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राजस्थान में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प को हरी झंडी, हजारों जर्जर भवनों को मिलेगी नई जिंदगीराजस्थान
4 सित॰ 2026, 12:15 pm (20 मिनट पहले)· 2

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प को हरी झंडी, हजारों जर्जर भवनों को मिलेगी नई जिंदगी

भजनलाल सरकार ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने के लिए 1200 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके तहत हजारों जर्जर भवनों की मरम्मत और नए निर्माण कार्य किए जाएंगे।

राज्य में शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामियों को दूर करने और सरकारी विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेशभर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 1200 करोड़ रुपये का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन तमाम शैक्षणिक संस्थानों का कायाकल्प करना है जो काफी समय से जर्जर हालात में चल रहे हैं। इसके जरिए विद्यार्थियों को एक सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक माहौल मुहैया कराने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलने के साथ ही वित्तीय संसाधनों का आवंटन भी शुरू कर दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकारी विद्यालयों का भौतिक स्वरूप पूरी तरह से सुधर जाएगा।

नए भवनों का निर्माण और असुरक्षित इमारतों की पहचान

शिक्षा के बुनियादी ढांचे को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने कुल 1293 नए स्कूल भवनों का निर्माण कराने का खाका खींचा है। इस चरणबद्ध योजना के तहत प्रशासनिक स्तर पर 1096.55 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी कर दी गई है। प्रदेशभर में शिक्षा विभाग के सर्वे के मुताबिक वर्तमान समय में कुल 3768 स्कूल भवनों को जर्जर और विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इन पुराने और खतरनाक ढांचों की जगह आधुनिक एवं सुरक्षित इमारतों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके और पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।

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समग्र शिक्षा योजना के तहत तय हुआ प्रति स्कूल बजट

सरकारी विद्यालयों की अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से फंड का वितरण समग्र शिक्षा अभियान के प्रावधानों के तहत तय किया गया है। प्राथमिक स्तर के नए स्कूलों के भवनों को तैयार करने के लिए प्रति स्कूल 73 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अलावा मिडिल स्कूलों के बुनियादी ढांचे को उच्च स्तरीय बनाने के लिए प्रत्येक स्कूल के हिसाब से 100.96 लाख रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है। उच्च शिक्षा और बड़े परिसरों की आवश्यकता को देखते हुए सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए प्रति स्कूल 449 लाख रुपये की बड़ी राशि मंजूर की गई है, जिससे वहां अत्याधुनिक कक्षाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।

जयपुर और उदयपुर संभाग को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

इस वित्तीय योजना के तहत राज्य के प्रमुख और बड़े जिलों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। राजधानी जयपुर जिले में कुल 143 स्कूलों के कायाकल्प और नए भवनों के निर्माण के लिए 19340.14 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। दूसरी तरफ आदिवासी बहुल और विस्तृत क्षेत्र वाले उदयपुर जिले में 393 स्कूलों की दशा सुधारने के लिए 24733.06 लाख रुपये की भारी राशि स्वीकृत की गई है। इस बड़े आर्थिक निवेश से इन दोनों जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उनके भविष्य निर्माण के लिए एक बेहतर भौतिक वातावरण तैयार होगा।

आचार संहिता के कारण निर्माण कार्यों में दो महीने की देरी

भले ही सरकार की तरफ से वित्तीय मंजूरियां और बजट का आवंटन कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने में थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। राजस्थान में जल्द ही स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, जिसके चलते राज्य में आचार संहिता लागू होने के आसार हैं। इस चुनावी प्रक्रिया के कारण टेंडर जारी करने और जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू होने में लगभग दो महीने का वक्त अतिरिक्त लग सकता है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आचार संहिता समाप्त होते ही इन सभी 1293 चिन्हित स्कूलों में युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे ताकि तय समयसीमा में प्रोजेक्ट पूरे हो सकें।

सवाल-जवाब

राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के लिए कुल कितना बजट तैयार किया है?
भजनलाल सरकार ने सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1200 करोड़ रुपये का रोडमैप तैयार किया है।
प्रदेश में कुल कितने स्कूल भवनों को जर्जर घोषित किया गया है?
पूरे राजस्थान में 3768 स्कूल भवनों को जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया है।
नए स्कूलों के निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?
सरकार ने 1293 नए स्कूल भवनों के निर्माण के लिए 1096.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
जयपुर जिले में कितने स्कूलों के लिए बजट मिला है?
जयपुर जिले में 143 स्कूलों के कायाकल्प के लिए 19340.14 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
उदयपुर जिले के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है?
उदयपुर जिले में 393 स्कूलों की हालत सुधारने के लिए 24733.06 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।
निर्माण कार्यों में दो महीने की देरी क्यों हो रही है?
स्थानीय निकाय चुनावों के कारण आचार संहिता लगने की संभावना के चलते काम शुरू होने में लगभग दो महीने की देरी हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

भजनलाल सरकार का यह कदम क्षेत्रीय विकास और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल की दिशा में एक अहम शुरुआत है। जब हजारों जर्जर इमारतों को बदलकर नए निर्माण किए जाते हैं, तो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर कम होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर फंड आवंटन के बाद जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अक्सर प्रशासनिक देरी से परियोजनाएं प्रभावित होती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

सहकर्मी की बात को आगे बढ़ाते हुए, जब 3768 जर्जर भवनों और 1293 नए निर्माणों जैसे भारी-भरकम सरकारी फंड के मामलों में प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ जाती है, तब कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से धन के दुरुपयोग को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे विशाल बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतों पर आपराधिक निगरानी और सतर्कता बहुत जरूरी है, ताकि बच्चों की जान जोखिम में न पड़े और न्याय व्यवस्था ऐसे मामलों में जवाबदेही तय कर सके।

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