अयोध्या में चंद्रग्रहण का साया: राम मंदिर के कपाट बंद, अब सुबह की मंगला आरती से खुलेंगे द्वारफ्रांस के ओबाग्ने में स्कूल के अंदर चली गोली, 14 साल का छात्र गिरफ्तार और दो शिक्षक घायलविंडबॉर्न सिस्टम्स को मिला अमेरिकी वायु सेना का बड़ा और भारी-भरकम वेदर बैलून डेटा अनुबंधहारा हाची बु क्या है: पेट अस्सी प्रतिशत भरने पर भोजन रोकने की जापानी परंपरा और इसके मायनेमुंह की बदबू से हैं परेशान? डॉ. संजीव पांडे के इन 6 आसान तरीकों से पाएं हमेशा के लिए राहतनवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा और उनकी उत्पत्ति की पौराणिक कथाआश्विन मास में तुलसी पूजा से दूर होगी आर्थिक तंगी, जानिए सही नियम और तिथियांचंद्र ग्रहण पर आज न करें ये गलतियां, बिलासपुर के ज्योतिषाचार्य जागेश्वर अवस्थी ने बताए जरूरी नियमघर की खिड़कियों पर जमी जिद्दी धूल को चुटकियों में ऐसे करें साफ, अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खेजब माधुरी दीक्षित के पति श्रीराम नेने नहीं पहचान पाए थे शाहरुख और सलमान को, अमिताभ बच्चन को लेकर किया बड़ा खुलासा
अयोध्या में चंद्रग्रहण का साया: राम मंदिर के कपाट बंद, अब सुबह की मंगला आरती से खुलेंगे द्वारधर्म
13 अक्तू॰ 2026, 2:06 am (40 मिनट पहले)· 1

अयोध्या में चंद्रग्रहण का साया: राम मंदिर के कपाट बंद, अब सुबह की मंगला आरती से खुलेंगे द्वार

अयोध्या में 7 सितंबर 2025 को लगने वाले चंद्रग्रहण को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिसके चलते राम मंदिर समेत तमाम मठ-मंदिरों के कपाट दोपहर 12:30 बजे से बंद कर दिए गए हैं।

देशभर में 7 सितंबर 2025 को लगने वाले चंद्रग्रहण को लेकर राम नगरी अयोध्या में खास एहतियात बरती जा रही है। इस खगोलीय घटना का आध्यात्मिक और धार्मिक नजरिए से बहुत अधिक महत्व माना जाता है, जिसके कारण तमाम प्रमुख मठों और मंदिरों के कपाट दोपहर 12:30 बजे से ही बंद कर दिए गए हैं। जब यह खगोलीय परिघटना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, तो अगले दिन सुबह के समय श्रृंगार और मंगला आरती संपन्न होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए दोबारा कपाट खोले जाएंगे।

सूतक काल और समय सारणी

इस खगोलीय गोचर का सूतक काल रात 1:57 बजे से प्रभावी हो जाएगा। विभिन्न खगोलीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहण की शुरुआत रात 9:57 बजे तय की गई है और यह रात 1:27 बजे तक चलेगी। इस निश्चित अंतराल के दौरान मंदिरों के भीतर किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान पूरी तरह से स्थगित रखे जाएंगे। विज्ञान के जानकारों के अनुसार यह स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा बिल्कुल एक सीध में आ जाते हैं, जबकि सनातन परंपरा में इसे विशेष फलदायी और संवेदनशील काल माना गया है, जिसके चलते रामलला के दर्शन भी इस दौरान अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं।

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घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान और जप

जैसे ही इस खगोलीय छाया का प्रभाव शुरू होगा, अयोध्या के विभिन्न घाटों पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला भी आरंभ हो जाएगा। संत-महात्माओं और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं द्वारा महामंत्रों का निरंतर जाप, यज्ञ और हवन जैसे अनुष्ठान किए जाएंगे ताकि इसके नकारात्मक प्रभावों को काटा जा सके। स्थानीय प्रशासन ने भी आने वाले श्रद्धालुओं से यह अपील की है कि वे सूतक काल के दौरान अपने घरों के भीतर ही रहें और पारंपरिक नियमों के अनुसार मंत्रों का उच्चारण, दान-पुण्य तथा स्नान जैसे कृत्यों का पालन करें।

स्नान, दान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इस अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तटों पर साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों का यह मानना है कि इस खगोलीय अवधि के संपन्न होने के उपरांत पवित्र नदी में स्नान करने और दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहें और आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

अयोध्या में मंदिरों के कपाट किस समय बंद किए गए?
अयोध्या राम मंदिर समेत सभी प्रमुख मठ-मंदिरों के कपाट दोपहर 12:30 बजे बंद कर दिए गए।
चंद्रग्रहण का सूतक काल कब शुरू होगा?
चंद्रग्रहण का सूतक काल रात 1:57 बजे से शुरू होगा।
ग्रहण की शुरुआत और समाप्ति का समय क्या है?
ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और रात 1:27 बजे समाप्त होगा।
रामलला के दर्शन दोबारा कब शुरू होंगे?
ग्रहण समाप्त होने के बाद अगले दिन प्रातःकाल श्रृंगार और मंगला आरती के साथ दर्शन पुनः प्रारंभ होंगे।
ग्रहण के दौरान अयोध्या में क्या विशेष तैयारियां की गई हैं?
गंगा और सरयू नदी के किनारे विशेष सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के साथ धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।
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