राजस्थान के सीकर जिले में प्याज उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने और फसल बर्बादी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल के तहत लक्ष्मणगढ़ तहसील स्थित यालसर गांव में एक आधुनिक प्याज प्रोसेसिंग इकाई लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 25 लाख रुपए के कुल बजट से तैयार होने वाली इस परियोजना को आधिकारिक प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। अधिकारियों ने चालू वर्ष में दिसंबर तक इस इकाई में व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू कराने की समयसीमा तय की है।
सीकर और अलवर में ओडीओपी पहल का विस्तार
राज्य सरकार की रणनीति के तहत केवल सीकर ही नहीं, बल्कि अलवर जिले में भी 25 लाख रुपए की लागत से बिल्कुल इसी तर्ज पर प्याज प्रोसेसिंग इकाई स्थापित की जा रही है। इन दोनों प्रमुख जिलों में उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से यह ढांचा तैयार किया जा रहा है। सीकर के यालसर गांव में बनने वाली इकाई का पूरा प्रबंधन और संचालन राजीविका से जुड़े नई उमंग सीएलएफ, डूढवा के हाथों में सौंपा जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को सीधे औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ने का मौका मिलेगा।
अनियन पाउडर और फ्लेक्स तैयार करने की तकनीक
इस नई प्रोसेसिंग यूनिट में खेतों से आने वाले ताजे प्याज को प्रोसेस करके दो मुख्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिनमें अनियन पाउडर और अनियन फ्लेक्स शामिल हैं। अनियन फ्लेक्स असल में वैज्ञानिक तरीके से सुखाए गए प्याज के टुकड़े होते हैं, जिनकी मांग रेडी-टू-ईट फूड, मसालों और होटल इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर रहती है। अक्सर मंडियों में थोक भाव गिरने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि कच्चा प्याज जल्दी सड़ने लगता है। जब कच्ची फसल को डिहाइड्रेट करके पाउडर या फ्लेक्स में बदल दिया जाएगा, तो उसकी शेल्फ लाइफ कई महीनों तक बढ़ जाएगी और किसान उपज को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर नहीं होंगे।
500 महिला किसानों को प्रशिक्षण और बिचौलियों पर रोक
परियोजना के पहले चरण में लक्ष्मणगढ़ इलाके के पांच प्रमुख गांवों को शामिल किया गया है। इनमें यालसर, चूड़ीमियां, बिड़ोदी बड़ी, बीदासर और पालड़ी गांव शामिल हैं, जहां की कुल 500 महिला किसानों का चयन किया गया है। योजना के अनुसार, अक्टूबर के पहले हफ्ते से इन महिलाओं को आधुनिक खेती, कंदों की छंटाई यानी ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग मशीनरी के संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय किसानों के खेतों से सीधे प्याज की खरीद की जाएगी। इस सीधी खरीद व्यवस्था से बाजार में सक्रिय बिचौलियों और आढ़तियों की भूमिका घटेगी, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य सीधे बैंक खाते में मिल सकेगा।
प्रतिदिन 300 किलो प्रोसेसिंग क्षमता और भावी योजनाएं
शुरुआती चरण में यालसर की इस इकाई में रोजाना 3 क्विंटल यानी 300 किलोग्राम कच्चा प्याज प्रोसेस करने की क्षमता तय की गई है। राजीविका ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। इकाई में सबसे पहले किसानों से खरीदे गए माल की गुणवत्ता जांच और ग्रेडिंग होगी, जिसके बाद आधुनिक मशीनों से कटिंग, ड्राइंग और प्रोसेसिंग कर आकर्षक पैकेजिंग की जाएगी। यदि यह पायलट मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में दैनिक क्षमता का विस्तार किया जाएगा और प्रदेश के अन्य प्याज उत्पादक क्षेत्रों में भी ऐसी ही इकाइयां लगाई जाएंगी।
पैकेजिंग, ब्रांडिंग और राष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति
तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और कमर्शियल मार्केटिंग का पूरा जिम्मा राजीविका का संस्थान संभालेगा। इन उत्पादों को राजस्थान के स्थानीय बाजारों के अलावा देश के अन्य राज्यों और बड़े व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खेत से निकली फसल केवल मंडी के आढ़त तक सीमित न रहे, बल्कि आधुनिक खुदरा बाजार में प्रीमियम पैकेज्ड उत्पाद के तौर पर अपनी जगह बनाए।
सीकर जिले में प्याज उत्पादन का दायरा
सीकर जिला राजस्थान में प्याज की खेती का एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। जिले में लगभग 25 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर प्याज बोया जाता है, जहां सालाना कुल उत्पादन करीब 6.75 लाख टन तक पहुंचता है। जिले भर के लगभग 30 हजार किसान सीधे तौर पर इस फसल की खेती पर निर्भर हैं। वर्तमान में सीकर और रसीदपुरा कृषि उपज मंडी इन किसानों के लिए खरीद-बिक्री के दो प्रमुख केंद्र हैं। राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक संदीप पूनिया ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट को सभी जरूरी अंतिम मंजूरियां मिल चुकी हैं और दिसंबर तक प्लांट में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य पूरी तरह पटरी पर है।





















