राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पुनः सक्रिय होने से राज्य के विभिन्न इलाकों में एक बार फिर मौसमी गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के अनुसार, 30 जुलाई को प्रदेश के कई हिस्सों में मध्यम से अत्यधिक भारी स्तर की वर्षा दर्ज की जा सकती है। वर्षा के साथ-साथ बादलों की तेज गर्जना और आकाश से बिजली गिरने की भी प्रबल आशंका जताई गई है। इस बदलते मौसम को देखते हुए आमजन और यात्रियों को यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक मौसम अपडेट जांचने की स्पष्ट सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी की मौसमी प्रणाली से बदला मिजाज
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में निर्मित हुई नई मौसमी प्रणाली के असर से राज्य में बारिश की गतिविधियों में यह बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 30 जुलाई यानी बुधवार से राजस्थान के कोटा, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभागों के अंतर्गत आने वाले जिलों में वर्षा का दायरा बढ़ेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर गर्जना के साथ तेज बौछारें पड़ने और बिजली कड़कने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी तथा पूर्वी राजस्थान के क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
दक्षिण-पूर्वी जिलों में जलभराव का खतरा
प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी इलाकों, मुख्य रूप से कोटा और उदयपुर संभाग में मानसूनी वर्षा का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल सकता है। लगातार बारिश के चलते इन क्षेत्रों के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा स्थानीय छोटी नदियों, नालों और बरसाती धाराओं में जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना बनी हुई है। जिन जिलों में पूर्व में ही अच्छी बारिश हो चुकी है, वहां भूमि में पानी सोखने की क्षमता कम होने के कारण नागरिकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
30 जुलाई से 2 अगस्त तक पश्चिमी राजस्थान का हाल
मौसम विभाग का कहना है कि 30 जुलाई से 2 अगस्त के मध्य पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के विस्तृत भूभाग में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना रहेगा। अधिकांश क्षेत्रों में मध्यम से तेज गति से बारिश होगी, जबकि कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा का दौर चल सकता है। पश्चिमी राजस्थान के अंतर्गत आने वाले जोधपुर और बीकानेर संभागों में भी इस समय अवधि के दौरान मानसूनी गतिविधियां जोर पकड़ेंगी, जिससे कई स्थानों पर हल्की से भारी वर्षा रिकॉर्ड की जा सकती है।
सुरक्षा के उपाय और जरूरी दिशा-निर्देश
भारी बरसात के कारण जनजीवन और यातायात प्रभावित होने की पूरी संभावना है। बारिश प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है, जिससे वाहनों के फिसलने का खतरा रहेगा। शहरी क्षेत्रों में सड़कों तथा कॉलोनियों में पानी भरने से आवागमन बाधित हो सकता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में कच्चे रास्तों के कीचड़ में बदलने से यातायात ठप हो सकता है। बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें। साथ ही पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों या तारों के समीप शरण न लें।
दिल्ली एनसीआर में भी झमाझम बारिश के आसार
राजस्थान के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर भी इस मौसमी बदलाव का असर दिखेगा। 30 जुलाई को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सुबह से लेकर देर रात तक रुक-रुक कर और तेज मूसलाधार बारिश होने के स्पष्ट आसार हैं। एनसीआर के निवासियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग के अलर्ट और यातायात अपडेट को पढ़ने के बाद ही अपने घरों से बाहर निकलें।



















