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नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का खौफनाक मंजर, बाल-बाल बचे दीपक तमांग ने सुनाई आपबीतीएशिया
29 अग॰ 2026, 6:43 pm (59 मिनट पहले)· 2

नेपाल में प्रलयकारी बाढ़ का खौफनाक मंजर, बाल-बाल बचे दीपक तमांग ने सुनाई आपबीती

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से बचे दीपक तमांग ने उस डरावनी घटना को याद किया है जब उन्होंने पानी और कीचड़ के सैलाब के बीच अपनी जान बचाई।

नेपाल में हाल ही में आई अचानक और भीषण बाढ़ की चपेट से किसी तरह अपनी जान बचाकर निकलने वाले दीपक तमांग ने उस प्रलयकारी मंजर को याद करते हुए अपनी आपबीती साझा की है। इस भयावह आपदा के दौरान लोगों में ऊंची जगहों की तरफ सुरक्षित भागने की भारी होड़ मच गई थी, जहां देखते ही देखते पानी ने कई घरों को जमींदोज कर दिया और तमाम लोग पानी, कीचड़ तथा मलबे के तेज बहाव में बह गए। शुरुआती पलों में दीपक तमांग को ऐसा महसूस हुआ था कि शायद कोई भूकंप आ गया है और धरती कांप रही है। लेकिन जब उन्होंने अपनी आंखों से पानी, गाद और भारी पत्थरों के सैलाब को तिमुरे मार्केट के पास भोटेकोशी नदी के किनारे खड़े मकानों की तरफ तेजी से बढ़ते हुए देखा, तो उन्हें समझ आ गया कि अपनी जान बचाने के लिए फौरन किसी ऊंची पहाड़ी की चढ़ाई करने के अलावा उनके पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

पहाड़ी की तरफ भागने के अलावा नहीं था कोई विकल्प

अपनी जान बचाने के उस संघर्ष को याद करते हुए दीपक तमांग ने बताया कि जब वे अपने घर से बाहर निकले और जान बचाने के लिए ऊपर पहाड़ी की तरफ दौड़े, तो उस समय तक भयंकर बाढ़ के पानी के कारण कई मकान पहले ही जमींदोज हो चुके थे। उस संकट की घड़ी में उनके सामने विकल्पों की बहुत कमी थी। एक तरफ उनके पीछे जानलेवा बाढ़ का पानी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा था और दूसरी तरफ उनके ठीक सामने एक खड़ी दीवार की तरह ऊंची पहाड़ी मौजूद थी, जिस पर चढ़ना अपने आप में एक बड़ी चुनौती था।

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कांटेदार झाड़ियों और पौधों का सहारा लेकर चढ़े ऊपर

दीपक तमांग के अनुसार, शुरुआत में उन्होंने नीचे ढलान की ओर दौड़ लगाई और उस कठिन पहाड़ी पर चढ़ने का पुरजोर प्रयास शुरू किया जो बिल्कुल सीधी दीवार जैसी नजर आ रही थी। इस मुश्किल भरी चढ़ाई के दौरान उनका संतुलन कई बार डगमगाया और वे जमीन पर गिर पड़े, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आसपास उग रही कांटेदार झाड़ियों तथा पौधों को मजबूत पकड़ के साथ थामते हुए ऊपर की तरफ अपना सफर जारी रखा।

वह मेरी जिंदगी का सबसे आखिरी पल लग रहा था

घटना के उस खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए दीपक तमांग ने आगे बताया कि वह पूरा वाकया उनकी जिंदगी और मौत के बीच लड़ी जाने वाली आखिरी और सबसे बड़ी जंग जैसा लग रहा था। जब भी वे चढ़ाई के दौरान फिसलकर नीचे गिरते थे, तो उनके मन में यही विचार आता था कि शायद अब उनके जीवन का यह आखिरी लम्हा ही बचा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस भयंकर बाढ़ के पानी से अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में वहां मौजूद तमाम लोग अलग-अलग दिशाओं में अपनी जान बचाने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे।

आंखों के सामने पानी में बह गए साथी

दीपक तमांग ने दुखद लहजे में बताया कि आखिरकार जब वे किसी तरह संघर्ष करते हुए पहाड़ी की चोटी पर सुरक्षित पहुंचे, तो उन्होंने नीचे देखा कि कई लोग बाढ़ के उग्र और तेज पानी में लगातार बह रहे थे, जिनमें उनके अपने कुछ दोस्त भी शामिल थे। जब वे अपनी आंखों के सामने अपने साथियों को उन तेज और खतरनाक लहरों में लाचारी की हालत में बहते हुए देख रहे थे, तो उन्हें बचाने के लिए वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे। इस आपदा के बाद नेपाल के राष्ट्रपति ने भारत की मदद के लिए आभार जताया है, जबकि नेपाली मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेहद उदार व्यक्तित्व बताया है।

सवाल-जवाब

नेपाल में बाढ़ के दौरान दीपक तमांग को सबसे पहले क्या लगा था?
शुरुआत में दीपक तमांग को ऐसा लगा था कि धरती हिल रही है और भूकंप आ गया है।
दीपक तमांग ने अपनी जान बचाने के लिए क्या किया?
वे अपने घर से बाहर निकले और जान बचाने के लिए सामने खड़ी ऊंची पहाड़ी की तरफ भागे।
पहाड़ी पर चढ़ते समय दीपक तमांग ने किस चीज का सहारा लिया?
चढ़ाई के दौरान गिरने पर उन्होंने खुद को संभालने के लिए कांटेदार झाड़ियों और पौधों को पकड़ा।
घटना के वक्त दीपक तमांग ने अपनी आंखों से क्या देखा?
उन्होंने पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर अपने कुछ दोस्तों सहित कई लोगों को बाढ़ के तेज पानी में बहते हुए देखा।
इस आपदा के बाद नेपाल के राष्ट्रपति ने किस देश की तारीफ की है?
नेपाल के राष्ट्रपति ने बाढ़ राहत सहायता के लिए भारत की मदद की तारीफ की है।
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