आषाढ़ माह का आगमन हो चुका है। हिंदू पंचांग में यह महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस मास में भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है। आषाढ़ में ही देवशयनी एकादशी पड़ती है, जिसके बाद भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहते हैं। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, लेकिन पूजा-पाठ, जप, दान और पुण्य कर्मों के लिए यह समय अत्यंत शुभ है। चूंकि तुलसी माता भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं, इसलिए आषाढ़ माह में तुलसी पूजन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इस माह तुलसी माता की पूजा किस विधि से करें और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
सुबह तुलसी को जल अर्पण करें
आषाढ़ मास के पूरे तीस दिनों में प्रतिदिन सूर्योदय के बाद तुलसी माता को जल चढ़ाएं। जल अर्पित करते समय भगवान विष्णु के मंत्रों का उच्चारण करें और दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करें। इस नियमित अभ्यास से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। ध्यान रहे कि रविवार के दिन, एकादशी तिथि पर तथा सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय तुलसी में जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
शाम को तुलसी के पास जलाएं घी का दीया
आषाढ़ माह में हर शाम तुलसी माता के सामने घी का दीया जलाना बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इस दीये की लौ से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वातावरण में सकारात्मकता का प्रसार होता है। जो लोग नियमित रूप से संध्या काल में तुलसी माता की आराधना करते हैं, उन पर भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष कृपा बनी रहती है।
तुलसी की परिक्रमा से दूर होती हैं जीवन की बाधाएं
आषाढ़ मास में तुलसी पूजन के बाद 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करने का विधान है। यह परिक्रमा जीवन की समस्त बाधाओं और कठिनाइयों को शीघ्र दूर करती है। जो व्यक्ति इस विधि का नियमित पालन करता है, उसके घर में खुशहाली और शांति बनी रहती है।
भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना है अनिवार्य
आषाढ़ माह पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित है। इस महीने में रोज पूजा के दौरान विष्णु जी को तुलसी के पत्ते जरूर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना नारायण की पूजा और उनका भोग दोनों ही अधूरे माने जाते हैं। इसलिए विष्णु जी की हर पूजा में तुलसी दल का समावेश अवश्य करें।
इन मंत्रों से करें भगवान विष्णु की स्तुति
तुलसी पूजन के साथ-साथ भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करने से विशेष फल मिलता है:
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
आषाढ़ माह में इन बातों से रखें परहेज
आषाढ़ में धार्मिक फल की प्राप्ति के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन भी जरूरी है। इस माह नीचे बताई गई बातों से दूरी बनाए रखें:
- मांस, मदिरा, अंडा, मछली, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- किसी भी प्रकार की नशीली वस्तुओं से पूरी तरह दूर रहें।
- विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य इस माह वर्जित हैं।
- आषाढ़ में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।













