आज देश भर में धार्मिक उल्लास के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके पावन अवसर पर रवि योग का विशेष संयोग भी बना हुआ है। सनातन परंपरा में इस दिन का आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व माना जाता है, क्योंकि यह जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है। इस खास मौके पर भक्तजन विधि-विधान से भगवान की आराधना करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए हाथ में अनंत सूत्र बांधते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान करने से साधक को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही यह दिन गणेश भक्तों के लिए भी बहुत भावुक और महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि आज ही दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन होता है और बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है।
पूजन विधि और अनुष्ठान के नियम
इस पवित्र दिन पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने का विधान है। इसके बाद घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह स्वच्छ करके वहां भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान को पीले रंग के पुष्प, ताजे फल, पंचामृत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। अनुष्ठान की शुरुआत में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है, जिसके पश्चात अनंत देव की कथा का पाठ किया जाता है। पूजा के समय चौदह गांठों वाला विशेष अनंत सूत्र भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर उसे अपने दाहिने हाथ में बांधा जाता है। अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारी जाती है और उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित किया जाता है।
महत्वपूर्ण तिथियां और व्रत का दिन
भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर हो चुकी है। इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 06 मिनट पर होगा। उदया तिथि की गणना के आधार पर अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजन कार्य 25 सितंबर यानी आज ही संपन्न किया जा रहा है।
शुभ मुहूर्त और योग की सारणी
अनंत चतुर्दशी पर पूजा-पाठ के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनका लाभ उठाकर भक्त अनुष्ठान कर सकते हैं। दिनभर में पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:36 बजे से 05:24 बजे तक, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:14 बजे से 03:02 बजे तक तय किया गया है। संध्याकाल के लिए गोधूलि मुहूर्त शाम 06:15 बजे से 06:39 बजे तक रहेगा, जबकि रवि योग सुबह 06:12 बजे से पूर्वान्ह 11:22 बजे तक प्रभावी रहेगा।
चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का रहस्य
इस पर्व के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले अनंत सूत्र की अपनी एक खास परंपरा है जिसमें कुल चौदह गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन सभी गांठों को ब्रह्मांड के चौदह लोकों का प्रतीक माना जाता है। इस धागे को भगवान विष्णु की असीम शक्ति और अनंत स्वरूप का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। भक्तजन इस सूत्र को धारण करके अपने पूरे परिवार की रक्षा, समृद्धि और संकटों के नाश की प्रार्थना करते हैं। हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में जिन चौदह लोकों का वर्णन मिलता है, उनमें सात ऊर्ध्व लोक यानी भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः और सत्य लोक शामिल हैं। इसके साथ ही सात अधोलोक यानी अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल बताए गए हैं, जिन्हें मिलाकर कुल चौदह लोक बनते हैं।
पौराणिक कथा और पांडवों का प्रसंग
अनंत चतुर्दशी के पर्व से जुड़ी पौराणिक कथाओं में महाभारत काल के पांडवों का प्रमुख उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हारकर वनवास के दौरान भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत को करने की सलाह दी थी। यह मान्यता है कि युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ मिलकर पूरे विधान के साथ अनंत देव की आराधना की और इस सूत्र को धारण किया। इस अनुष्ठान के प्रभाव से पांडवों के जीवन के तमाम संकट टल गए और उन्हें अपने कष्टों से मुक्ति मिल गई।
गणेश विसर्जन के साथ उत्सव का समापन
अनंत चतुर्दशी का यह दिन गणेश भक्तों के लिए साल का एक सबसे भावुक और बड़ा दिन होता है। इसी दिन दस दिनों तक चले गणेशोत्सव का औपचारिक समापन होता है। श्रद्धालु बाजे-गाजे, ढोल-नगाड़ों और पूरी भक्ति के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए किसी पवित्र नदी या जलाशय की ओर ले जाते हैं। विसर्जन के इस अंतिम पड़ाव पर बप्पा से अगले बरस जल्दी आने की गुहार लगाई जाती है और उनसे आशीर्वाद मांगा जाता है।
















