सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टनोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती विवाद: वीपीपी ने एमडीसी के हस्तक्षेप को ठहराया सही, निष्पक्ष जांच की उठाई मांगअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगे
अंबाला के 150 साल पुराने शिवालय में विराजित है 306 किलो का अनोखा पारा शिवलिंग, जलाभिषेक से मिटती हैं व्याधियांधर्म
22 अग॰ 2026, 6:30 am (40 दिन पहले)· 1

अंबाला के 150 साल पुराने शिवालय में विराजित है 306 किलो का अनोखा पारा शिवलिंग, जलाभिषेक से मिटती हैं व्याधियां

हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित सत्संग सभा शिवाला मंदिर अपने 150 वर्ष से अधिक प्राचीन नर्मदेश्वर शिवलिंग और उत्तर भारत के एकमात्र 306 किलो के पारा शिवलिंग के लिए श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है।

हरियाणा का अंबाला जिला केवल अपनी ऐतिहासिक इमारतों या फिर सैन्य छावनी के कारण ही नहीं पहचाना जाता, बल्कि यह क्षेत्र सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का भी एक बड़ा केंद्र है। इसी अंबाला छावनी की अनाज मंडी क्षेत्र में स्थित सत्संग सभा शिवाला मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ साथ दूर दराज के लोगों के लिए अगाध श्रद्धा का ठिकाना है। करीब 150 वर्षों से भी अधिक पुराने इस धार्मिक स्थल का स्वरूप समय के साथ भले ही भव्य होता गया, लेकिन भगवान शिव के प्रति भक्तों की निष्ठा आज भी वैसी ही अटूट बनी हुई है। मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां की दो विशेष शिवलिंग संरचनाएं हैं, जो इसे उत्तर भारत भर में एक अलग पहचान दिलाती हैं।

150 साल पुराना नर्मदेश्वर शिवलिंग और कांवड़ यात्रा की परंपरा

इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे प्राचीन और मूल पहचान यहां स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग से जुड़ी हुई है। मंदिर के पुजारी हिमांशु शास्त्री के अनुसार, शुरुआती काल में यहां केवल भगवान शिव का ही एक छोटा शिवालय हुआ करता था, जिसमें यह 150 वर्ष से भी अधिक प्राचीन नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित था। जैसे जैसे समय बीतता गया, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर का भव्य जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया।

ये भी पढ़ें

स्थानीय नागरिकों के लिए यह शिवालय केवल सामान्य पूजा अर्चना का स्थल नहीं है, बल्कि कई पीढ़ियों से लगातार चली आ रहे अटूट विश्वास की जीवित धरोहर है। हर साल महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बड़ी संख्या में कांवड़िए उत्तराखंड के हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पदयात्रा करते हुए यहां पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। विशेष रूप से सावन के पूरे महीने में यहां सुबह से लेकर देर शाम तक शिव भक्तों का तांता लगा रहता है।

उत्तर भारत का अनोखा 306 किलो का पारा शिवलिंग और उसके लाभ

हाल के कुछ वर्षों में इस शिवालय में एक अत्यंत विशेष और दुर्लभ 306 किलो का पारा शिवलिंग स्थापित किया गया है, जिसने मंदिर की प्रसिद्धि में और अधिक वृद्धि की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर भारत में यह अपने प्रकार का इकलौता ऐसा पारा शिवलिंग माना जाता है। पुजारी हिमांशु शास्त्री का कहना है कि इस पारा शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक का विशेष आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व है।

ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से इस 306 किलो के पारा शिवलिंग पर जल अर्पित करने से शरीर के विभिन्न रोग, शारीरिक कष्ट और जीवन में आने वाली अनेक परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसी विश्वास के कारण केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के अलग अलग जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां माथा टेकने आते हैं। कोई अपने परिवार की सुख और समृद्धि तथा आरोग्य की प्रार्थना करता है, तो कोई अपनी विशेष मनोकामना लेकर भगवान भोलेनाथ के चरणों में उपस्थित होता है।

कृष्ण जन्माष्टमी और भव्य फूलडोल मेले का खास आयोजन

सत्संग सभा शिवाला मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और वार्षिक उत्सवों के लिए भी प्रसिद्ध है। भाद्रपद माह में आने वाली श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भगवान शिव के पारा शिवलिंग का अत्यंत भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है। जन्माष्टमी उत्सव के ठीक दो से तीन दिनों के पश्चात मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में ऐतिहासिक फूलडोल मेले का आयोजन करने की परंपरा रही है।

इस फूलडोल मेले के दौरान भगवान श्री कृष्ण की एक नयनाभिराम पालकी सजाई जाती है, जिसे पूरे अनाज मंडी और शहर के प्रमुख बाजारों में गाजे बाजे के साथ निकाला जाता है। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भजनों पर झूमते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार यह शिवालय न केवल शिव भक्ति बल्कि हरि और हर के मिलन का भी अनुपम उदाहरण पेश करता है।

सवाल-जवाब

सत्संग सभा शिवाला मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर हरियाणा के अंबाला छावनी स्थित अनाज मंडी क्षेत्र में स्थित है।
मंदिर में स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग कितना पुराना है?
मंदिर में स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग 150 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है।
इस मंदिर के पारा शिवलिंग की क्या खासियत है?
यह 306 किलो वजनी पारा शिवलिंग है, जिसे उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा शिवलिंग माना जाता है जिस पर जल चढ़ाने से बीमारियां दूर होने की मान्यता है।
किन-किन राज्यों से श्रद्धालु इस शिवालय में आते हैं?
हरियाणा के अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु यहां मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
जन्माष्टमी के बाद मंदिर में कौन सा विशेष मेला लगता है?
जन्माष्टमी के दो-तीन दिन बाद यहां ऐतिहासिक फूलडोल मेले का आयोजन होता है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण की पालकी निकाली जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp