राज्य में शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामियों को दूर करने और सरकारी विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेशभर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 1200 करोड़ रुपये का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन तमाम शैक्षणिक संस्थानों का कायाकल्प करना है जो काफी समय से जर्जर हालात में चल रहे हैं। इसके जरिए विद्यार्थियों को एक सुरक्षित, आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक माहौल मुहैया कराने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलने के साथ ही वित्तीय संसाधनों का आवंटन भी शुरू कर दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकारी विद्यालयों का भौतिक स्वरूप पूरी तरह से सुधर जाएगा।
नए भवनों का निर्माण और असुरक्षित इमारतों की पहचान
शिक्षा के बुनियादी ढांचे को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने कुल 1293 नए स्कूल भवनों का निर्माण कराने का खाका खींचा है। इस चरणबद्ध योजना के तहत प्रशासनिक स्तर पर 1096.55 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी कर दी गई है। प्रदेशभर में शिक्षा विभाग के सर्वे के मुताबिक वर्तमान समय में कुल 3768 स्कूल भवनों को जर्जर और विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इन पुराने और खतरनाक ढांचों की जगह आधुनिक एवं सुरक्षित इमारतों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके और पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।
समग्र शिक्षा योजना के तहत तय हुआ प्रति स्कूल बजट
सरकारी विद्यालयों की अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से फंड का वितरण समग्र शिक्षा अभियान के प्रावधानों के तहत तय किया गया है। प्राथमिक स्तर के नए स्कूलों के भवनों को तैयार करने के लिए प्रति स्कूल 73 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अलावा मिडिल स्कूलों के बुनियादी ढांचे को उच्च स्तरीय बनाने के लिए प्रत्येक स्कूल के हिसाब से 100.96 लाख रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है। उच्च शिक्षा और बड़े परिसरों की आवश्यकता को देखते हुए सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए प्रति स्कूल 449 लाख रुपये की बड़ी राशि मंजूर की गई है, जिससे वहां अत्याधुनिक कक्षाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
जयपुर और उदयपुर संभाग को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
इस वित्तीय योजना के तहत राज्य के प्रमुख और बड़े जिलों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। राजधानी जयपुर जिले में कुल 143 स्कूलों के कायाकल्प और नए भवनों के निर्माण के लिए 19340.14 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। दूसरी तरफ आदिवासी बहुल और विस्तृत क्षेत्र वाले उदयपुर जिले में 393 स्कूलों की दशा सुधारने के लिए 24733.06 लाख रुपये की भारी राशि स्वीकृत की गई है। इस बड़े आर्थिक निवेश से इन दोनों जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उनके भविष्य निर्माण के लिए एक बेहतर भौतिक वातावरण तैयार होगा।
आचार संहिता के कारण निर्माण कार्यों में दो महीने की देरी
भले ही सरकार की तरफ से वित्तीय मंजूरियां और बजट का आवंटन कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने में थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। राजस्थान में जल्द ही स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, जिसके चलते राज्य में आचार संहिता लागू होने के आसार हैं। इस चुनावी प्रक्रिया के कारण टेंडर जारी करने और जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू होने में लगभग दो महीने का वक्त अतिरिक्त लग सकता है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आचार संहिता समाप्त होते ही इन सभी 1293 चिन्हित स्कूलों में युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे ताकि तय समयसीमा में प्रोजेक्ट पूरे हो सकें।





















