राजस्थान के नागौर जिले में स्थित परबतसर के ऐतिहासिक वीर तेजा पशु मेले का रविवार को भव्य पुरस्कार वितरण समारोह के साथ औपचारिक समापन हो गया। पिछले कई दिनों से पशुपालकों, व्यापारियों और स्थानीय ग्रामीणों की भारी चहल-पहल से गुलजार रहने वाला मेला मैदान अब धीरे-धीरे खाली होने लगा है। खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे व्यापारी और पशुपालक अपने मवेशियों के साथ घर वापसी की राह पर निकल पड़े हैं। मेले के समापन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गई है ताकि सभी प्रतिभागियों की रवानगी को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सके।
1,296 मवेशियों की आवक ने बढ़ाई मेले की रौनक
इस वर्ष आयोजित हुए मेले की सबसे बड़ी खासियत पशुओं की कुल संख्या और उनकी विविध नस्लें रहीं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार मेले में कुल 1,296 पशुओं की आवक दर्ज की गई। इनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी गोवंश की देखने को मिली, जहां कुल 970 गायों और बैलों की आवक हुई। इसके अलावा 270 भैंस वंश, 46 ऊंट वंश और 13 अश्व वंश के पशु भी मेले का आकर्षण बने। विभिन्न प्रजातियों के मवेशियों की इस व्यापक मौजूदगी ने वीर तेजा पशु मेले की पारंपरिक और सांस्कृतिक साख को मजबूती प्रदान की है।
व्यापारियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की विशेष एस्कॉर्ट व्यवस्था
मेला परिसर से हजारों पशुओं और उनके मालिकों की एक साथ सुरक्षित रवानगी प्रशासन के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। व्यापारी अपने पशुओं के साथ अलग-अलग राज्यों और दूरदराज के क्षेत्रों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सड़कों और राजमार्गों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस तथा प्रशासनिक टीमें व्यापारियों को सुरक्षित एस्कॉर्ट प्रदान कर रही हैं। इससे मवेशी ले जा रहे व्यापारियों को रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पशुपालन विभाग द्वारा सख्त दस्तावेजी प्रक्रिया और चिट्ठियों की जारी
सुरक्षित आवाजाही के साथ-साथ पशुपालन विभाग भी मवेशियों की निकासी को लेकर पूर्ण रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मेले से बाहर ले जाए जा रहे प्रत्येक पशु के लिए विभाग द्वारा आवश्यक आधिकारिक चिट्ठियां एवं रवानगी पास तैयार किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की कड़ी निगरानी में यह पूरी कागजी प्रक्रिया संपन्न की जा रही है। इस व्यवस्था से जहां एक तरफ पशुओं के परिवहन और स्वामित्व का पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन को मेले से बाहर जाने वाले सभी पशुओं और व्यापारियों का सटीक आंकड़ा प्राप्त हो रहा है।
उत्कृष्ट नस्ल के पशुपालकों को पारितोषिक देकर किया गया सम्मानित
वीर तेजा पशु मेले का अंतिम दिन केवल औपचारिक रवानगी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि समापन कार्यक्रम के दौरान एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में मेले में आए पशुपालकों और व्यापारियों के उत्कृष्ट मवेशियों को उनकी नस्ल, शारीरिक गुणवत्ता और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर सम्मानित किया गया। विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को पारितोषिक प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही पशु प्रदर्शनी और खरीद-बिक्री की तमाम गतिविधियों का विधिवत समापन घोषित कर दिया गया।





















