण तेजी से फैल रहा है?
कोडरमा में बरसात के मौसम की नमी और अस्वच्छ वातावरण के कारण दुधारू पशुओं में थनैला संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
थनैला बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं?
इस रोग में पशु के थन में सूजन और दर्द होता है, तथा दूध सामान्य रूप से निकलने के बजाय जमा हुआ या गाढ़ा निकलता है।
बरसात में थनैला संक्रमण फैलने का मुख्य कारण क्या है?
बाड़े में लंबे समय तक नमी और गंदगी बने रहने से कीटाणुओं और मक्खी-मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जो इस बीमारी को फैलाते हैं।
संक्रमित पशु मिलने पर पशुपालकों को क्या कदम उठाना चाहिए?
बीमार पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए, बाड़े की सफाई रखनी चाहिए और पशु चिकित्सक की सलाह से थन पर मैस्टीलेप दवा लगानी चाहिए।
दूध निकालते समय स्वच्छता क्यों जरूरी है?
दूध निकालने से पहले और बाद में थन को अच्छी तरह साफ करने से कीटाणुओं के प्रवेश और संक्रमण के फैलाव को रोका जा सकता है।
क्या थनैला रोग एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकता है?
हां, विशेषकर जहां बड़ी संख्या में पशु एक साथ रहते हैं, वहां संक्रमित पशु और उसके सामान के संपर्क से यह बीमारी दूसरे मवेशियों में फैल सकती है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

मानसून के दौरान पशुओं में फैलने वाला यह थनैला संक्रमण न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादन पर सीधा प्रहार है, बल्कि पशुपालकों की आजीविका के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर रहा है। शुरुआती लक्षणों की पहचान न होने पर पशुओं का हमेशा के लिए दूध देना बंद हो जाना ग्रामीण परिवारों की आय को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। इसके प्रसार को रोकने के लिए ब्लॉक स्तर पर पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन और तुरंत टीकाकरण अभियान चलाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि समय रहते इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पशुओं में होने वाला यह संक्रमण केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अपराध या लापरवाही से जुड़े नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है। समय पर उचित साफ-सफाई और बाड़े की देखरेख न होना कई बार पशु क्रूरता या प्रशासनिक उदासीनता की श्रेणी में आता है, जिससे पशुपालकों की आजीविका सीधे प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन को चाहिए कि वह पशु स्वास्थ्य निगरानी समितियों को सक्रिय करे और गांवों में जाकर औचक निरीक्षण करे, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।

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