बिलासपुर के ज्योतिषाचार्य जागेश्वर अवस्थी के अनुसार, आज लगने वाला चंद्र ग्रहण ज्योतिषीय और धार्मिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रहण की अवधि के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि नियमों की अनदेखी करने से जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।
मंदिरों के कपाट और पूजा-पाठ पर रोक
ज्योतिषाचार्य जागेश्वर अवस्थी ने जानकारी दी कि आज का चंद्र ग्रहण अपने तय समय पर रात के वक्त नजर आएगा। इस खगोलीय स्थिति के प्रभावस्वरूप मंदिरों के कपाट पूरी तरह बंद रखे जाते हैं और ग्रहण का यह दौर पूरा होने तक किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ या अनुष्ठान नहीं किया जाता है।
खान-पान और गर्भवती महिलाओं के लिए निर्देश
अवस्थी ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रहण काल के पूरे समय के दौरान किसी भी तरह के भोजन, फलों या पानी का सेवन करने की मनाही होती है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने और अपने घर से बाहर कदम न रखने की सख्त सलाह दी जाती है।
किन कार्यों से बचना है जरूरी
उन्होंने आगे बताया कि इस विशेष समयावधि में सिलाई-कढ़ाई करने, बाल कटवाने, नाखून तराशने और दांतों की सफाई करने जैसे रोजमर्रा के कामों से भी पूरी तरह परहेज करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं में इन सभी गतिविधियों को अशुभ श्रेणी में रखा गया है।
ग्रहण समाप्ति के बाद के जरूरी अनुष्ठान
जैसे ही ग्रहण की अवधि समाप्त होती है, तुरंत स्नान करने का विधान है और पूरे घर को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध किया जाना चाहिए। तुलसी के पत्तों से युक्त जल का सेवन करने और ईश्वर का ध्यान करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों में काफी कमी आती है।
दान-पुण्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, ग्रहण के बाद दान करने का बहुत अधिक पुण्य फल मिलता है, जिससे ग्रहण दोष का असर कम होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। अवस्थी ने यह भी कहा कि जहां धार्मिक परंपराओं में इसे आत्मशुद्धि और साधना का खास अवसर माना गया है, वहीं विज्ञान की नजर में यह चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष खगोलीय स्थिति का परिणाम मात्र है।
















