पलामू के खेतों में स्ट्रॉबेरी की नई बहार, कम बारिश वाले इलाके में किसान कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफाघरेलू पौधों के लिए प्याज के छिलकों से बनाएं लिक्विड खाद और मल्चिंग, जानिए आसान विधिबोस्टन में जुटेगा स्टार्टअप जगत, फाउंडर समिट 2026 की तारीखों और टिकट दरों की घोषणाअनंत चतुर्दशी की पूजा में 14 गांठों के धागे का महत्व और उपवास की जरूरी सावधानियांडॉक्टर हू की मशहूर कहानी द शैतान पिट अब बड़े पर्दे पर, अनसीन फुटेज के साथ रिलीज होगी एक्सटेंडेड फिल्मकनाडा की जनसंख्या में 0.5 प्रतिशत की बढ़त, मंदी की आशंका घटी लेकिन वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल जारीहर प्राइवेट हेल रिव्यू (2026): निकोलस वाइंडिंग रेफन का खूबसूरत मगर उबाऊ सिनेमाई भटकावअमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से डॉलर में उछाल, यूरो और प्रमुख मुद्राओं पर बढ़ा दबावअनंत चतुर्दशी पर श्रीहरि पूजन और रक्षा सूत्र के लिए जरूरी सामान, यहां देखें पूरी तैयारीसीमा ने 10000 मीटर रेस में जीता कांस्य, एशियन गेम्स 2026 में खुला भारत के एथलेटिक्स का खाता
अनंत चतुर्दशी पर श्रीहरि पूजन और रक्षा सूत्र के लिए जरूरी सामान, यहां देखें पूरी तैयारीधर्म
24 सित॰ 2026, 10:58 pm (2 मिनट पहले)· 0

अनंत चतुर्दशी पर श्रीहरि पूजन और रक्षा सूत्र के लिए जरूरी सामान, यहां देखें पूरी तैयारी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत रूप, माता यमुना और शेषनाग की आराधना की जाती है। इस पावन पर्व पर पूजन सामग्री, 14 गांठों वाले रक्षा सूत्र और संपूर्ण विधि की विस्तृत जानकारी यहां उपलब्ध है।

सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है, जिसे अनंत चतुर्दशी के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भक्त उपवास रखते हैं और जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से उपासना करते हैं। इस दिन श्रीहरि के साथ-साथ माता यमुना और पाताल लोक के अधिपति शेषनाग के पूजन का भी विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इसी शुभ तिथि के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है, जिसके चलते देश भर में श्रद्धालु भारी संख्या में भगवान गणपति का विसर्जन भी संपन्न करते हैं।

अनंत चतुर्दशी के मुख्य पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

भगवान विष्णु और उनके सहचर स्वरूपों की पूर्ण फलदायी पूजा संपन्न करने के लिए सभी आवश्यक सामग्रियों को पहले से जुटा लेना शुभ और सुविधाजनक रहता है। वेदी सजाने और प्रभु को अर्पित करने के लिए इन वस्तुओं की व्यवस्था अवश्य करें

ये भी पढ़ें
  • भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शेषनाग की संयुक्त तस्वीर या विग्रह
  • प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की प्रतिमा
  • देव प्रतिमाओं के लिए नए वस्त्र और सुंदर आभूषण
  • पवित्र गंगाजल और अभिषेक तथा शुद्धि के लिए एक लोटा ताजा जल
  • चौकी पर बिछाने हेतु स्वच्छ पीले रंग का वस्त्र
  • रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत, सफेद तिल और सिंदूर
  • जनेऊ और कलावा यानी मौली
  • दीपक, शुद्ध घी या तेल, और रुई की बत्तियां
  • सुगंधित धूपबत्ती और आरती के लिए कपूर
  • ताजे फल, नैवेद्य के रूप में पारंपरिक मिठाई और भोग
  • सुगंधित पुष्प, तुलसी दल और अशोक के ताजे पत्ते
  • पूजा की साबुत सुपारी और दक्षिणा राशि
  • अनंत चतुर्दशी व्रत कथा की पुस्तक

14 गांठों वाले अनंत रक्षा सूत्र की सामग्री

अनंत चतुर्दशी के व्रत में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व है, जो जीवन के सभी संकटों से रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र सूत्र को तैयार करने के लिए आवश्यक चीजें इस प्रकार हैं

रक्षा सूत्र के निर्माण के लिए शुद्ध सूती अथवा रेशमी धागा लिया जाता है। इस धागे को संस्कारित और रंगीन बनाने के लिए साबुत हल्दी की गांठ अथवा शुद्ध केसर का उपयोग किया जाता है। यदि घर पर धागा तैयार करने में असुविधा हो, तो बाजार में पहले से उपलब्ध 14 गांठों वाला प्रामाणिक अनंत सूत्र भी लाया जा सकता है।

क्रमबद्ध पूजन विधि और रक्षा सूत्र धारण करने का नियम

शास्त्रसम्मत नियमों के अनुसार अनंत चतुर्दशी की पूजा आरंभ करने के लिए सबसे पहले एक स्वच्छ काष्ठ चौकी तैयार करें। उस चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शेषनाग की सम्मिलित प्रतिमा स्थापित करें। इसके पश्चात भगवान श्रीहरि को चंदन, हल्दी, रोली और केसर का तिलक अर्पित करें।

इसके बाद रेशमी या सूती धागे को हल्दी अथवा केसर के घोल में अच्छी तरह रंग लें। फिर उसमें क्रम से 14 पवित्र गांठें लगाएं और इसे प्रभु की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक रखें। अब भगवान को सुगंधित फूल, दूर्वा, अक्षत, साबुत सुपारी और तुलसी दल समर्पित करें। इसके साथ ही वेदी पर शुद्ध दीपक और सुगंधित धूप प्रज्वलित करें।

विधिपूर्वक फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रद्धा से पाठ करें या श्रवण करें। पूजा अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत इस सिद्ध रक्षा सूत्र को धारण किया जाता है। पुरुषों को यह अनंत सूत्र अपने दाहिने हाथ की कलाई पर और महिलाओं को अपने बाएं हाथ की कलाई पर बांधना चाहिए। अंत में कर्पूर जलाकर प्रभु की भव्य आरती उतारें और परिवार के सुख, आरोग्य व समृद्धि की प्रार्थना करें।

सवाल-जवाब

अनंत चतुर्दशी का पर्व किस तिथि को मनाया जाता है?
यह पावन त्योहार हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
इस दिन किन-किन देव स्वरूपों की पूजा का विशेष विधान है?
इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप के साथ-साथ माता लक्ष्मी, शेषनाग और माता यमुना की पूजा की जाती है।
अनंत सूत्र में कितनी गांठें लगाई जाती हैं?
अनंत रक्षा सूत्र में सूती या रेशमी धागे को हल्दी अथवा केसर से रंगकर कुल 14 गांठें लगाई जाती हैं।
पुरुषों और महिलाओं को अनंत सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए?
पूजा संपन्न होने के बाद पुरुषों को यह पवित्र धागा अपने दाहिने हाथ में और महिलाओं को अपने बाएं हाथ में बांधना चाहिए।
क्या अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है?
हां, यह दस दिवसीय गणेशोत्सव का अंतिम दिन होता है, इसलिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसी दिन बप्पा का विसर्जन करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp