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राजस्थान निकाय चुनाव: टिकट वितरण के बाद बीजेपी और कांग्रेस में घमासान, बागियों को मनाने में जुटे दोनों दलराजस्थान
1 सित॰ 2026, 7:24 pm (55 मिनट पहले)· 2

राजस्थान निकाय चुनाव: टिकट वितरण के बाद बीजेपी और कांग्रेस में घमासान, बागियों को मनाने में जुटे दोनों दल

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 के टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रमुख दलों में घमासान मच गया है। टिकट कटने से नाराज नेताओं को मनाने और चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए दोनों दलों के प्रदेश अध्यक्षों ने मोर्चा संभाल लिया है।

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 के नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के भीतर टिकट वितरण को लेकर गहमागहमी और बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों में टिकट बंटवारे के बाद असंतोष और बगावत के सुर उठने लगे हैं, जिन्हें शांत करने के लिए संगठन के शीर्ष नेता सक्रिय हो गए हैं। टिकट वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मचे घमासान ने चुनावी सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है।

गोविंद सिंह डोटासरा का बयान और डैमेज कंट्रोल

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने टिकट बंटवारे के बाद पार्टी के भीतर सामने आ रही नाराजगी पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट वितरण के दौरान कोई भी पैमाना सौ फीसदी परफेक्ट नहीं हो सकता है, और जिस कार्यकर्ता का हक मारा जाता है उसका नाराज होना स्वाभाविक है। डोटासरा ने जोर देकर कहा कि जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है, उन्हें मनाना और समझाना पार्टी का मुख्य धर्म और कर्तव्य है, और संगठन इसी दिशा में पूरी तत्परता से काम कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने नाराज नेताओं को पार्टी संगठन में पूरा मान-सम्मान देने का भी भरोसा दिलाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में बोर्ड और आयोगों के गठन के दौरान ऐसे नेताओं को प्राथमिकता के आधार पर अवसर प्रदान किया जाएगा। डोटासरा ने यह भी बताया कि उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में केवल शीर्ष नेतृत्व ने ही फैसले नहीं लिए, बल्कि जिला अध्यक्षों, मंडल प्रभारियों, ब्लॉक इकाइयों और कोऑर्डिनेटर्स को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया था। संगठन के विभिन्न स्तरों से विस्तृत फीडबैक और राय लेने के बाद ही टिकटों को अंतिम रूप दिया गया था।

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युवाओं को प्राथमिकता और भीलवाड़ा का विवाद

टिकटों के बंटवारे में युवाओं की भागीदारी पर बात करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी ने पचास प्रतिशत से अधिक टिकट युवा चेहरों को बांटे हैं। उनके अनुसार, नई पीढ़ी को राजनीति में आगे बढ़ाना हमेशा से कांग्रेस की प्राथमिकताओं में रहा है और निकाय चुनाव के माध्यम से नए लोगों को प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव देने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इसके बावजूद कई क्षेत्रों से बगावत और नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं, जिस पर डोटासरा का कहना है कि हर एक व्यक्ति को पूरी तरह संतुष्ट करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता है, लेकिन छूटे हुए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना ही संगठन की असली जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, भीलवाड़ा में चौदह सिंबल समय पर जमा न होने के गंभीर मामले पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा। जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि आखिर किन कारणों से वे चौदह सिंबल जमा नहीं किए जा सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की गलती या लापरवाही पाई जाती है, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी और अदालत का दरवाजा खटखटाएगी, जिससे यह साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रखेगी।

मथानिया की घटना और सरकार पर कड़े हमले

मथानिया के एक विशिष्ट मामले का जिक्र करते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय विधायक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित बीजेपी विधायक ने पुलिस के कड़े पहरे के बीच अपना सिंबल जमा कराया, जो लोकतंत्र की मर्यादा पर एक बड़ा कलंक है। डोटासरा ने सत्ता के खुले दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान सरकारी मशीनरी और पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल किसी खास दल या व्यक्ति के पक्ष में नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने भजनलाल सरकार के पूरे कार्यकाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था और अपराध का बोलबाला रहा है, जबकि आम जनता के हित में कोई नया विकास कार्य या बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया गया। जल परियोजनाओं के मोर्चे पर भी सरकार को घेरते हुए उन्होंने यमुना जल, आरसीपी और राम जल सेतु को लेकर किए जा रहे दावों को कोरा झूठ बताया और कहा कि जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है। अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव के परिणाम सभी को चौंका देंगे और कांग्रेस इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करेगी।

मदन राठौड़ का दावा और वन स्टेट वन इलेक्शन की सराहना

विपक्षी खेमे में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने आश्वस्त किया कि पार्टी के भीतर जो भी बागी तेवर सामने आए हैं, उन सभी नाराज लोगों को समय रहते मना लिया जाएगा। राठौड़ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित परिवार की तरह है और परिवार के सभी सदस्यों को साथ लेकर चलना पार्टी की पुरानी परंपरा रही है। निकाय चुनाव को लेकर उन्होंने अपनी पार्टी की भारी जीत का दावा किया और कहा कि इस बार राज्य में पहली बार 'वन स्टेट वन इलेक्शन' की व्यवस्था लागू की गई है, जो भजनलाल सरकार की एक ऐतिहासिक और बड़ी उपलब्धि है। राठौड़ ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके पास जनता को भ्रमित करने के अलावा और कुछ नहीं बचा है, और स्थिति यह है कि कांग्रेस को चुनाव मैदान में उतारने के लिए ढंग के उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शहरी इलाकों की जनता का अटूट भरोसा पहले भी बीजेपी के साथ था और आगामी परिणामों में भी यह विश्वास पूरी तरह कायम रहेगा।

शहर-शहर खिलेगा कमल का नारा

चुनाव परिणामों को लेकर अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताते हुए बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने अपना पुराना नारा दोहराया कि संगठन की हर एक कड़ी से कड़ी जुड़ेगी और प्रदेश के हर शहर में कमल खिलेगा। इस तरह से देखा जाए तो टिकटों के बंटवारे के बाद जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी अपने नाराज नेताओं को समझाने और संगठन में उनके सियासी भविष्य को सुरक्षित करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी भी अपने बागी कार्यकर्ताओं को वापस पार्टी की मुख्यधारा में लाने का पूरा प्रयास कर रही है। दोनों ही प्रमुख दल आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी-अपनी जीत के बड़े दावे कर रहे हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि टिकट वितरण के बाद उपजी इस नाराजगी को दोनों दल कितनी कुशलता से संभाल पाते हैं और इसका स्थानीय चुनावों के अंतिम परिणामों पर कितना गहरा असर पड़ता है।

सवाल-जवाब

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव किस वर्ष हो रहे हैं?
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 के तहत आयोजित किए जा रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने टिकट वितरण के पैमाने को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि टिकट वितरण में सौ फीसदी परफेक्ट पैमाना नहीं होता है और जिसका हक मारा जाता है वह नाराज होता है।
कांग्रेस ने टिकटों के बंटवारे में युवाओं को कितनी हिस्सेदारी देने का दावा किया है?
कांग्रेस ने टिकट वितरण में पचास प्रतिशत से ज्यादा टिकट युवाओं को देने का दावा किया है।
भीलवाड़ा में कांग्रेस के कितने सिंबल जमा नहीं होने का मामला सामने आया है?
भीलवाड़ा में चौदह सिंबल समय पर जमा नहीं होने का मामला सामने आया है जिसकी जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी।
मथानिया के मामले में कांग्रेस ने किस पर आरोप लगाया है?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मथानिया में एक बीजेपी विधायक ने पुलिस पहरे में अपना सिंबल जमा कराया है।
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने बागियों की नाराजगी को लेकर क्या कहा?
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि बीजेपी एक परिवार की तरह है और पार्टी अपने सभी बागियों को मना लेगी।
मदन राठौड़ ने राज्य में किस नई व्यवस्था को बड़ी उपलब्धि बताया है?
मदन राठौड़ ने राज्य में पहली बार लागू हो रहे 'वन स्टेट वन इलेक्शन' को एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·44 मिनट पहले

राजस्थान निकाय चुनावों में टिकट वितरण के बाद दोनों प्रमुख दलों में उपजा असंतोष और भीलवाड़ा में सिंबल जमा न होने का विवाद यह साबित करता है कि जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी चुनाव परिणामों को सीधे प्रभावित करेगी। जब तक बागी नेताओं और छूटे हुए कार्यकर्ताओं को वार्ड स्तर पर समय रहते नहीं साधा जाता, तब तक चुनावी मैदान में भितरघात का खतरा दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, भीलवाड़ा में चौदह सिंबल समय पर जमा न होने का मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आंतरिक गुटबाजी का परिणाम प्रतीत होता है। यदि इस तकनीकी लापरवाही और टिकट बंटवारे के असंतोष पर समय रहते कानूनी या संगठनात्मक नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करेगा और मैदान में भितरघात का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा।

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