झारखंड के पलामू जिले के खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। आम तौर पर विकास की दौड़ में पिछड़े माने जाने वाले इस इलाके के आठ कराटे प्रतिभागी अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे हैं। जिला मुख्यालय के पांकी रोड स्थित द कराटे एकेडमी के इन आठ खिलाड़ियों ने राज्य स्तरीय स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसी बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उनका चयन आगामी राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए हुआ है, जहां वे अपने खेल का लोहा मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक के दम पर राष्ट्रीय टीम में चयन
अकादमी से जुड़े इन चयनित प्रतिभागियों ने लगभग एक महीने पहले आयोजित हुई राज्य स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में अपनी चुनौती पेश की थी। वहां अपने दमदार दांव-पेंच के बल पर इन खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक हासिल किए। राज्य स्तर पर मिली इस स्वर्णिम सफलता के आधार पर ही इन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता का टिकट हासिल हुआ है। इस राष्ट्रीय आयोजन में अंडर-19, अंडर-25 और अंडर-30 आयु वर्ग के मुकाबले खेले जाएंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने जा रहे खिलाड़ियों ने अभ्यास सत्र पूरे कर लिए हैं और उनका स्पष्ट लक्ष्य राष्ट्रीय पटल पर भी गोल्ड मेडल जीतकर अपने गृह जिले का परचम लहराना है। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता कश्मीर स्थित शेरे कश्मीर इंडोर स्टेडियम में 29 सितंबर, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित होने वाली है।
शिक्षा के साथ खेल के मैदान में साध रहे संतुलन
चयनित खिलाड़ियों में शामिल आकर्ष प्रताप ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कराटे के प्रति उनका रुझान शुरुआती दिनों में बना, जिसके बाद उन्होंने नियमित अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। उनके पिता एक पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और वे लगातार उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी सक्रिय रहने की प्रेरणा देते हैं। आकर्ष का कहना है कि कश्मीर में होने वाली इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में वे अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने के लिए कमर कस चुके हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है।
इसी क्रम में एक अन्य कराटे खिलाड़ी सत्यम कुमार ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपने कराटे प्रशिक्षण की शुरुआत ओरिएंट पब्लिक स्कूल से की थी। आगे चलकर उन्होंने कोच सुमित वर्मन से नियमित मार्गदर्शन लेना शुरू किया और विभिन्न स्पर्धाओं में उतरने लगे। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता गया, खेल के प्रति उनका समर्पण और गहरा होता चला गया। सत्यम अब तक चार पदक अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य भविष्य में एक शीर्ष कराटे खिलाड़ी बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश को गौरवान्वित करना है।
जमीनी प्रतिभा को ओलंपिक मंच तक ले जाने का संकल्प
द कराटे एकेडमी के कोच सुमित वर्मन का मानना है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचलों के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। पलामू जैसे सुदूर जिले से भी युवा खिलाड़ी अपनी लगन के बूते लगातार आगे निकल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर अभिभावक केवल अकादमिक पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, जो निश्चित रूप से जरूरी है, मगर साथ ही बच्चों को खेलों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उनका सबसे बड़ा सपना यह है कि पलामू का कोई खिलाड़ी आने वाले समय में ओलंपिक खेलों के मंच तक पहुंचे। इसके अलावा सरकारी स्तर पर भी खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए कई सुविधाएं और नए मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
खेल कोटे से सरकारी नौकरियों और करियर के नए रास्ते
सुमित वर्मन ने करियर के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि खेल का दायरा केवल पदक बटोरने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार का एक मजबूत जरिया भी बन चुका है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में खेल कोटे के तहत नौकरी के अवसर प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने रेलवे और बैंकिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इन संस्थानों में प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए विशेष भर्तियां निकाली जाती हैं। ऐसे में युवा अपनी औपचारिक पढ़ाई जारी रखते हुए खेल को एक सशक्त आजीविका बना सकते हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शिरकत करने जा रहे पलामू के आठों खिलाड़ियों से इस बार भी पदक तालिका में शीर्ष पर रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।





















