डीएमके ने उड़ाई विजय की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी की खिल्ली, कहा- विधानसभा में बहुमत तक नहीं मिलाखुद 45 किलो वजन और उठा लिया 140 किलो, जानिए पावरलिफ्टिंग में चमकने वाली कीया बनर्जी की कहानीलाइव: नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही: टनल से 2 मजदूर बचाए गए, मृतकों की संख्या 1,282 पहुंचीअमेरिकी डॉलर में नरमी और फेडरल रिजर्व के बदलते रुख के बीच मजबूत हुआ न्यूजीलैंड डॉलरमानसून में ऑफिस लैपटॉप को नमी और पानी से बचाने के 5 असरदार तरीकेबिजली और गरजते बादलों से क्यों बढ़ जाती है शारीरिक अंतरंगता, जानिए इस अनोखे शौक के बारे मेंकेवल सेक्स वर्कर ही नहीं, बल्कि अपने मंगेतर के साथ हफ्ते में पांच बार संबंध बनाती हैं एमी जिंजर हार्टभगवान जगन्नाथ के पास है 1912 करोड़ रुपये की नकदी और 60821 एकड़ जमीन, जानें देश के सबसे अमीर 5 मंदिरों की पूरी सूचीगन्ने का जूस बनाम नारियल पानी, गर्मियों में सेहत के लिए कौन सा विकल्प है सबसे बेहतर?राधा दामोदर मंदिर में दोपहर को जन्म लेते हैं कान्हा, वृंदावन से जुड़ा है 500 साल पुराना इतिहास
राधा दामोदर मंदिर में दोपहर को जन्म लेते हैं कान्हा, वृंदावन से जुड़ा है 500 साल पुराना इतिहासराजस्थान
4 सित॰ 2026, 11:57 am (39 मिनट पहले)· 3

राधा दामोदर मंदिर में दोपहर को जन्म लेते हैं कान्हा, वृंदावन से जुड़ा है 500 साल पुराना इतिहास

जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित ऐतिहासिक श्री राधादामोदर मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व बाकी जगहों से अलग अंदाज़ में मनाया जाता है। यहाँ रात के बजाय दोपहर ठीक 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर छोटी काशी जयपुर के तमाम कृष्ण मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शहर के मध्य ऐतिहासिक चारदीवारी क्षेत्र के चौड़ा रास्ता में स्थित श्री राधादामोदर मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं और गौरवशाली इतिहास के कारण पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता है। जयपुर के लगभग सभी मुख्य कृष्ण मंदिरों का सीधा संबंध वृंदावन की पवित्र पावन भूमि से जुड़ा हुआ है।

दिन के बारह बजे होता है जन्मोत्सव

दुनिया भर के अधिकांश कृष्ण मंदिरों में जहाँ जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव रात के बारह बजे मनाया जाता है, वहीं श्री राधादामोदर मंदिर इस मामले में बिल्कुल अनूठा है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है जहाँ रात्रि की बजाय दिन के ठीक बारह बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी मनाई जाती है।

ये भी पढ़ें

वृंदावन से जयपुर तक का पाँच सौ साल पुराना सफर

मंदिर के महंत मलय गोस्वामी के मुताबिक भगवान का यह पवित्र विग्रह करीब पाँच सौ वर्ष पुराना है और इसका सीधा नाता वृंदावन धाम से है। आज से लगभग पाँच सदी पहले यह विग्रह वृंदावन में प्रकट हुआ था। सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी नाम के दोनों भाइयों ने मिलकर इस विग्रह को तैयार किया था और इसकी सेवा की जिम्मेदारी अपने भतीजे जीव गोस्वामी को सौंपी थी।

मुगल शासक औरंगजेब के दौर में जब मंदिरों को तोड़ने और पूजा-पाठ पर रोक लगाने के फरमान जारी हुए, तब इस प्राचीन विग्रह पर भी बड़ा संकट आ गया था। औरंगजेब को मंदिरों में घंटियाँ बजना और दीप जलना बिल्कुल रास नहीं आता था। इस खतरे की खबर मिलते ही नंदलाल गोस्वामी ने जयपुर के राजा जयसिंह तक पैगाम पहुँचाया। खबर मिलते ही राजा जयसिंह ने फौरन कदम उठाते हुए तेज रफ्तार रथों के जरिए गोविंद देव जी, गोपीनाथ जी, राधादामोदर जी, मदन मोहन जी और श्रीनाथ जी समेत तमाम प्राचीन विग्रहों को सुरक्षित जयपुर मंगवा लिया और शहर के अलग-अलग स्थानों पर उनकी स्थापना कराई।

क्यों मनाई जाती है दोपहर में जन्माष्टमी

इस मंदिर में दोपहर के समय जन्मोत्सव मनाने की प्रथा भी लगभग पाँच सौ साल पुरानी है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर रूप की पूजा की जाती है जो उनके बेहद छोटे और कोमल बाल स्वरूप को बयां करता है। ठाकुर जी के इसी सुकुमार रूप को ध्यान में रखते हुए उस समय के सभी गोस्वामियों ने यह फैसला लिया था कि बाल कृष्ण का जन्मोत्सव रात के बजाय दिन के बारह बजे ही मनाया जाना चाहिए, जो परंपरा आज तक बिना किसी रुकावट के चली आ रही है।

सवाल-जवाब

श्री राधादामोदर मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर जयपुर के ऐतिहासिक चारदीवारी बाजार स्थित चौड़ा रास्ता में स्थित है।
यहाँ जन्माष्टमी पर जन्मोत्सव किस समय मनाया जाता है?
इस मंदिर में रात के बजाय दोपहर ठीक 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
यह विग्रह कितना पुराना है?
मंदिर का यह पावन विग्रह लगभग 500 वर्ष पुराना है जिसका सीधा संबंध वृंदावन से है।
इन विग्रहों को वृंदावन से जयपुर कौन लेकर आया था?
जयपुर के राजा जयसिंह ने नंदलाल गोस्वामी की सूचना पर इन प्राचीन विग्रहों को सुरक्षित जयपुर बुलवाया था।
मंदिर में भगवान के किस रूप की पूजा की जाती है?
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण के दामोदर रूप की पूजा की जाती है जो उनके अत्यंत नन्हें बाल स्वरूप को दर्शाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR