त्योहारों के सीजन की दस्तक के साथ ही बीकानेर में प्रसिद्ध रसगुल्लों और तमाम पारंपरिक मिठाइयों के लिए मांग में जोरदार तेजी देखी जा रही है। हालांकि इस बार त्योहारी उमंग के बीच उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी ने स्थानीय मिठाई कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चीनी के भावों में लगातार आ रहे उछाल का सीधा असर अब मिठाइयों की निर्माण प्रक्रिया और उसकी अंतिम कीमत पर साफ तौर पर नजर आ रहा है। मिठाई निर्माताओं और दुकानदारों का कहना है कि चीनी के अलावा दूध, मावा, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी कच्चे माल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मुनाफा कम और लागत कहीं ज्यादा हो गई है।
महंगी चीनी और घटती आपूर्ति
बाजार के जानकारों और व्यापारियों के अनुसार, कुछ समय पहले तक जो चीनी लगभग 40 रुपये प्रति किलो के भाव पर मिलती थी, वह अब बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो से भी अधिक के स्तर पर पहुंच चुकी है। चीनी की कीमतों में इस भारी उछाल का सबसे अधिक दबाव रसगुल्ले जैसी उन खास मिठाइयों पर पड़ रहा है, जिनमें चीनी की चाशनी और मात्रा का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है। उत्पादन लागत में हुई इस बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए कारोबारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में रसगुल्ले और अन्य लोकप्रिय मिठाइयों के दाम 15 से 20 फीसदी तक और ऊपर जा सकते हैं।
बाजार में पहले ही बढ़ चुके हैं दाम
दुकानों और बाजारों में स्थिति यह हो गई है कि कई प्रमुख मिठाइयों के भाव पहले ही 25 से 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाए जा चुके हैं। एक तरफ जहां त्योहारी सीजन के कारण बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ महंगा कच्चा माल दुकानदारों के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहा है। दुकानदारों का तर्क है कि लागत निकलने के बाद कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है, जिसका असर सीधे तौर पर ग्राहकों की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों और खास तौर पर गृहिणियों का बजट पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है।
आम जनता और त्योहारों का बिगड़ा बजट
गृहिणियों का मानना है कि दाल-चावल और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम पहले से ही ऊंचे थे, ऐसे में चीनी और मिठाइयों के महंगे होने से त्योहारों का पूरा वित्तीय गणित गड़बड़ा गया है। परंपराओं के अनुसार पर्व-त्योहारों पर मिठाइयों की खरीदारी करना अनिवार्य माना जाता है, लेकिन आसमान छूते दामों के कारण अब लोगों को मिठाइयों की मात्रा में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इस पूरी स्थिति ने पर्व की खुशियों को थोड़ा फीका जरूर कर दिया है।
एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति का संकट
बाजार में चर्चा है कि गन्ने का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल के उत्पादन में इस्तेमाल किए जाने के कारण चीनी मिलों के लिए गन्ने की उपलब्धता कम हो गई है। इसी आपूर्ति असंतुलन को चीनी के दाम में लगातार आ रहे उछाल का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। वजह चाहे जो भी हो, इस मंहगाई का सबसे बड़ा खामियाजा उस आम उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है जो त्योहारों के मौके पर अपनों के साथ मीठी यादें बांटना चाहता है। ग्राहकों का मानना है कि चीनी भले ही व्यंजनों में मिठास घोलती हो, लेकिन इसके बढ़ते दाम त्योहारों की असली मिठास को फीका करने का काम कर रहे हैं।


















