राजस्थान में स्थानीय ग्रामीण निकायों की सरकार चुनने के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश भर में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस बार पूरे प्रदेश में एक साथ व्यवस्था बनाते हुए 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की तर्ज पर मतदान संपन्न कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के तुरंत बाद राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
चार चरणों में संपन्न होगा मतदान
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि मतदान की पूरी प्रक्रिया चार अलग-अलग चरणों में पूरी कराई जाएगी। इस विशाल लोकतांत्रिक कवायद के तहत दिसंबर में 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और पंच पदों के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके साथ ही प्रदेश की 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के सदस्यों को चुनने के लिए भी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
चार करोड़ से अधिक ग्रामीण मतदाता लेंगे हिस्सा
इस बार गांव की सरकार चुनने के लिए मतदाताओं की भागीदारी बेहद व्यापक रहने वाली है। राज्य में कुल 4.03 करोड़ से अधिक पंजीकृत ग्रामीण मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों में निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दो महीने तक प्रभावी रहेगी आचार संहिता
चुनावी कार्यक्रम की घोषणा होते ही ग्रामीण इलाकों में दो महीने के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके प्रभाव से नई विकास योजनाओं की घोषणाओं, शिलान्यास और प्रशासनिक फेरबदल पर रोक रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही प्रत्येक चरण के लिए नामांकन दाखिल करने, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और मतगणना की तारीखों का विस्तृत ब्योरा जारी करेगा।

















