रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बीकानेर के नापासर थाने में महिला सशक्तिकरण और बेटियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयां देने वाली एक अनूठी तस्वीर सामने आई। यहां कक्षा 12वीं में अध्ययनरत छात्रा मोहिता पारीक को प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के लिए नापासर थाने की थानाधिकारी की कमान सौंपी गई। थानाधिकारी कविता पुनिया ने खुद अपनी कुर्सी से उठकर मोहिता को कुर्सी पर बैठाया, ताकि वह पुलिसिंग की कार्यप्रणाली को बहुत करीब से समझ सकें और समाज की अन्य बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके।
थानाधिकारी की कुर्सी पर बैठकर दिए बेबाक जवाब
थानाधिकारी की कुर्सी संभालने के बाद मोहिता पारीक ने बेहद आत्मविश्वास के साथ पुलिस विभाग और कानून व्यवस्था से जुड़े तमाम सवालों के सटीक जवाब दिए। जब उनसे बीकानेर जिले के पुलिस अधीक्षक का नाम पूछा गया, तो उन्होंने तुरंत मृदुल कच्छवा का नाम बताया। इसके अलावा, पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने ऑपरेशन नीलकंठ की पूरी जानकारी दी। मोहिता ने इस दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों का भी जिक्र किया और लड़कियों को पूरी तरह सतर्क और जागरूक रहने की सलाह दी।
मेहनत और लगन को बताया सफलता का एकमात्र रास्ता
एक दिन की थानाधिकारी बनने के अपने इस खास अनुभव को साझा करते हुए मोहिता ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी की इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर बैठना उनके लिए एक बिल्कुल नया और अद्भुत अनुभव रहा। मोहिता का मानना है कि जीवन में ऐसी बड़ी जिम्मेदारियों को हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम, लगन और मन लगाकर पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। उन्होंने क्षेत्र की सभी बेटियों को अपने जीवन के लक्ष्यों के प्रति गंभीर रहने और लगातार प्रयास करते रहने का मजबूत संदेश दिया।
पुलिस कार्यप्रणाली और सुरक्षा उपायों पर हुई चर्चा
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान थानाधिकारी कविता पुनिया ने मोहिता के साथ-साथ वहां उपस्थित अन्य बहनों को भी पुलिस विभाग के कामकाज के तरीके, महिला सुरक्षा और पुलिस सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने लड़कियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कठिन परिस्थिति या परेशानी के समय बिना किसी झिझक के पुलिस की मदद लेनी चाहिए और अपने कानूनी अधिकारों के प्रति हमेशा जागरूक रहना चाहिए। रक्षाबंधन के मौके पर नापासर थाने की इस पहल ने न सिर्फ बेटियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि उन्हें पुलिस व्यवस्था के और करीब लाने का काम किया। एक दिन की थानाधिकारी बनकर मोहिता ने जहां एक ओर प्रशासनिक जिम्मेदारी का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया, वहीं दूसरी ओर इस आयोजन ने वहां मौजूद तमाम बेटियों के दिलों में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की ललक पैदा कर दी।





















