रांची के मौसम में बदलाव का दौर साफ देखा जा सकता है, जहां पिछले कुछ दिनों से बरस रहे मानसून के तेवर अब धीरे-धीरे ढीले पड़ने लगे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों और पूर्वानुमान के अनुसार राज्यभर में बारिश की गतिविधियों में कमी दर्ज की जा रही है। पिछले दिनों जहां लगातार बादल छाए हुए थे और झमाझम पानी बरस रहा था, वहीं अब स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ रही है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बादलों की आवाजाही पूरी तरह थम गई है, बल्कि कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की फुहारें और छिटपुट बारिश अभी भी राहत दे सकती है।
आज के दिन इन जिलों में बरस सकते हैं बादल
आज गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची और पश्चिमी सिंहभूम जैसे क्षेत्रों में आंधी-तूफान के साथ पानी गिरने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, साहिबगंज, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पलामू के आसमान में भी आंशिक से लेकर सामान्य रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इन तमाम जगहों पर कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इन इलाकों में बारिश का कोई बड़ा खतरा या गंभीर स्थिति बनने की आशंका नहीं है, क्योंकि पूरे प्रदेश के लिए फिलहाल किसी तरह का गंभीर अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
तापमान और राजधानी रांची का हाल
राजधानी रांची की बात करें तो यहां आज न्यूनतम तापमान करीब इक्कीस डिग्री और अधिकतम तापमान उनतीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। रांची में आज किसी विशेष आंधी या वज्रपात की चेतावनी नहीं दी गई है, जिससे आम जनजीवन सामान्य रहने की उम्मीद है। हालांकि आने वाले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान बढ़कर तीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे दिन के समय हल्की गर्मी का अहसास फिर से बढ़ सकता है।
बीते दिनों कैसा रहा था बारिश का माहौल
महज एक-दो दिन पहले की बात करें तो सत्ताइस सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में बादलों की सक्रियता के साथ तेज गरज और चमक दर्ज की गई थी। मध्य और दक्षिणी झारखंड के जिलों में बरसात का दौर बना रहा था। वहीं छब्बीस सितंबर को तो रांची में महज चौबीस घंटे के भीतर उनसठ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जो पिछले दौर की भारी मानसूनी सक्रियता की गवाही देती है। उस समय की तुलना में वर्तमान स्थिति काफी हद तक शांत और नियंत्रित नजर आ रही है।
आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज
सत्ताइस सितंबर को गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी के बाद अट्ठाइस सितंबर से दो अक्टूबर तक मौसम विभाग की ओर से कोई भी चेतावनी जारी नहीं की गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य में अब बड़े पैमाने पर मानसूनी आपदा या खतरे की कोई बात नहीं है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर बादलों के बनने और बिगड़ने से हल्की बारिश का क्रम जारी रह सकता है। खासकर खूंटी, लोहरदगा, रामगढ़ और हजारीबाग जैसे अपेक्षाकृत ऊंचे इलाकों में बादलों और हल्की फुहारों की वजह से मौसम काफी सुहावना और आरामदायक बना रहेगा।
मानसून की वापसी और आगे की स्थिति
सितंबर महीने के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते-पहुंचते मानसून की विदाई की आहट सुनाई देने लगी है और इसकी रफ्तार में खासी सुस्ती आ गई है। हालांकि मानसूनी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त नहीं कहा जा सकता, क्योंकि छिटपुट स्थानीय बारिश अक्टूबर की शुरुआत तक भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहेगी। महीने के अंतिम दिनों में असर भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन अक्टूबर के शुरुआती दौर में मौसम के धीरे-धीरे सामान्य और गर्म होने की पूरी संभावना है।



















