हिन्दू धर्म में विभिन्न ग्रंथों और शास्त्रों को जीवन के मार्गदर्शन का बड़ा आधार माना गया है। इन्हीं ग्रंथों में से एक भविष्यपुराण को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, जिसके माध्यम से भविष्य से जुड़े कई संकेत और जानकारियां मिलती हैं। इस पुराण में महिलाओं के शरीर के अंगों पर दिखने वाले कुछ विशेष लक्षणों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो उनके हाथ, पैर और गर्दन पर नजर आते हैं। आज के समय में हर कोई एक संस्कारी, भाग्यवान और उत्तम स्वभाव वाली जीवनसाथी की कामना करता है, लेकिन ऐसी शुभ गुणों से युक्त युवतियों की पहचान करना कई बार मुश्किल साबित होता है।
शास्त्रों में स्त्री लक्षणों का महत्व
प्राचीन ग्रंथों में उन खास स्त्री लक्षणों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जिनकी मदद से यह जाना जा सकता है कि कोई महिला परिवार के लिए कितनी शुभ या अशुभ साबित हो सकती है। अब मुख्य सवाल यही सामने आता है कि आखिर विवाह के लिए किन लक्षणों को सबसे अधिक उत्तम माना गया है। इस विषय पर उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने शास्त्रों के हवाले से कई महत्वपूर्ण और रोचक बातें बताई हैं, जो जीवनसाथी के भाग्य को समझने में मदद करती हैं।
पैरों की बनावट और शुभ-अशुभ संकेत
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्राचीन काल में भगवान ब्रह्मा ने ऋषियों और सुमन्तु मुनि ने राजा शतानीक को स्त्रियों से जुड़े शुभ और अशुभ संकेतों के बारे में विस्तार से बताया था। उनके अनुसार वह महिला बहुत ही भाग्यशाली मानी जाती है जिसके चरण लालिमा लिए हुए, कोमल और जमीन पर पूरी तरह समतल रूप से पड़ते हों। जिन युवतियों के पैरों की उंगलियां आपस में सटी हुई, सीधी, गोल, चिकनी और छोटे नाखूनों वाली होती हैं, वे अपने घर में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य का आगमन कराती हैं। पैरों की छोटी उंगलियां लंबी आयु का संकेत देती हैं, हालांकि यदि ये उंगलियां छोटी होने के साथ-साथ एक-दूसरे से दूर यानी विरल भी हों, तो इसे आर्थिक तंगी या धन में कमी का योग माना जाता है।
गर्दन और भौहों से जुड़े शारीरिक लक्षण
भविष्यपुराण के अनुसार जिन महिलाओं की गर्दन पर चार अंगुल लंबी और तीन स्पष्ट रेखाएं दिखाई देती हैं, वे हमेशा आभूषणों से सुसज्जित रहती हैं और उन्हें बेहद सौभाग्यशाली माना गया है। इसके विपरीत कमजोर गर्दन का होना गरीबी का संकेत देता है, बहुत अधिक लंबी गर्दन बांझपन की आशंका को दर्शाती है और अत्यधिक छोटी गर्दन संतान से जुड़ी परेशानियों का संकेत मानी गई है। जिस स्त्री के कंधे और गर्दन के पीछे का हिस्सा थोड़ा झुका हुआ या नीचा होता है, उसकी आयु लंबी होती है। वहीं जिन महिलाओं की भौहें ऊंची, कोमल, पतली, आपस में जुड़ी हुई और धनुष के समान मुड़ी हुई होती हैं, वे भी अपने परिवार के लिए सुख और सौभाग्य का प्रतीक होती हैं।
हाथों और हथेलियों के सबसे शुभ चिह्न
जिन महिलाओं की उंगलियां गोल, लंबी, पतली और आपस में मिलाने पर बिना किसी अंतराल के एकसाथ जुड़ी हुई दिखें तथा जिनके हाथ कोमल और लालिमा लिए हों, ऐसी स्त्रियों को जीवन में हर प्रकार का सुख और सौभाग्य प्राप्त होता है। जिनके नाखून उठे हुए, लाल, चिकने और नरम होते हैं, वे ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करती हैं। इसके विपरीत रूखे, टूटे हुए, टेढ़े-मेढ़े, सफेद या अजीब रंग के नाखून दुर्भाग्य का बड़ा संकेत माने जाते हैं। जिन महिलाओं की हथेलियां खुरदरी, फटी हुई या बहुत अधिक असमान होती हैं, उन्हें अपने जीवन में काफी संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा कलाई यानी मणिबंध पर तीन साफ रेखाएं और उंगलियों के पोरों पर समान रेखाएं होना लंबी उम्र और समृद्धि के शुभ लक्षण माने गए हैं।




















