राजस्थान में नौ नवंबर को मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। इस स्थिति के चलते किसानों के पास रबी फसलों की बुवाई करने और अपने खेतों को तैयार करने का एक सुनहरा अवसर आ गया है। इसके साथ ही, मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए पशुपालकों को अपने मवेशियों की सेहत और सुरक्षा को लेकर खास एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कैसा रहेगा पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान का हाल
मौसम के पूर्वानुमान के मुताबिक नौ नवंबर के दिन पूरे राजस्थान राज्य में मौसम सूखा ही बना रहेगा। पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान दोनों ही हिस्सों में बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं है। इससे पहले छह से 19 नवंबर के बीच जारी किए गए पूर्वानुमान में भी यह बात सामने आई थी कि दोनों ही क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होगी और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक बना रहेगा। इससे पहले दो से पांच नवंबर के दौरान भी दोनों ही संभागों में मौसम पूरी तरह से शुष्क ही बना रहा था। पूर्वी राजस्थान में मौसम के साफ रहने की बात कही गई है और किसी भी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है। ठीक इसी प्रकार पश्चिमी राजस्थान में भी आसमान साफ रहने का अनुमान है और आंधी या बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
प्रमुख शहरों में तापमान और मौसम की स्थिति
राजस्थान के पांच प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और बीकानेर के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में थोड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इन शहरों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा सकता है। इन पांचों बड़े शहरों में भी नौ नवंबर को बारिश की कोई संभावना नहीं है और मौसम के साफ व शुष्क रहने का ही अनुमान है।
किसानों के लिए कृषि से जुड़ी सलाह
मौसम के शुष्क रहने की वजह से किसान भाई रबी फसलों की बुवाई और खेत तैयार करने के अपने जरूरी कामों को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकते हैं। किसानों को विशेष रूप से गेहूं, जौ, सरसों, जीरा, ईसबगोल, मेथी और चने की बुवाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है ताकि पैदावार अच्छी हो सके।
- पर्याप्त नमी: खेत में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में ही बुवाई का काम शुरू किया जाना चाहिए।
- बीज उपचार: बुवाई करने से पहले बीजों का अनुशंसित कवकनाशी, कीटनाशी और जैव उर्वरक से उपचार जरूर कर लें।
- सरसों की बुवाई: सरसों और राया की बुवाई हमेशा पलेवा करने के बाद ही करें और केवल अनुशंसित किस्मों का ही इस्तेमाल करें।
- जौ की फसल: जौ की बुवाई का काम एक से 25 नवंबर के बीच पूरा कर लेने की सलाह दी गई है।
- सब्जी की नर्सरी: फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर और बैंगन की फसल के लिए नर्सरी तैयार करने का यह सही समय है।
- सीधी बुवाई: पालक, धनिया, गाजर, मटर और मूली जैसी सब्जियों की सीधी बुवाई के लिए किसान अपने खेत तैयार रखें।
आगामी दिनों में बारिश की संभावना बेहद कम रहने के अनुमान को देखते हुए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की तैयारी और बुवाई के सभी काम समय पर पूरे कर लें। हालांकि, किसी भी प्रकार की बुवाई का निर्णय लेने से पहले खेत की नमी की स्थिति और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह को जरूर ध्यान में रखें।
पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानियां
बदलते हुए इस मौसम में पशुओं को ठंडी हवाओं और मौसमी बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी हो गया है। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय अपने पशुओं को छप्पर या सुरक्षित शेड के भीतर ही बांधें। पशुओं के रहने की जगह यानी पशुशाला बिल्कुल साफ, सूखी और हवादार होनी चाहिए ताकि बीमारियां न फैलें।
- टीकाकरण समय पर: गलघोंटू और ठप्पा रोग के टीके पशुओं को समय पर लगवाए जाने चाहिए।
- परजीवियों से बचाव: बाहरी परजीवियों से पशुओं की सुरक्षा के लिए साइपरमेथ्रिन का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह और उत्पाद के निर्देशों के मुताबिक ही करें।
- पौष्टिक आहार: दुधारू पशुओं को हमेशा पौष्टिक चारा, खनिज मिश्रण और पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध कराएं।
- संतुलित खुराक: भेड़ और बकरियों को हरे चारे, सूखे चारे और दाने का संतुलित आहार दिया जाना चाहिए।
संक्षेप में कहा जाए तो नौ नवंबर को राजस्थानभर में मौसम साफ और शुष्क ही बना रहेगा। किसान भाई रबी फसलों की बुवाई और खेतों की जुताई-बुवाई पर पूरा ध्यान दें, जबकि पशुपालक ठंड और मौसमी बीमारियों से अपने पशुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें।


















