तृणमूल कांग्रेस को अपने चार बैंक खातों पर लगी वित्तीय पाबंदी के मामले में देश की शीर्ष अदालत से फौरी राहत नहीं मिल सकी है। पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से खातों के लेन-देन पर लगाई गई रोक के खिलाफ दाखिल याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने किसी भी तरह का अंतरिम हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। अदालत ने साफ किया कि वह इस समय याचिका के गुण-दोष अथवा कानूनी मेरिट पर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं कर रही है। इसके साथ ही पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह इस मुख्य विवाद से जुड़ी सुनवाई को बिना किसी अनावश्यक देरी के जल्द से जल्द पूरा करे। यह पूरा कानूनी विवाद तृणमूल कांग्रेस के अपने ही एक विधायक विश्वनाथ दास की लिखित शिकायत के बाद सामने आई पुलिस जांच से जुड़ा हुआ है। उसी जांच के सिलसिले में राज्य पुलिस ने पार्टी के इंडियन बैंक स्थित चार खातों को डेबिट-फ्रीज कर दिया था, जिसे संचालित करने की इजाजत मांगते हुए पार्टी ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
पीठ ने अनुच्छेद 136 के तहत दखल देने से किया मना
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति बी. वराले की संयुक्त पीठ के समक्ष हुई। पीठ ने तृणमूल कांग्रेस की अर्जी पर त्वरित राहत प्रदान करने से इंकार करते हुए टिप्पणी की कि जब मुख्य विवाद पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इस स्तर पर दखल देना उचित नहीं होगा। पीठ का रुख स्पष्ट था कि उच्च न्यायालय को ही दोनों पक्षों के विस्तृत तथ्यों और कानूनी बिंदुओं का परीक्षण करना चाहिए। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से इस संवेदनशील मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आग्रह जरूर किया है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि इन चारों महत्वपूर्ण खातों के वित्तीय संचालन को लेकर अंतिम कानूनी फैसला अभी आना बाकी है।
हर महीने 12.15 करोड़ रुपए के सामान्य खर्च की दलील
अदालत की कार्यवाही के दौरान तृणमूल कांग्रेस का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कई अहम दलीलें पेश कीं। उन्होंने पीठ को बताया कि चारों बैंक खातों के डेबिट-फ्रीज हो जाने के कारण पार्टी की दैनिक संगठनात्मक गतिविधियां और नियमित प्रशासनिक काम पूरी तरह बाधित हो रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पार्टी के आंतरिक लेखा रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अदालत के सामने स्पष्ट आंकड़े रखे कि राजनीतिक दल के सुचारु कामकाज को बनाए रखने के लिए हर महीने न्यूनतम 12.15 करोड़ रुपए के वित्तीय संसाधन की अनिवार्य जरूरत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि खातों से धन निकासी पर पूर्ण प्रतिबंध लगे रहने से पार्टी की जमीनी और लोकतांत्रिक राजनीतिक गतिविधियों पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
राज्य सरकार की ओर से एफआईआर और जांच का हवाला
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तृणमूल कांग्रेस की इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने पीठ के समक्ष दलील दी कि पुलिस एक अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट यानी एफआईआर और उसके तहत लगाए गए गंभीर आरोपों की विस्तृत छानबीन कर रही है। राज्य के वकीलों और शिकायतकर्ता पक्ष ने इन खातों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े किए। दोनों पक्षों की ओर से रखी गई लंबी दलीलों को विस्तार से सुनने के पश्चात, पीठ ने साफ कर दिया कि वह इस चरण में आरोपों की तह तक जाने या कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने हस्तक्षेप किए बिना पूरी गेंद फिर से उच्च न्यायालय के पाले में डाल दी है।
विधायक की शिकायत और पुलिस कार्रवाई की पृष्ठभूमि
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 18 जून 2026 को हुई थी, जब तृणमूल कांग्रेस के विधायक विश्वनाथ दास ने बिधाननगर साइबर अपराध पुलिस थाने में जाकर एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। विधायक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि राजनीतिक दल के बैंक खातों के जरिए कथित तौर पर अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन किए जा रहे हैं। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस विभाग ने प्राथमिकी दर्ज की और वित्तीय जांच को आगे बढ़ाते हुए संबंधित खातों के डेबिट पर रोक लगा दी। पुलिस के इस कड़े कदम के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सबसे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी।
एचडीएफसी बैंक के पुराने मामले से बिल्कुल अलग हैं ये खाते
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू यह है कि जिन चार खातों पर अब बहस चल रही है, वे पहले फ्रीज किए गए तीन एचडीएफसी बैंक खातों से पूरी तरह अलग हैं। एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़े पुराने विवाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 9 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस को दैनिक और मासिक खर्चों के प्रबंधन के लिए सीमित संचालन की अनुमति दे दी थी। उच्च न्यायालय ने उस समय वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अधिकारी की निगरानी में लेन-देन की व्यवस्था बनाई थी। इसके बाद 11 अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय द्वारा तय की गई उस अंतरिम व्यवस्था में कोई फेरबदल करने से इनकार कर दिया था।
हरीश मुखर्जी रोड शाखा के खातों पर 27 अगस्त का फैसला
वर्तमान कानूनी विवाद वास्तव में इंडियन बैंक की हरीश मुखर्जी रोड स्थित शाखा में खुले चार खातों पर केंद्रित है। इन खातों को सक्रिय करने और अतिरिक्त अंतरिम राहत पाने के लिए पार्टी ने फिर से उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन 27 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इन खातों के संचालन के लिए कोई भी नई अंतरिम राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। इसी आदेश को तृणमूल कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, जहां अब शीर्ष अदालत ने भी तत्काल प्रभाव से कोई अंतरिम आदेश पारित करने से मना कर दिया है और मुख्य मुकदमे के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए हैं।




















