सनातन संस्कृति में आश्विन मास का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस अवधि में पितरों और देवी-देवताओं दोनों की आराधना एक साथ की जाती है। इस महीने के पहले पखवाड़े में पितृपक्ष मनाया जाता है, जबकि दूसरा पखवाड़ा देवीपक्ष के रूप में समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। इस पूरे महीने में यदि विधि-विधान के साथ तुलसी की पूजा की जाए, तो मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है और घर में कभी भी धन की कमी या आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा सभी प्रकार के कर्ज से भी मुक्ति मिलने की मान्यता है। देवघर के जाने-माने जानकारों के अनुसार इस महीने में तुलसी पूजन के कुछ खास नियम और विधान हैं, जिनका पालन करना बेहद फलदायी होता है।
आश्विन मास की तिथियां और महत्व
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के ठीक अगले दिन से आश्विन महीने की शुरुआत हो जाती है। यह विशेष महीना 8 सितंबर से आरंभ होगा और 8 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि के साथ समाप्त हो जाएगा। इस पूरे कालखंड के दौरान कई बड़े और प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। इस दौरान पूर्वजों के तर्पण और पूजन के साथ-साथ शक्ति की देवी मां दुर्गा की उपासना भी की जाती है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। आश्विन मास में तुलसी के पौधे की पूजा करना विशेष रूप से अत्यंत शुभ माना गया है, जो घर के वास्तु और सकारात्मक ऊर्जा को भी मजबूत करता है।
पितृपक्ष के दौरान तुलसी पूजा के नियम
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि वैसे तो तुलसी की सेवा और पूजन साल के हर दिन करना चाहिए, लेकिन पितृपक्ष के दौरान इसका तरीका थोड़ा अलग होता है। जब तक पितृपक्ष का समय चल रहा हो, तब तक रोज सुबह स्नान करने के बाद जल में थोड़ा सा काला तिल मिलाकर तुलसी के पौधे पर अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही तुलसी के पौधे को कुमकुम का तिलक लगाएं और शाम के समय वहां घी का दीपक प्रज्वलित करें। इस दौरान भगवान को सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाना चाहिए, जिससे पूर्वज और देवी-देवता दोनों प्रसन्न होते हैं.
देवीपक्ष में पूजन और मंत्र जाप
जैसे ही पितृपक्ष का समय समाप्त होता है और देवीपक्ष की शुरुआत होती है, तुलसी पूजा का विधान थोड़ा बदल जाता है। इस दौरान तुलसी के पौधे में जल अर्पित करने के बाद उसे लाल चुनरी अवश्य बांधनी चाहिए। इसके साथ ही हर शाम के वक्त नियमित रूप से घी का दीया जलाना चाहिए। पूजा के समय महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। ऐसा करने से घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है और कभी भी धन-धान्य का अभाव नहीं होता है।



















