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राजस्थान का श्रीगंगानगर तपा, पारा पहुंचा 39.4 डिग्री और लगातार दूसरे दिन रहा सबसे गर्मराजस्थान
9 सित॰ 2026, 8:08 pm (2 घंटे पहले)· 2

राजस्थान का श्रीगंगानगर तपा, पारा पहुंचा 39.4 डिग्री और लगातार दूसरे दिन रहा सबसे गर्म

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में मानसून की सुस्ती और तेज धूप के चलते तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन यह सबसे गर्म जिला रहा, जिससे उमस भरी गर्मी से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

राजस्थान के सीमाई इलाके श्रीगंगानगर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है और मानसूनी गतिविधियों के कमजोर पड़ने से यहां का तापमान काफी बढ़ गया है। बादलों के छंटने और आसमान के साफ होने के बाद तेज धूप ने एक बार फिर लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार के रोज यहाँ दिन का अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण श्रीगंगानगर लगातार दूसरे दिन पूरे राज्य में सर्वाधिक गर्म स्थान दर्ज किया गया है।

पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में बारिश का सिलसिला पूरी तरह थम चुका है, जिसके चलते सितंबर के महीने में भी लोगों को चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर के समय सूरज की तेज किरणों ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है और सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी कम नजर आ रही है। वातावरण में नमी कम होने और मानसूनी हवाओं के सुस्त पड़ने से भयंकर उमस बनी हुई है, जिससे लोग दिनभर गर्मी और पसीने से परेशान नजर आ रहे हैं।

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रात के समय भी नहीं मिल रही राहत

केवल दिन का वक्त ही नहीं, बल्कि रात के समय का मौसम भी आमजन को सुकून देने में विफल साबित हो रहा है। श्रीगंगानगर में रात का न्यूनतम तापमान अभी भी लगभग 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना हुआ है। शाम ढलने के बाद भी तापमान में किसी तरह की बड़ी गिरावट दर्ज नहीं हो रही है, जिससे उमस का प्रकोप जारी रहता है। इस भीषण उमस के आगे पंखे और कूलर भी बेअसर साबित हो रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय लोगों की रातों की नींद उड़ गई है और हर कोई परेशान नजर आ रहा है।

मानसूनी तंत्र की सुस्ती और मौसम की स्थिति

मौसम से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस समय राजस्थान के ज्यादातर इलाकों में मौसमी प्रणालियां और मानसूनी ट्रफ लाइन कमजोर स्थिति में हैं। पश्चिमी हवाओं के असर से आसमान बिल्कुल साफ है और बादलों की आवाजाही पूरी तरह रुक चुकी है। इसी वजह से सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं और पारे में लगातार उछाल दर्ज किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाका होने की वजह से श्रीगंगानगर में तापमान का यह बदलाव सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक तीव्रता के साथ महसूस किया जाता है।

आगे कैसा रहेगा मौसम का मिजाज

श्रीगंगानगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में पड़ रही इस कड़ाके की उमस भरी गर्मी से स्थानीय लोगों को फिलहाल तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर गौर करें तो आने वाले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक नया वेदर सिस्टम आकार ले सकता है। इस नए सिस्टम के असर से राज्य के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ सकता है। यदि यह आगामी तंत्र मजबूत साबित होता है, तो सीमावर्ती जिलों में भी बादलों की वापसी होगी और आम जनता को इस झुलसा देने वाली गर्मी से निजात मिल सकेगी।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में बुधवार को अधिकतम तापमान कितना दर्ज किया गया?
बुधवार को श्रीगंगानगर में दिन का अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
श्रीगंगानगर लगातार कितने दिनों से सबसे गर्म जिला बना हुआ है?
श्रीगंगानगर लगातार दूसरे दिन पूरे राजस्थान में सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया है।
रात के समय तापमान कितना बना हुआ है?
रात का न्यूनतम तापमान अभी भी लगभग 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है।
तापमान में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्या है?
मानसूनी ट्रफ लाइन के कमजोर पड़ने और पश्चिमी हवाओं के कारण आसमान साफ होने से तापमान में उछाल आया है।
गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कब है?
बंगाल की खाड़ी में नया वेदर सिस्टम बनने पर मानसून के दोबारा सक्रिय होने और राहत मिलने की संभावना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में सितंबर के महीने में 39.4 डिग्री तापमान और 27 डिग्री न्यूनतम तापमान का यह संयोजन दिखाता है कि मानसूनी ट्रफ लाइन की कमजोरी और पश्चिमी हवाओं का प्रभाव कितना गहरा है। बादलों के पूरी तरह छंटने से सौर विकिरण सीधे जमीन पर पड़ रहा है, जिससे उमस भरी गर्मी स्थानीय जनजीवन और रात्रि विश्राम पर भारी पड़ रही है। यदि बंगाल की खाड़ी में उभरने वाला नया मौसमी सिस्टम प्रभावी होता है, तभी सीमावर्ती जिलों में बादलों की वापसी संभव है और इस तीव्र गर्मी से राहत मिल सकेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि सितंबर में इस तरह की भीषण उमस और तापमान का उछाल केवल मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर भी सीधा असर पड़ता है। जब दिन का पारा 39.4 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री तक बना रहे और पंखे-कूलर भी बेअसर साबित हों, तो यह स्थिति बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है। यदि बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम समय पर सक्रिय नहीं हुआ, तो इस कड़ाके की गर्मी और उमस से जनजीवन और कानून-व्यवस्था के जमीनी मोर्चों पर भी अतिरिक्त तनाव बढ़ सकता है, जिस पर प्रशासन को विशेष नजर रखनी होगी।

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