विश्व रक्तदाता दिवस पर सीकर एक ऐसी मिसाल बनकर सामने आता है, जहां खून की कमी अब किसी मरीज की जान पर भारी नहीं पड़ती। जैसे ही किसी को रक्त की जरूरत की सूचना मिलती है, यहां के युवा ब्लड बैंक की ओर दौड़ पड़ते हैं। यही वजह है कि आज सीकर की पहचान 'ब्लड रिवर' यानी रक्त की नदी के रूप में बन चुकी है।
आंकड़े बताते हैं समर्पण की कहानी
एसके अस्पताल की ब्लड बैंक में हर साल 10 हजार से ज्यादा यूनिट ब्लड संग्रहित किया जाता है। पिछले 4 साल का हिसाब लगाएं तो यहां के युवा अब तक 41209 यूनिट रक्तदान कर चुके हैं। इसी निरंतर दान का नतीजा है कि अस्पताल में इलाज करवाने आए जरूरतमंदों को खून के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता।
कौन हैं करण वर्मा
इस मुहिम का एक चेहरा हैं करण वर्मा (सुरज्ञान), जो मूल रूप से धर्म नगरी खाटूश्याम जी के रहने वाले हैं। अब तक वे 28 बार रक्तदान कर चुके हैं। करण सिर्फ खुद रक्तदान करके नहीं रुकते, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। एसके अस्पताल में कई बार उन्होंने इमरजेंसी के समय अनजान लोगों को रक्त देकर उनकी जान बचाई है। उनका मानना है कि अगर खून देने से किसी की जिंदगी बच जाए, तो यह किसी पुण्य से कम नहीं है।
19 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर
करण बताते हैं कि उन्होंने पहली बार 19 साल की उम्र में रक्तदान किया था। उस दौर को याद करते हुए वे कहते हैं कि आज से करीब 10 साल पहले लोग खून देने से डरते थे और ब्लड डोनेशन कैंप में गिनती के ही लोग पहुंचते थे। दांतारामगढ़ में आयोजित एक ब्लड डोनेशन कैंप में उन्होंने पहली बार रक्त दान किया और इतनी कम उम्र में दान करने वाले वे उस कैंप के पहले युवा थे। आज वे साल में 2 से 3 बार अपना रक्तदान करते हैं।
एक फोन कॉल, और पहुंच जाती है टीम
करण की चलाई जागरूकता मुहिम का असर यह हुआ कि 50 से ज्यादा लोग उनसे जुड़ चुके हैं। यह टीम सीकर और जयपुर सहित आसपास के जिलों में जहां भी किसी को रक्त की जरूरत होती है, वहां अपना खून देने पहुंच जाती है। इसके लिए उन्होंने एक WhatsApp ग्रुप बनाया है, जिसमें टीम के रक्तदाताओं को जोड़ा गया है। किसी को भी खून की जरूरत होने पर ग्रुप में जानकारी भेज दी जाती है और फिर टीम का कोई न कोई युवा जरूरतमंद तक पहुंचकर रक्तदान कर देता है।
मरने के बाद भी जीवनदान का संकल्प
करण वर्मा का समर्पण रक्तदान तक सीमित नहीं है। उन्होंने देहदान का भी संकल्प लिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में सीकर में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में उन्होंने यह संकल्प लिया। करण कहते हैं कि देहदान के जरिए व्यक्ति मरणोपरांत भी किसी न किसी को जीवनदान दे जाता है, और इसी भावना से उन्होंने यह कदम उठाया है।













