गणेशोत्सव के पावन अवसर पर राजस्थान के बीकानेर शहर में आस्था और पारंपरिक शिल्प का एक अद्भुत नजारा सामने आया है। मुक्ताप्रसाद नगर स्थित गणेश मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा को बेहद कलात्मक ढंग से सोने और चांदी के वर्क से सजाया गया है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पूरे बीकानेर में पहली बार किसी गणेश प्रतिमा का इतना भव्य और अनूठा श्रृंगार किया गया है। इस मनमोहक स्वरूप की चर्चा अब केवल शहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूर-दराज के इलाकों सहित विदेशों में रहने वाले भक्त भी इस पावन रूप की एक झलक पाने के लिए यहां खिंचे चले आ रहे हैं।
करीब 25 दिनों की अनवरत साधना से तैयार हुआ स्वरूप
भगवान गणेश की प्रतिमा पर सोने और चांदी का वर्क चढ़ाने का यह काम आसान नहीं था। इसे तैयार करने में लगभग 20 से 25 दिनों का समय लगा। इस पूरी अवधि के दौरान बेहद धैर्य, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ प्रतिमा पर वर्क लगाने, महीन नक्काशी उकेरने और सजावट के विभिन्न चरणों को पूरा किया गया। कारीगरी की बारीक समझ के कारण प्रतिमा का हर एक हिस्सा बेहद सजीव और भव्य नजर आने लगा है। मंदिर में आने वाले दर्शनार्थी जब इस दिव्य रूप को देखते हैं तो भाव-विभोर हो उठते हैं। कई श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और दुर्लभ दर्शन को अपने मोबाइल कैमरों में संजोते नजर आते हैं।
सोने की नक्काशी की पारिवारिक परंपरा और समर्पण भाव
इस विशिष्ट कार्य को अंजाम देने वाले विजय श्रीमाली का परिवार लंबे समय से सोने की नक्काशी के पारंपरिक काम से जुड़ा रहा है। विजय श्रीमाली ने अपनी पूरी जिंदगी इसी पारंपरिक कला और शिल्पकला को समर्पित कर दी है। उन्होंने राजस्थान के कई प्रमुख और ऐतिहासिक तीर्थ स्थलों पर भी सोने की नक्काशी का काम किया है। उनके कार्यों में देशनोक स्थित विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर और सियाणा स्थित बाबा भेरूनाथ मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थल शामिल हैं।
विजय श्रीमाली का मानना है कि ईश्वर ने उन्हें हाथों में सोने की नक्काशी करने की जो अनमोल कला दी है, उसी कला के माध्यम से वे भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते थे। मन में इसी समर्पण भाव के साथ उन्होंने गणेश जी की प्रतिमा को सोने और चांदी के वर्क से सजाने का संकल्प लिया था। उन्होंने बताया कि इस तरह का विशेष श्रृंगार पिछले वर्ष भी किया गया था और इस बार भी उसी श्रद्धा, निष्ठा और उमंग के साथ इस पूरी सजावट को दोहराया गया है।
देश के कोने-कोने के साथ ऑस्ट्रेलिया से भी पहुंचे श्रद्धालु
सोने, चांदी और उम्दा शिल्पकला का यह पावन संगम बीकानेर शहर में हर तरफ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मुक्ताप्रसाद नगर के इस मंदिर में सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। विजय श्रीमाली के अनुसार, इस विशिष्ट श्रृंगार के दर्शन के लिए न केवल बीकानेर और राजस्थान के अलग-अलग जिलों से भक्त आ रहे हैं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। इतना ही नहीं, विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय और भक्त भी इस अनूठे स्वरूप के प्रति आकर्षित हुए हैं और ऑस्ट्रेलिया तक से श्रद्धालु भगवान गणेश के इस भव्य रूप के दर्शन के लिए विशेष रूप से बीकानेर पहुंचे हैं।



















