शाम की कड़क चाय के साथ अगर गरमा-गरम और करारी कचौड़ी मिल जाए, तो नाश्ते की रंगत ही बदल जाती है। आमतौर पर लोग अपने घरों में दाल या आलू की भरावन वाली कचौड़ियां तैयार करते हैं, लेकिन अगर आप कुछ नया और अनोखा स्वाद चखना चाहते हैं, तो सत्तू और प्याज की खस्ता कचौड़ी एक बेहतरीन विकल्प है। भुने चने के सत्तू की सोंधी खुशबू, बारीक कटे प्याज का मिठास भरा स्वाद और खड़े मसालों का चटपटापन मिलकर इस नाश्ते को बेहद खास बना देते हैं। इसमें अमचूर और नींबू की खटास का हल्का सा तड़का और अजवाइन की महक से भरपूर मैदे की परत इसे हर निवाले में बेमिसाल बनाती है। इसे बनाना बेहद आसान है, बस आटा गूंथने का सही तरीका, भरावन का सही नमी संतुलन और तलते समय सही तापमान का ध्यान रखना होता है।
आवश्यक सामग्री और सही मात्रा का माप
एक बढ़िया और खस्ता कचौड़ी बनाने की शुरुआत सामग्री के सटीक नाप से होती है। लगभग छह लोगों के नाश्ते की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, सबसे पहले मैदे का आधार तैयार करने की सामग्री जुटा लें। इसके लिए दो कप मैदा लें। स्वाद को संतुलित करने के लिए इसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। आटे में मनमोहक खुशबू और सुपाच्य गुण जोड़ने के लिए एक छोटा चम्मच अजवाइन आवश्यक है। कचौड़ी को खस्ता बनाने के लिए दो बड़े चम्मच शुद्ध घी लें, जिसका इस्तेमाल मोयन देने में होगा। आटा गूंथने के लिए साफ पानी की जरूरत होगी, जिसे अंदाज से थोड़ा-थोड़ा करके इस्तेमाल करना है। ध्यान रखें कि इस मैदे के नाप से कितनी कचौड़ियां बनेंगी, यह पूरी तरह आपके द्वारा बनाए जाने वाले लोई के आकार पर निर्भर करेगा। यदि आप छोटे आकार की कचौड़ियां बनाएंगे तो संख्या अधिक होगी।
इसके बाद कचौड़ी की मुख्य जान यानी सत्तू की चटपटी भरावन बनाने के लिए मसालों और अन्य सामग्रियों को व्यवस्थित कर लें। भरावन के आधार के रूप में डेढ़ कप भुने चने का सत्तू लें। एक मध्यम आकार का प्याज लें और उसे जितना हो सके बारीक काट लें। स्वाद को तीखा और महकदार बनाने के लिए एक बड़ा चम्मच अदरक और हरी मिर्च का पिसा हुआ पेस्ट तैयार रखें। खड़े मसालों में एक छोटा चम्मच जीरा और एक छोटा चम्मच सौंफ लें, जो सत्तू के साथ बहुत बेहतरीन स्वाद देते हैं। सूखा पिसा मसाला तैयार करने के लिए एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा से लेकर एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर निकाल लें।
खट्टा और चटाकेदार स्वाद लाने के लिए एक छोटा चम्मच अमचूर पाउडर, आधा छोटा चम्मच चाट मसाला और स्वाद के अनुसार नींबू का रस इस्तेमाल करें। पेट के लिए लाभदायक और खुशबू बढ़ाने के लिए एक चुटकी हींग और बारीक कटा हरा धनिया तैयार रखें। स्वाद के अनुसार नमक और मसाले भूनने के लिए एक बड़ा चम्मच घी अलग रख लें। अंत में, कचौड़ियों को तलने के लिए आवश्यकतानुसार रिफाइंड तेल या अपनी पसंद के अन्य कुकिंग ऑयल का इंतजाम करें।
परफेक्ट आटा गूंथने की विधि और मोयन का नियम
कचौड़ी की बाहरी परत कितनी खस्ता और करारी बनेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने आटा किस तरह गूंथा है। एक बड़े और चौड़े बर्तन में दो कप मैदा छानकर निकाल लें। अब इसमें स्वादानुसार नमक और एक छोटा चम्मच अजवाइन डालें। अजवाइन को बर्तन में डालने से पहले अपनी दोनों हथेलियों के बीच रखकर हल्का सा मसल लें। ऐसा करने से अजवाइन का प्राकृतिक तेल और उसकी बेहतरीन खुशबू मैदे में अच्छी तरह समा जाती है।
अब इस सूखे मिश्रण में दो बड़े चम्मच शुद्ध घी डालें। अपनी उंगलियों की मदद से घी को मैदे के एक-एक कण में अच्छी तरह मिलाएं। इस प्रक्रिया को मोयन देना कहते हैं। घी और मैदे को तब तक आपस में रगड़ें जब तक कि मैदा ब्रेड के चूरे जैसा न दिखने लगे। जब आप मैदे को मुट्ठी में बांधें और वह आसानी से एक पिंड का रूप ले ले, तो समझें कि मोयन की मात्रा और मिलावट बिल्कुल सही हुई है। यह मोयन ही कचौड़ी की बाहरी परत को तलते समय सख्त होने के बजाय एकदम खस्ता और कुरकुरा बनाता है।
इसके बाद, आटे में थोड़ा-थोड़ा करके साधारण पानी मिलाएं और आटा गूंथना शुरू करें। याद रखें कि पानी एक साथ बहुत ज्यादा न डालें, वरना आटा गीला हो सकता है। कचौड़ी के लिए गूंथा जाने वाला आटा न तो बहुत ज्यादा सख्त होना चाहिए और न ही रोटी के आटे जैसा ज्यादा नरम। यह एक चिकना और मध्यम आटा होना चाहिए जो हाथों पर बिल्कुल न चिपके। आटा गूंथ लेने के बाद, इसे एक साफ और हल्के नम कपड़े से ढककर रख दें। ध्यान रखें कि कपड़े को निचोड़कर उसका अतिरिक्त पानी निकाल लें ताकि वह टपके नहीं।
गूंथे आटे को लगभग 20 मिनट के लिए आराम करने दें। यदि आटे को ढका न जाए और खुला छोड़ दिया जाए, तो हवा के संपर्क में आकर उसकी ऊपरी सतह सूख सकती है। सतह सूखने से जब आप बाद में इसमें सत्तू की भरावन भरकर बंद करेंगे, तो आटे में दरारें पड़ जाएंगी और तलते समय कचौड़ी फटने लगेगी। जब तक आटा आराम कर रहा है, तब तक आप भरावन तैयार कर सकते हैं। इससे समय की बचत भी होगी। 20 मिनट पूरे होने के बाद, कचौड़ी बनाने से ठीक पहले आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से थोड़ा सा मसलकर चिकना कर लें।
सत्तू और प्याज की चटपटी भरावन बनाने का तरीका
सत्तू की भरावन तैयार करने के लिए सबसे पहले एक पैन या कड़ाही लें और उसमें एक बड़ा चम्मच घी डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। जब घी हल्का गर्म हो जाए, तो इसमें एक छोटा चम्मच जीरा और एक छोटा चम्मच सौंफ डालें। सौंफ और जीरे के चटकने और सोंधी खुशबू आने के तुरंत बाद इसमें एक चुटकी हींग और बारीक कटा हुआ मध्यम प्याज डाल दें। प्याज को धीमी से मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक वह हल्का गुलाबी और नरम न हो जाए। प्याज को बहुत ज्यादा गहरा भूरा या डार्क नहीं करना है, बस उसका कच्चापन दूर होना चाहिए।
इसके बाद पैन में एक बड़ा चम्मच अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट मिलाएं और इसे कुछ सेकंड तक भूनें ताकि अदरक की सोंधी महक आने लगे। अब गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें। धीमी आंच पर पैन में आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा से एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर डालें। इन सूखे मसालों को लगातार चलाते हुए भूनें। आंच धीमी रखना और लगातार चलाना इसलिए जरूरी है ताकि मसाले जल न जाएं, क्योंकि जले हुए मसालों से भरावन का स्वाद कड़वा हो सकता है।
मसालों के भुन जाने पर पैन में डेढ़ कप भुना हुआ चने का सत्तू डालें। सत्तू चूंकि पहले से ही भुने हुए चनों को पीसकर बनाया जाता है, इसलिए इसे बहुत ज्यादा समय तक पकाने या भूनने की आवश्यकता नहीं होती। बस धीमी आंच पर सत्तू को भूनते हुए प्याज और मसालों के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि सारा मसाला सत्तू में समान रूप से समा जाए। इसके बाद इसमें एक छोटा चम्मच अमचूर पाउडर, आधा छोटा चम्मच चाट मसाला और स्वादानुसार नमक मिलाएं। ध्यान रखें कि चाट मसाले में पहले से नमक मौजूद होता है, इसलिए साधारण नमक की मात्रा संभलकर ही डालें।
सभी चीजें मिल जाने के बाद गैस बंद कर दें। पैन में बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालें और थोड़ा सा नींबू का रस मिलाएं। चम्मच से मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर चखें। यदि आपको खटास कम लगे, तभी नींबू का रस या अमचूर थोड़ा और बढ़ाएं। अब भरावन की नमी की जांच करना बहुत आवश्यक है। चम्मच से सत्तू के मिश्रण को थोड़ा सा दबाकर देखें। यदि दबाने पर मिश्रण हल्का सा बंध रहा है, तो भरावन तैयार है। लेकिन अगर सत्तू पूरी तरह सूखा और बिखरने वाला लग रहा हो, तो उस पर एक या दो छोटे चम्मच पानी का छिड़काव करें और अच्छी तरह मिला लें। ध्यान रखें कि पानी बहुत ज्यादा न डालें; यदि भरावन ज्यादा गीली हो गई तो कचौड़ी में भरते समय लोई नरम होकर फट सकती है। तैयार भरावन को एक फैली हुई प्लेट में निकाल लें और पूरी तरह से ठंडा होने दें। गर्म भरावन को आटे में भरने से लोई भाप की वजह से गलकर फट जाती है।
लोई में भरावन भरने और बेलने का सही तरीका
जब सत्तू का मसाला पूरी तरह से ठंडा हो जाए और आटा भी 20 मिनट के आराम के बाद तैयार हो, तब कचौड़ियां बनाने की प्रक्रिया शुरू करें। सबसे पहले गूंथे हुए मैदे को बराबर आकार की छोटी-छोटी लोइयों या पेड़ों में बांट लें। एक लोई उठाएं और उसे अपनी हथेलियों के बीच घुमाकर गोल कर लें। अब अपनी उंगलियों और अंगूठे की मदद से लोई के किनारों को दबाते हुए उसे कटोरी या कटोरीनुमा गड्ढे का आकार दें। ऐसा करते समय हमेशा ध्यान रखें कि लोई का बीच का हिस्सा थोड़ा मोटा रहना चाहिए और केवल किनारों को ही पतला किया जाना चाहिए। यदि बीच का हिस्सा पतला हो जाएगा, तो भरावन नीचे से निकल सकती है।
अब इस कटोरीनुमा लोई के बीच में अपनी पसंद और लोई के आकार के अनुसार तैयार सत्तू की भरावन रखें। शुरुआत में बहुत ज्यादा भरावन भरने की कोशिश न करें, ताकि किनारों को आसानी से सील किया जा सके। इसके बाद चारों तरफ से मैदे के किनारों को ऊपर की ओर लाते हुए आपस में जोड़ें और एक पोटली जैसा आकार बना लें। ऊपर इकट्ठा हुए अतिरिक्त आटे को आपस में अच्छी तरह घुमाकर दबा दें, ताकि कोई भी खुला हिस्सा या सुराख न रहे। कचौड़ी का बंद होना बहुत मजबूत होना चाहिए ताकि तलते समय तेल अंदर न घुसे।
अब भरी हुई लोई को अपनी दोनों हथेलियों के बीच रखें और हल्के हाथ से दबाते हुए चपटा करें। अगर आप बेलन का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो बहुत ही हल्के हाथों से लोई को बेलें। ज्यादा दबाव देने या कचौड़ी को बहुत ज्यादा पतला बेलने से अंदर की सत्तू की भरावन बाहर निकल सकती है। कोशिश करें कि सभी कचौड़ियों का आकार और मोटाई एक जैसी ही रहे, ताकि जब वे कड़ाही में जाएं तो एक समान समय में पके। तैयार की गई कच्ची कचौड़ियों को एक साफ कपड़े से ढककर रखते जाएं। यदि किसी कचौड़ी की सतह पर छोटी-मोटी दरार दिखाई दे, तो थोड़ा सा सूखा आटा या मैदे का घोल लगाकर उसे तुरंत बंद कर दें।
धीमी आंच पर तलने का नियम और परोसने के टिप्स
कचौड़ी को एकदम खस्ता और कुरकुरा बनाने की असली परीक्षा उसे तलने की प्रक्रिया में होती है। एक कड़ाही में कचौड़ी डूबने लायक रिफाइंड तेल डालें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा तेज गर्म नहीं होना चाहिए। तेल के सही तापमान की जांच करने के लिए आटे की एक छोटी सी गोली तेल में डालकर देखें; यदि वह तुरंत तैरकर ऊपर आने के बजाय धीरे-धीरे उठती है, तो समझें कि तेल का तापमान सही है।
अब कड़ाही के आकार के अनुसार एक-एक करके सावधान पूर्वक कचौड़ियां तेल में डालें। एक साथ बहुत ज्यादा कचौड़ियां न भरें, ताकि कड़ाही का तापमान अचानक कम न हो और कचौड़ियों को फूलने की पूरी जगह मिले। कचौड़ियों को तेल में डालते ही तुरंत करछुल या झारे से न पलटें। शुरुआत में उन्हें धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक वैसे ही रहने दें ताकि उनकी निचली परत थोड़ी सख्त और सिक जाए। जब नीचे की सतह सिकने लगे, तो कचौड़ियां खुद-ब-खुद तेल के ऊपर तैरने लगेंगी।
इसके बाद झारे की मदद से कचौड़ियों को बहुत धीरे से पलट दें। अब आंच को धीमा से मध्यम रखें और कचौड़ियों को उलट-पुलट करते हुए दोनों तरफ से सुनहरा और खस्ता होने तक तलें। यदि आप तेज आंच पर कचौड़ी तलेंगे, तो बाहर की परत तो तुरंत भूरी हो जाएगी, लेकिन अंदर का मैदा कच्चा रह जाएगा और कचौड़ी थोड़ी देर बाद नरम पड़ जाएगी। धीमी आंच पर तलने से मैदा भीतर तक पकता है और कचौड़ी लंबे समय तक करारी बनी रहती है।
जब कचौड़ियां दोनों तरफ से सुंदर सुनहरी और फुली-फुली दिखने लगें, तो उन्हें झारे की मदद से कड़ाही से निकाल लें। निकालते समय झारे को कड़ाही के किनारे पर कुछ सेकंड रोकें ताकि अतिरिक्त तेल वापस कड़ाही में गिर जाए। तली हुई गरम-गरम कचौड़ियों को किचन पेपर या टिशू पेपर पर रखें। इन खस्ता सत्तू कचौड़ियों का असली मज़ा तीखी हरी धनिया-पुदीने की चटनी और खट्टी-मीठी इमली की चटनी के साथ आता है। शाम की चाय के साथ इन्हें गर्मागर्म परोसें और अपने परिवार तथा मेहमानों के साथ इस स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लें।



















