राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना इलाके में सिंचाई के लिए आठ बारी पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। इसी सिलसिले में किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के सूरतगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपना विरोध जताने की खास योजना बनाई थी। इस रणनीति के तहत विधायक शिमला नायक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता सूरतगढ़ के लिए गाड़ियों से रवाना हुए थे। लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इस बात की भनक पहले ही लग चुकी थी, जिसके चलते उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। अनूपगढ़ और सूरतगढ़ मार्ग पर स्थित घग्घर पुल के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया और नाकाबंदी कर रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया। पुल के दोनों किनारों पर मजबूत बैरिकेड लगाए गए ताकि किसी भी वाहन या प्रदर्शनकारी को आगे न जाने दिया जाए और आने-जाने वाले हर शख्स पर कड़ी नजर रखी जा सके।
जब विधायक शिमला नायक के साथ किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पूरा जत्था घग्घर पुल पर पहुंचा, तो वहां पहले से तैनात पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से साफ रोक दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस और बातचीत का दौर चला, जो धीरे-धीरे तनाव में बदल गया। माहौल उस वक्त बेहद गरमा गया जब कुछ बेकाबू प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इस खींचतान के दौरान पुलिसकर्मियों, किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई, जिससे वहां अफरातफरी मच गई। हालांकि पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए स्थिति पर काबू पा लिया और सभी को आगे बढ़ने से सख्ती से रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए विधायक शिमला नायक समेत तमाम प्रमुख कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारी किसानों को हिरासत में ले लिया। सभी डिटेन किए गए लोगों को बसों में भरकर जाट धर्मशाला ले जाया गया, जहां उन्हें सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच रखा गया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान जाट धर्मशाला के आसपास भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है, और डीएसपी जयप्रकाश बेनीवाल सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर कैंप किए हुए हैं।
प्रशासनिक अमला और अधिकारी मौके पर मुस्तैद
इस बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन और तनाव को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भी लगातार मौके पर डटे हुए हैं। तहसीलदार राजवीर कड़वासरा, एसडीएम कौशल्या बिश्नोई और एडीएम अशोक सांगवा समेत कई प्रशासनिक अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और स्थिति की पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। इलाके में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं। आंदोलनकारी किसानों का मुख्य और एकमात्र मुद्दा यह है कि उन्हें सिंचाई के लिए आठ बारी पानी मुहैया कराया जाए। इसी एक सूत्रीय मांग को मनवाने के लिए क्षेत्र के किसान पिछले अट्ठारह दिनों से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट कर रहे हैं। किसानों का सीधा आरोप है कि इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार या प्रशासन की तरफ से उनकी इस गंभीर समस्या का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया है। इसी उदासीनता से क्षुब्ध होकर किसानों ने मुख्यमंत्री के सूरतगढ़ दौरे के दौरान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर अपना तीखा विरोध दर्ज कराने का यह कड़ा फैसला लिया था।
जाट धर्मशाला में रखे गए सभी हिरासत में लिए गए लोग
धरना दे रहे किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साफ कहना था कि वे किसी भी तरह का उपद्रव नहीं करना चाहते थे, बल्कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी इस गंभीर समस्या को सीधे रखना चाहते थे। उनकी योजना विरोध जताने के लिए मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाने की भी थी, ताकि शासन का ध्यान उनकी टूटी उम्मीदों और पानी के संकट पर जा सके। हालांकि, उनके सूरतगढ़ पहुंचने से पहले ही पुलिस के कड़े सुरक्षा चक्र और घग्घर पुल की नाकाबंदी ने उनकी इस योजना पर पानी फेर दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस आमने-सामने की झड़प के बाद अनूपगढ़-सूरतगढ़ राजमार्ग पर काफी देर तक गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा। सुरक्षा बलों ने बैरिकेड्स की दीवार खड़ी करके भीड़ को आगे बढ़ने से रोका और हालात को बिगड़ने से बचाया। फिलहाल पुलिस ने एहतियात के तौर पर विधायक शिमला नायक समेत सभी हिरासत में लिए गए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और किसानों को जाट धर्मशाला के परिसर में रोक रखा है। पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के आला अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं और क्षेत्र में अमन-चैन तथा कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए लगातार हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।


















