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भरतपुर का अनोखा अलख झलक महादेव मंदिर, जहां पीलिया ठीक होने की है गहरी मान्यताधर्म
22 अग॰ 2026, 10:02 am (40 दिन पहले)· 2

भरतपुर का अनोखा अलख झलक महादेव मंदिर, जहां पीलिया ठीक होने की है गहरी मान्यता

राजस्थान के भरतपुर में स्थित अलख-झलक महादेव मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां पीलिया से पीड़ित लोग आरोग्यता की कामना के लिए पहुंचते हैं।

राजस्थान का भरतपुर जिला अपनी समृद्ध धार्मिक विरासत और अनूठे आस्था केंद्रों के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है। इन्हीं खास धार्मिक स्थलों में अलख-झलक महादेव मंदिर का नाम बेहद प्रमुखता से लिया जाता है। यह पावन मंदिर न केवल भगवान शिव की आराधना का मुख्य केंद्र है, बल्कि यहां की एक विशेष और हैरान कर देने वाली लोकमान्यता पूरे अंचल में चर्चा का विषय बनी रहती है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा के साथ-साथ अलख-झलक बाबा की समाधि की परिक्रमा करने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है, जिसे निभाने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं।

भक्तों और स्थानीय निवासियों के मन में इस स्थान को लेकर अटूट विश्वास है कि अलख-झलक बाबा की यह पावन तपस्थली और समाधि स्थल असीम आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। क्षेत्र के लोगों का ऐसा मानना है कि जो व्यक्ति पीलिया रोग से पीड़ित होता है, वह यदि यहां आकर पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से देवाधिदेव महादेव के दर्शन करता है और बाबा की समाधि की परिक्रमा करते हुए स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता है, तो उसकी पीड़ा धीरे-धीरे दूर होने लगती है। इसी गहरी लोकआस्था के प्रभाव के कारण केवल भरतपुर शहर की सीमा ही नहीं, बल्कि आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों, पड़ोसी जिलों और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग अपने बीमार परिजनों को इस उम्मीद के साथ लेकर पहुंचते हैं कि उन्हें यहां राहत मिल सकेगी। मंदिर आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उसके बाद बाबा की समाधि की परिक्रमा पूरी कर उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

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पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही है आस्था की यह परंपरा

मंदिर के पुजारी इस बात का उल्लेख करते हैं कि अलख-झलक बाबा की तपस्या और साधना से जुड़ी यह धार्मिक परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी है जिसे पीढ़ियों से पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। यहां आने वाले लोगों का यह दृढ़ विश्वास है कि यदि कोई भक्त पूरी पवित्रता और सच्चे भाव से प्रार्थना करता है, तो उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है और उसे गंभीर तथा असाध्य कष्टों से भी छुटकारा मिल जाता है। यही विशिष्ट लोकविश्वास इस मंदिर को भरतपुर के बाकी अन्य शिवालयों से बिल्कुल अलग और एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं।

आस्था के साथ चिकित्सीय परामर्श भी है बेहद जरूरी

मंदिर परिसर से जुड़ी यह पूरी परंपरा विशुद्ध रूप से स्थानीय जन-आस्था और लोकविश्वास की नींव पर टिकी हुई है। हालांकि, यह समझना और याद रखना बेहद आवश्यक है कि पीलिया एक गंभीर चिकित्सीय बीमारी है, जिसके अपने शारीरिक और जैविक कारण होते हैं। इसलिए इस प्राचीन धार्मिक मान्यता और परंपरा को केवल आस्था का विषय मानते हुए अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना और उचित चिकित्सीय उपचार करवाना भी उतना ही जरूरी है।

सवाल-जवाब

अलख-झलक महादेव मंदिर कहां स्थित है?
अलख-झलक महादेव मंदिर राजस्थान के भरतपुर शहर में स्थित है।
इस मंदिर में कौन सी मुख्य परंपरा निभाई जाती है?
इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ अलख-झलक बाबा की समाधि की परिक्रमा करने की परंपरा है।
लोग किस बीमारी से राहत के लिए यहां आते हैं?
श्रद्धालु मुख्य रूप से पीलिया रोग से पीड़ित परिजनों को लेकर यहां आरोग्यता की कामना के लिए पहुंचते हैं।
क्या इस लोकमान्यता के साथ चिकित्सीय सलाह भी जरूरी है?
हां, मंदिर से जुड़ी परंपरा आस्था का विषय है, लेकिन पीलिया एक गंभीर बीमारी होने के कारण डॉक्टर की सलाह और इलाज लेना भी बहुत जरूरी है।
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