राजस्थान के कई जिलों में रविवार को मौसम का मिजाज अचानक बदल गया, जिसके चलते आम जनजीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिला। बीकानेर और दौसा जिलों में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हुई और कई क्षेत्रों में ओले भी गिरे। इस अप्रत्याशित बदलाव से जहां एक तरफ गर्मी और उमस भरे माहौल से लोगों को कुछ राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं क्योंकि उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आया। मौसम विभाग के इस अचानक आए बदलाव ने ग्रामीण इलाकों में खलबली मचा दी है।
बीकानेर में ओलावृष्टि और तापमान में गिरावट
बीकानेर जिले में शाम ढलते ही मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई और तापमान में खासी गिरावट दर्ज की गई। जिले के नापासर, कल्याणसर और देवसर जैसे ग्रामीण इलाकों में ओलावृष्टि होने से स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस अचानक हुई प्राकृतिक मार से आम नागरिकों को गर्मी से तो निजात मिल गई, लेकिन किसानों की नींद उड़ गई क्योंकि खेतों में तैयार खड़ी फसलें इस बेमौसम आफत की चपेट में आ गईं।
दौसा में अंधड़ के साथ भारी मूसलाधार बारिश
बीकानेर के अलावा दौसा जिले में भी मौसम ने ऐसा ही खतरनाक रुख अपनाया जहाँ तेज अंधड़ के साथ मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई। दौसा के कुंडल और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में जमकर ओले गिरे, जिससे किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गईं। तेज हवाओं और पानी के थपेड़ों के साथ गिरे ओलों के कारण कई जगहों पर खेतों में पककर तैयार खड़ी फसलें जमीन पर आड़ी गिर गईं। अन्नदाताओं का कहना है कि उन्होंने अपनी फसल को तैयार करने के लिए लंबे समय तक कड़ी मेहनत की थी, लेकिन इस अचानक आई बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
खुले में पड़ी बाजरे की बालियां भीगीं
ग्रामीण क्षेत्रों में नुकसान का दायरा केवल खड़ी फसलों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि उन खेतों में भी भारी तबाही हुई जहाँ फसल की कटाई का काम पूरा हो चुका था। कटाई के बाद खेतों में खुले आसमान के नीचे पड़ी बाजरे की बालियां इस मूसलाधार बारिश में पूरी तरह भीग गईं, जिससे उनकी गुणवत्ता खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा जिन खेतों में फसल अभी काटी नहीं गई थी और वह पूरी तरह तैयार थी, वह तेज हवा और बारिश के दबाव को झेल नहीं पाई और जमीन पर बिछ गई। किसानों का कहना है कि इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि के कारण विभिन्न प्रकार की फसलों को भारी क्षति पहुंची है, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन से सर्वे कराने की उठी मांग
दौसा और बांदीकुई के ग्रामीण अंचलों से भारी बारिश और ओलावृष्टि की लगातार खबरें सामने आ रही हैं। प्रभावित इलाकों में गुढलिया, कोलवा, अरनिया, कुंडल, जामा, भेडोली, भोजवाड़ा, धनावड़, देलाड़ी, खोर्रा और कालोता जैसे दर्जनों गांव शामिल हैं जहाँ किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इन इलाकों के अन्नदाताओं ने अब स्थानीय प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सर्वे करवाया जाए ताकि हुए नुकसान का सटीक आकलन हो सके। मौसम के इस इस कड़े रुख ने एक बार फिर किसानों की वित्तीय सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।





















