राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप पकड़ने में सफलता हासिल की है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में स्थित गांव 5 सी बड़ी सुजावलपुर के एक खेत से हेरोइन के दो पैकेट बरामद किए गए हैं। सीमावर्ती खेतों में फसलों के बीच नशीले पदार्थों का इस तरह मिलना स्थानीय सुरक्षा तंत्र के लिए गहरी चिंता का सबब बन चुका है, हालांकि समय रहते की गई इस छापेमारी से तस्करों की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई।
गुप्त सूचना के आधार पर चलाया गया सघन सर्च ऑपरेशन
हिंदूमलकोट थाना पुलिस को सीमावर्ती क्षेत्र में नशीले पदार्थों की खेप छिपाए जाने को लेकर पुख्ता गोपनीय इनपुट मिला था। सूचना पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस दल तुरंत हरकत में आया और गांव 5 सी बड़ी सुजावलपुर में स्थित संबंधित खेत की घेराबंदी कर ली गई। इलाके में चले सघन तलाशी अभियान के दौरान खेत की मिट्टी और फसलों के बीच छिपाकर रखे गए दो संदिग्ध पैकेट पुलिस के हाथ लगे।
पुलिस अधिकारियों की निगरानी में जब इन दोनों पैकेटों को खोलकर वजन कराया गया, तब इनमें कुल 1 किलो 530 ग्राम अवैध हेरोइन पाई गई। नशीले पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय बाजार के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार इस बरामद खेप का अनुमानित मूल्य लगभग 7 करोड़ 50 लाख रुपये आंका जा रहा है। बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस ने संपूर्ण माल को नियमानुसार जब्त कर लिया और विधिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया।
रात के अंधेरे में पाकिस्तानी ड्रोन से गिराए जाने की आशंका
जांच में जुटी एजेंसियों और पुलिस अधिकारियों के प्राथमिक आकलन के अनुसार, यह खेप सीमा पार बैठे पाकिस्तानी तस्करों द्वारा भेजी गई थी। सीमा पर जमीनी तारबंदी और कड़ी निगरानी के कारण तस्कर अब सीधे घुसपैठ की जगह आधुनिक ड्रोन तकनीक पर निर्भर हो चुके हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर पाकिस्तान की सीमा से मानव रहित ड्रोन भारतीय क्षेत्र में उड़ाए जाते हैं और पूर्व निर्धारित खेतों या सुनसान जगहों पर पैकेट गिराकर वापस लौट जाते हैं।
जांचकर्ताओं को पक्का संदेह है कि साढ़े सात करोड़ रुपये की यह हेरोइन भी इसी ड्रोन तकनीक के जरिए खेत में गिराई गई थी, जिसे बाद में स्थानीय कूरियर या खरीदार द्वारा उठाया जाना था। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में अज्ञात तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिक प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इसके साथ ही इलाके में व्यापक तलाशी अभियान जारी है ताकि खेप उठाने की फिराक में लगे स्थानीय संपर्कों को दबोचा जा सके।
सीमावर्ती इलाकों में पैर पसारता तस्करी का नेटवर्क
राजस्थान में श्रीगंगानगर के अलावा बीकानेर और बाड़मेर जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे जिले हाल के समय में सीमा पार नशीले पदार्थों की आवाजाही के बड़े केंद्र के रूप में देखे जा रहे हैं। सीमा के दोनों तरफ सक्रिय आपराधिक तत्वों की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार अरबों रुपये तक पहुंच रहा है। सुदूर सीमावर्ती खेत और खलिहान तस्करों के लिए सामान छिपाने के मुफीद ठिकाने बन रहे हैं।
सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ और राज्य पुलिस लगातार संयुक्त गश्त कर रही हैं, लेकिन कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन सुरक्षा बलों के सामने निरंतर नई निगरानी चुनौतियां पेश कर रहे हैं। इस ताजा मामले में भी पुलिस आसपास के रास्तों के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है और सीमावर्ती इलाके के संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखकर पूछताछ कर रही है।
विशेष जांच टीम का गठन और सुरक्षा चौकसी में इजाफा
इतनी बड़ी कीमत की हेरोइन हाथ लगने के बाद सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा का पहरा और कड़ा कर दिया गया है। सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर रात के समय संयुक्त नाकाबंदी और गश्त बढ़ा दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक तथा उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है।
इस विशेष जांच दल का मुख्य कार्य उस जमीनी नेटवर्क और स्थानीय मददगारों की पहचान करना है, जो सीमा पार बैठे सिंडिकेट से संपर्क साधकर इन ड्रॉप्स को ठिकाने लगाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को नशे के जाल में धकेलने वाले इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां तोड़ने के लिए हर संभव कानूनी और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

















