राजस्थान उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए ने राजधानी के सबसे व्यस्त मार्गों में शुमार गुर्जर की थड़ी से सोडाला तक सड़क सीमा के दायरे में आने वाले अवैध और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। रविवार की सुबह भारी पुलिस बल के साथ जेडीए का प्रवर्तन दस्ता एक्शन मोड में नजर आया। मौके पर पहुंचते ही अमले ने डिमार्केशन यानी सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी और साथ ही प्रभावित मकान मालिकों व दुकानदारों को बेदखली और तोड़फोड़ के आधिकारिक नोटिस थमाने शुरू कर दिए। इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई से इलाके के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी खलबली मच गई और उनका गुस्सा फूट पड़ा।
व्यापारियों का फूटा गुस्सा और सड़क जाम
जेडीए से नोटिस मिलते ही आक्रोशित व्यापारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने इस पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए और डिमार्केशन में खुले तौर पर पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया। व्यापारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के इस अभियान में नियमों को ताक पर रखकर एक तरफ से भारी मात्रा में जमीन और निर्माण छीना जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ के लोगों को अनुचित रूप से राहत दी जा रही है। बढ़ते आक्रोश के बीच स्थानीय लोगों ने मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
विधायक गोपाल शर्मा को करना पड़ा विरोध का सामना
विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की सूचना मिलते ही सिविल लाइन्स विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोपाल शर्मा स्थिति का जायजा लेने तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद उग्र व्यापारियों और स्थानीय निवासियों से संवाद स्थापित कर मामले को शांत कराने और समझाइश करने का पूरा प्रयास किया। हालांकि, अपनी आजीविका का साधन यानी दुकानें और सिर से छत यानी मकान छिन जाने के डर से डरे और गुस्से में तपे लोगों ने विधायक की एक बात नहीं सुनी। स्थिति इसके विपरीत हो गई और लोगों ने उनके खिलाफ ही अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त करना शुरू कर दिया। व्यापारियों के कड़े रुख और बढ़ते दबाव के आगे बेबस होकर विधायक गोपाल शर्मा को बिना किसी ठोस समाधान के ही मौके से बैरंग वापस लौटना पड़ा।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास की एंट्री और पुनर्वास की मांग
मौके से विधायक गोपाल शर्मा के लौटने के कुछ देर बाद, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सिविल लाइन्स क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास प्रभावित स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचकर सीधे पीड़ित व्यापारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं तथा दर्द को ध्यान से सुना। प्रताप सिंह खाचरियावास ने जेडीए की इस पूरी कार्रवाई को सरासर अन्यायपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व पुनर्वास योजना के इस तरह रातों-रात लोगों के व्यापार और आजीविका के साधनों को नेस्तनाबूद करना पूरी तरह से अनुचित है।
पूर्व सरकार के उदाहरण देकर प्रशासन को घेरा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने अपनी पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के समय जब भी विकास कार्यों के लिए किसी निर्माण को हटाया जाता था, तो सरकार हमेशा प्रभावित व्यापारियों को उचित मुआवजा और सहायता देती थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे जयपुर मेट्रो के निर्माण के दौरान दुकानें हटानी पड़ी हों या फिर झोटवाड़ा में एलिवेटेड रोड और सड़क चौड़ीकरण का कार्य रहा हो, उनकी सरकार ने हमेशा प्रभावितों को राहत पहुंचाने और उनके पुनर्वास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। खाचरियावास ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई को आगे बढ़ाने से पहले व्यापारियों के पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और ठोस योजना तैयार की जानी चाहिए।


















