देशभर में 7 सितंबर 2025 को लगने वाले चंद्रग्रहण को लेकर राम नगरी अयोध्या में खास एहतियात बरती जा रही है। इस खगोलीय घटना का आध्यात्मिक और धार्मिक नजरिए से बहुत अधिक महत्व माना जाता है, जिसके कारण तमाम प्रमुख मठों और मंदिरों के कपाट दोपहर 12:30 बजे से ही बंद कर दिए गए हैं। जब यह खगोलीय परिघटना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, तो अगले दिन सुबह के समय श्रृंगार और मंगला आरती संपन्न होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए दोबारा कपाट खोले जाएंगे।
सूतक काल और समय सारणी
इस खगोलीय गोचर का सूतक काल रात 1:57 बजे से प्रभावी हो जाएगा। विभिन्न खगोलीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहण की शुरुआत रात 9:57 बजे तय की गई है और यह रात 1:27 बजे तक चलेगी। इस निश्चित अंतराल के दौरान मंदिरों के भीतर किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह से स्थगित रखे जाएंगे। विज्ञान के जानकारों के अनुसार यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा बिल्कुल एक सीध में आ जाते हैं, जबकि सनातन परंपरा में इसे विशेष फलदायी और संवेदनशील काल माना गया है, जिसके चलते रामलला के दर्शन भी इस दौरान अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं।
घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान और जप
जैसे ही इस खगोलीय छाया का प्रभाव शुरू होगा, अयोध्या के विभिन्न घाटों पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला भी आरंभ हो जाएगा। संत-महात्माओं और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं द्वारा महामंत्रों का निरंतर जाप, यज्ञ और हवन जैसे अनुष्ठान किए जाएंगे ताकि इसके नकारात्मक प्रभावों को काटा जा सके। स्थानीय प्रशासन ने भी आने वाले श्रद्धालुओं से यह अपील की है कि वे सूतक काल के दौरान अपने घरों के भीतर ही रहें और पारंपरिक नियमों के अनुसार मंत्रों का उच्चारण, दान-पुण्य तथा स्नान जैसे कृत्यों का पालन करें।
स्नान, दान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तटों पर साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों का यह मानना है कि इस खगोलीय अवधि के संपन्न होने के उपरांत पवित्र नदी में स्नान करने और दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहें और आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
















