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अयोध्या राम मंदिर में शुरू हुआ सावन झूलनोत्सव, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर विराजे रामललाधर्म
17 अग॰ 2026, 7:54 pm (44 दिन पहले)· 1

अयोध्या राम मंदिर में शुरू हुआ सावन झूलनोत्सव, स्वर्ण जड़ित चांदी के झूले पर विराजे रामलला

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में सावन के महीने के दौरान रामलला का पारंपरिक झूलनोत्सव शुरू हो गया है। इस पावन अवसर पर उत्सव मूर्ति को स्वर्ण जड़ित चांदी के आकर्षक झूले पर विराजमान किया गया है, जिसके दिव्य दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

सावन के पवित्र महीने में अयोध्या की प्राचीन और गहरी धार्मिक परंपराएं एक बार फिर से जीवंत हो उठी हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह के भीतर सोमवार से रामलला के विशेष झूलनोत्सव की शुरुआत हो गई है। इस खास मौके पर भगवान की उत्सव मूर्ति को सोने और चांदी से बने एक अत्यंत आकर्षक और भव्य झूले पर आसीन कराया गया है। फूलों की सुंदर सजावट से सजे इस झूले पर विराजमान रामलला के मनमोहक स्वरूप का दीदार करने के लिए देश भर से आए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और उमंग देखी जा रही है। इस धार्मिक उत्सव के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति भाव और आनंद के माहौल में डूबा हुआ नजर आ रहा है।

भक्ति गीतों और कजरी की गूंज

गर्भगृह में भगवान की उपस्थिति के सामने भक्तों ने सखी भाव से ओतप्रोत होकर पारंपरिक भक्ति गीत और सावन की प्रसिद्ध कजरी प्रस्तुत की। भजन-कीर्तन की गूंज और सुरीले पारंपरिक गीतों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने स्वर्ण जड़ित झूले पर विराजे रामलला के अलौकिक दर्शन किए। सावन के इस पावन महीने में आराध्य को झूला झुलाने की यह विशेष प्रथा अयोध्या के तमाम मठों और मंदिरों में बहुत अधिक धार्मिक महत्व रखती है। अयोध्या के अलग-अलग मंदिरों में भगवान श्रीराम, माता सीता और अन्य विग्रहों को अत्यंत करीने से झूले पर बैठाकर विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

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पौराणिक परंपरा और श्रृंगार

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भीतर भी सावन की अवधि में रामलला को हर रोज नए और खास वस्त्रों के साथ ही भव्य आभूषणों से सजाया जाता है और उन्हें झूला झुलाने की परंपरा का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया जा रहा है। स्थानीय संतों के अनुसार, भगवान राम के जन्म से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं और कथाओं में भी झूलनोत्सव का बेहद खास जिक्र मिलता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, भगवान श्रीराम के जन्म के लगभग चार महीने बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर बाल रूप में रामलला और उनके भाइयों को प्यार से झूला झुलाया था।

उस दौर में भी सावन के महीने में पारंपरिक कजरी और सोहर गीत गाए जाने की परंपरा थी। समय के बीतने के साथ ही यही सुंदर परंपरा अयोध्या के मुख्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार, इस साल राम मंदिर में झूलनोत्सव के आयोजन के लिए गर्भगृह समेत पूरे मंदिर परिसर को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया गया है। झूले को ताजे फूलों से सजाकर उसका रूप बेहद आकर्षक बनाया गया है। सुबह से ही भक्तजन रामलला के झूला दर्शन के लिए कतारों में लगकर पहुंच रहे हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी अटूट आस्था प्रदर्शित कर रहे हैं।

नाग पंचमी पर शेषावतार मंदिर में विशेष आकर्षण

इसी उत्सव के क्रम में नाग पंचमी के पावन अवसर पर अयोध्या के ऐतिहासिक शेषावतार मंदिर में भगवान लक्ष्मण के दुर्लभ दर्शन और उनकी तस्वीरें भी श्रद्धालुओं के बीच मुख्य आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई हैं। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान लक्ष्मण को प्रत्यक्ष रूप से शेषनाग का अवतार माना जाता है। अयोध्या नगरी में मनाया जाने वाला यह सावन झूला उत्सव केवल एक साधारण धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह अयोध्या की सदियों पुरानी और समृद्ध सांस्कृतिक एवं भक्ति परंपरा का एक जीता-जागता और जीवंत स्वरूप है।

सवाल-जवाब

राम मंदिर में झूलनोत्सव की शुरुआत कब से हुई?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में रामलला का झूलनोत्सव सावन के महीने में सोमवार से शुरू हुआ है।
झूले की क्या विशेषता है?
उत्सव मूर्ति को विराजमान करने के लिए स्वर्ण जड़ित चांदी से निर्मित आकर्षक झूले का उपयोग किया गया है जिसे फूलों से सजाया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झूलनोत्सव का क्या प्रसंग है?
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के जन्म के करीब चार महीने बाद माता कौशल्या ने राजा दशरथ की अन्य रानियों के साथ मिलकर रामलला और उनके भाइयों को झूला झुलाया था।
नाग पंचमी पर कौन सा स्थल आकर्षण का केंद्र रहा?
नाग पंचमी के अवसर पर अयोध्या का शेषावतार मंदिर और वहां भगवान लक्ष्मण के दर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे।
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