शादीशुदा जिंदगी या किसी लॉन्ग-टर्म रिश्ते में समय के साथ कई बदलाव आते हैं। अक्सर देखा जाता है कि एक ही छत के नीचे साथ रहते हुए भी दो लोगों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ने लगती है। सुबह की भागदौड़, ऑफिस के काम, घरेलू जिम्मेदारियां और मोबाइल स्क्रीन के बीच आपसी बातचीत का दायरा सिमट जाता है। प्यार और आत्मीयता की जगह सिर्फ औपचारिक बातें ले लेती हैं और पति-पत्नी का रिश्ता एक रूममेट की तरह महसूस होने लगता है। एक्सपर्ट्स रिश्ते की इस स्थिति को 'रूममेट फेज' कहते हैं, जिसमें दो लोग साथ तो रहते हैं लेकिन उनके बीच का भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो जाता है।
क्या होता है रिश्तों में रूममेट फेज?
रूममेट फेज वह दौर है जब कपल एक घर में रहते हुए भी एक-दूसरे से कटे-कटे महसूस करते हैं। इस स्थिति में घर चलाना, बच्चों की देखभाल, बिलों का भुगतान और राशन लाने जैसी तमाम व्यावहारिक जिम्मेदारियां तो मिलकर निभाई जाती हैं, लेकिन आपस में प्यार, रोमान्स, निजी सुख-दुख साझा करना और क्वालिटी टाइम बिताना बंद हो जाता है। बाहर से देखने पर सब कुछ एकदम सामान्य और व्यवस्थित नजर आता है, लेकिन भीतर ही भीतर साथ होने का अहसास कम होने लगता है।
हालांकि, रिश्ते में रूममेट फेज आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रिश्ता खत्म होने की कगार पर है। लंबे समय तक साथ रहने, जिम्मेदारियों के बढ़ने या लगातार व्यस्त दिनचर्या के कारण भावनात्मक दूरी चुपचाप बढ़ जाती है। राहत की बात यह है कि यदि समय रहते इस खिंचाव को पहचान लिया जाए और दोनों पार्टनर मिलकर कोशिश करें, तो रिश्ते में दोबारा अपनापन और गर्माहट लाई जा सकती है।
रूममेट फेज के 4 बड़े संकेत
किसी भी रिश्ते में भावनात्मक दूरी अचानक नहीं आती, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यवहार में झलकने लगती है। यदि आप समझना चाहते हैं कि आपका रिश्ता किस दौर से गुजर रहा है, तो इन 4 मुख्य संकेतों पर ध्यान दें
1. बातचीत का दायरा सिर्फ जिम्मेदारियों तक सिमटना
अगर आपकी और आपके पार्टनर की बातचीत अब केवल "खाना खा लिया?", "बिजली का बिल भर दिया?" या "कल कितने बजे ऑफिस निकलना है?" जैसे सवालों तक सीमित हो गई है, तो यह एक चेतावनी संकेत है। रिश्ते की शुरुआत में दिनभर की छोटी से छोटी बात एक-दूसरे से शेयर करने का मन करता था, लेकिन अब सामने वाला कुछ बताए तो भी उसमें रुचि नहीं रहती। ध्यान रखें कि रिश्ते में बातचीत की मात्रा से ज्यादा उसकी गुणवत्ता मायने रखती है। पूरे दिन की औपचारिक बातों के मुकाबले सिर्फ 10 मिनट की दिल से की गई बात दो लोगों को कहीं ज्यादा करीब ला सकती है।
2. साथ में समय बिताना लेकिन जुड़ाव गायब होना
कई कपल एक ही कमरे या बिस्तर पर घंटों साथ बैठते हैं, लेकिन दोनों अपने-अपने फोन चलाने में व्यस्त रहते हैं। टीवी चल रहा होता है और खाना भी साथ खाया जाता है, लेकिन दोनों के बीच कोई वास्तविक संवाद नहीं होता। इसे केवल व्यस्तता या थकावट समझकर टाल देना आसान है। लेकिन अगर आपको याद ही नहीं कि आखिरी बार आपने बिना किसी काम या मजबूरी के सिर्फ एक-दूसरे के साथ खुशनुमा समय कब बिताया था, तो यह रुककर सोचने का समय है।
3. एक-दूसरे की छोटी बातों और खुशियों में दिलचस्पी खत्म होना
रिश्ते की शुरुआत में पार्टनर की छोटी-सी पसंद या बात भी बहुत खास लगती है। समय बीतने के साथ यह उत्साह स्वाभाविक रूप से कम हो सकता है, लेकिन अगर पार्टनर के दिनभर के अनुभव, उसकी परेशानी, खुशी या योजनाओं से आपको लगातार कोई फर्क न पड़े, तो यह भावनात्मक दूरी का संकेत है। इसी तरह एक-दूसरे की तारीफ करना, प्यारे मैसेज भेजना, गले लगाना या बिना वजह पास बैठना कम हो जाना भी रिश्ते में अपनापन कमजोर करता है।
4. भावनात्मक सहारे के लिए पार्टनर के बजाय दूसरों पर निर्भर होना
रूममेट फेज में अक्सर दोनों लोग अपनी-अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे एक-दूसरे से भावनात्मक सहारे की उम्मीद ही छोड़ देते हैं। कोई परेशानी हो तो दोस्त को फोन किया जाता है और कोई खुशी की खबर हो तो सबसे पहले किसी और से शेयर की जाती है। आत्मनिर्भर होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन समस्या तब बनती है जब पार्टनर आपके सबसे करीब रहते हुए भी आपकी पहली पसंद नहीं रह जाता।
रूममेट फेज से बाहर निकलने और रिश्ते को मजबूत बनाने के उपाय
इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए सबसे पहला कदम समस्या को स्वीकार करना है। एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय शांति से बैठकर बात करें कि रिश्ते में किस चीज की कमी महसूस हो रही है। रिश्ते में दोबारा गर्माहट लाने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ा असर दिखाते हैं।
हर दिन साथ बैठकर चाय पीना, खाना खाते समय फोन को दूर रखना, शाम को थोड़ी देर टहलने निकलना या हफ्ते में एक दिन छोटा-सा डेट टाइम तय करना बहुत मददगार साबित हो सकता है। कई बार रिश्ता किसी बड़े बदलाव का नहीं, बल्कि नियमित रूप से दिए जाने वाले छोटे-छोटे ध्यान का इंतजार कर रहा होता है। अगर दोनों साथी सच्चे मन से प्रयास करें, तो रूममेट फेज को आसानी से खत्म किया जा सकता है।



















