राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में स्थित खैरथल कृषि उपज मंडी में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल बाजरे की जोरदार आवक जारी है। ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों काश्तकार अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अनाज भरकर लगातार मंडी पहुंच रहे हैं। बीते पंद्रह दिनों से मंडी परिसर में अनाज की भरपूर आवक देखी जा रही है। हर दिन लगभग 15 से 20 हजार बोरियों में भरकर बाजरा कारोबार के लिए यहां लाया जा रहा है। इतनी व्यापक पैमाने पर उपज पहुंचने से मंडी यार्ड में सुबह से शाम तक कारोबारियों और किसानों की भारी गहमागहमी बनी हुई है।
गुणवत्ता और नमी के हिसाब से तय हो रहे दाम
व्यापारियों के अनुसार मंडी में अनाज का मूल्यांकन मुख्य रूप से दानों की गुणवत्ता और उसमें मौजूद नमी के आधार पर किया जा रहा है। जिस उपज में गीलापन या नमी अधिक पाई जाती है, उसकी बिक्री लगभग 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर हो रही है। इसके विपरीत, पूरी तरह सूखे और उम्दा श्रेणी के अनाज के लिए खरीदार किसानों को 2,150 रुपये से लेकर 2,200 रुपये प्रति क्विंटल तक की पेशकश कर रहे हैं। सामान्य तौर पर मंडी में बाजरे की खरीद-बिक्री का औसत दायरा 2,100 रुपये से 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया है। स्थानीय कारोबारी नरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि इस सीजन में मंडी में साफ-सुथरी और बेहतर गुणवत्ता वाली उपज अधिक तादाद में पहुंच रही है। पिछले वर्ष की तुलना में खुले बाजार में मिल रहे इन दामों से किसानों को कुछ हद तक राहत अवश्य प्राप्त हुई है।
बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ने से आवक में भारी उछाल
कृषि विभाग के आधिकारिक विवरण के मुताबिक इस वर्ष समूचे अंचल में बाजरे की बुवाई के रकबे में उल्लेखनीय प्रसार दर्ज किया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान समूचे जिले में बाजरे की खेती के लिए 80 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 79 हजार हेक्टेयर जमीन पर काश्त हुई थी। चालू सीजन के दौरान यह दायरा और बढ़कर करीब 83,900 हेक्टेयर तक विस्तृत हो गया है। कृषि जानकारों का कहना है कि जब बुवाई का क्षेत्र इतना बड़ा हो गया है, तो स्वाभाविक तौर पर उत्पादन में भी तेजी आई है। इसी वजह से मंडी में अनाज का प्रवाह लगातार बना हुआ है और आगे आने वाले सप्ताहों में आवक का यह स्तर और ज्यादा बढ़ सकता है।
हरियाणा की तर्ज पर सरकारी खरीद और भावांतर योजना की पुकार
खुले बाजार में दामों में थोड़ी मजबूती के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था न होने से स्थानीय काश्तकारों में असंतोष भी देखा जा रहा है। खैरथल व्यापार समिति के अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता ने रेखांकित किया कि राजस्थान में बाजरे की बड़े पैमाने पर उपज होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर तुलाई का काम शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा का हवाला दिया, जहां राज्य प्रशासन किसानों को 2,900 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य प्रदान कर रहा है और साथ ही भावांतर भरपाई योजना के माध्यम से मूल्य अंतर की भरपाई भी की जा रही है। दूसरी तरफ राजस्थान के ग्रामीण उत्पादकों को अपनी गाढ़ी कमाई की उपज खुले बाजार में महज 2,000 रुपये से 2,150 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर बेचनी पड़ रही है। इसी अंतर को देखते हुए व्यापार समिति और कृषक संगठनों ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि राज्य में अविलंब बाजरे की सरकारी खरीद का संचालन किया जाए, जिससे किसानों को उनके परिश्रम का पूरा पारिश्रमिक मिल सके।





















