सनातन परंपरा में सप्ताह के प्रत्येक दिन का संबंध किसी न किसी विशिष्ट देवी, देवता या ग्रह ऊर्जा से माना गया है। इनमें शुक्रवार का दिन विशेष रूप से धन, वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की साधना के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और श्रद्धाभाव से पूजन करने पर साधक के घर में दरिद्रता दूर होती है तथा सुख और संपन्नता का स्थायी वास होता है। इसके साथ ही वैदिक ज्योतिष और वास्तु विज्ञान के अनुसार शुक्रवार के दिन कुछ पारंपरिक और अचूक उपायों को आजमाने से जीवन की कई जटिल बाधाएं स्वतः शांत हो जाती हैं। आचार्य इंदु प्रकाश ने दैनिक जीवन में आने वाली अलग-अलग परेशानियों को समाप्त करने तथा सौभाग्य वृद्धि के लिए कई सरल और प्रभावकारी अनुष्ठान सुझाए हैं।
कामकाजी बाधाओं और अड़चनों से मुक्ति का विधान
कई बार व्यक्ति को निरंतर यह अनुभव होता है कि उसके बनते हुए कार्यों में ऐन वक्त पर रुकावटें आ जाती हैं और एक मुश्किल खत्म होते ही दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है। इस प्रकार की लगातार आने वाली बाधाओं से निजात पाने के लिए शुक्रवार के दिन गोसेवा का विशेष उपाय बताया गया है। इसके अंतर्गत जातक को अपने कुल शारीरिक वजन के दसवें हिस्से के बराबर हरी घास की व्यवस्था करनी चाहिए। इस हरी घास को किसी भी नजदीकी गौशाला में जाकर गायों को श्रद्धापूर्वक दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से अनिष्टकारी दोष शांत होते हैं और कर्मक्षेत्र की अड़चनें दूर होती हैं।
गृह सुख, सकारात्मकता और देवी आराधना की सटीक विधि
परिवार में सकारात्मक ऊर्जा के संचार और निरंतर प्रसन्नता बनाए रखने के लिए शुक्रवार की सुबह का पूजन अत्यंत व्यवस्थित होना चाहिए। इसके लिए प्रातःकाल दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर, स्नान आदि के पश्चात पूर्णतः स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सबसे पहले मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सम्मुख खड़े होकर दोनों हाथ जोड़कर शीश नवाएं। इसके उपरांत अपने दाहिने हाथ में पुष्प लेकर देवी के चरणों में अर्पित करें। फिर उन्हीं ताजे फूलों के ऊपर मिट्टी का एक स्वच्छ दीपक स्थापित करें, उसमें शुद्ध घी भरें, रूई की बाती लगाकर पवित्र ज्योत प्रज्वलित करें और साथ ही भगवती को लाल रंग की चुनरी ओढ़ाएं। यह अनुष्ठान मन को शांति और घर को मांगलिक वातावरण प्रदान करता है।
करियर में ऊंचा मुकाम और आर्थिक संपन्नता का भोग
यदि कोई व्यक्ति अपने करियर, व्यापार अथवा सामाजिक जीवन में एक विशिष्ट और सुदृढ़ मुकाम हासिल करना चाहता है, तो उसे शुक्रवार के दिन देवी लक्ष्मी को शुद्ध केसर का तिलक लगाना चाहिए। इसके साथ ही घर में गाय के दूध और चावल से पारंपरिक खीर तैयार करनी चाहिए। इस पवित्र खीर का नैवेद्य मां लक्ष्मी को अर्पित करें। पूजा संपन्न होने के पश्चात उस खीर के भोग को प्रसाद स्वरूप छोटे बच्चों में स्नेहपूर्वक बांट दें और थोड़ा सा प्रसाद स्वयं भी ग्रहण करें। यह उपाय व्यक्ति की प्रतिष्ठा और पदोन्नति के मार्ग खोलता है।
द्वार पर मंगल प्रतीकों से तिजोरी में धन वृद्धि
घर में स्थायी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह कामना पूरी करने के लिए कि धन रखने का स्थान कभी रिक्त न हो, शुक्रवार के दिन मुख्य प्रवेश द्वार की शुद्धि का उपाय फलदायी है। इसके लिए स्नान के उपरांत एक कटोरी में थोड़ी सी पिसी हल्दी लें और उसमें आवश्यकतानुसार जल मिलाकर घोल तैयार कर लें। इस हल्दी के लेप से अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर सबसे पहले जमीन पर मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरणों के शुभ चिन्ह बनाएं। इसके बाद द्वार के दोनों तरफ की दीवारों पर एक-एक पवित्र स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें और हाथ जोड़कर भगवती लक्ष्मी का मन ही मन ध्यान करें।
रिश्तों में मधुरता और बुरी नजर उतारने का अचूक टोटका
प्रेम संबंधों में आपसी समझ, विश्वास और मधुरता बनाए रखने के लिए शुक्रवार के दिन सवा किलो साबुत मसूर की दाल लेकर किसी भी निकटवर्ती देवालय या मंदिर में दान कर देनी चाहिए। वहीं, यदि किसी जातक अथवा गृहस्थ को यह आभास हो रहा हो कि वह किसी नकारात्मक नजर दोष या नकारात्मक ऊर्जा के कुप्रभाव में घिर गया है, तो उसे सात साबुत लाल मिर्च लेनी चाहिए। इन सातों मिर्चों को अपने सिर से छह बार घड़ी की दिशा में (क्लॉक वाइज) और एक बार उल्टी दिशा में (एंटी क्लॉक वाइज) वार लें। इसके बाद उन लाल मिर्चों को घर के दक्षिण दिशा वाले कोने में रखकर जला दें, जिससे नजर दोष का दुष्प्रभाव तत्काल समाप्त हो जाता है।
सामाजिक सम्मान, घर में सुख और एक रुपये के सिक्के का सौभाग्य उपाय
समाज में अपनी एक पृथक पहचान बनाने और यश-कीर्ति में इजाफा करने के लिए शुक्रवार के दिन खैर के वृक्ष की उपासना करनी चाहिए और वृक्ष के समक्ष श्रद्धाभाव से हाथ जोड़कर नमन करना चाहिए। वहीं जीवन में सतत शांति और सुख की चाह रखने वालों को शुक्रवार के दिन कमल के पुष्प पर विराजित देवी लक्ष्मी का एक सुंदर चित्र खरीदकर अपने पूजाघर में स्थापित करना चाहिए। स्थापना के बाद पहले पुष्प चढ़ाएं और फिर धूप-दीप प्रज्वलित कर पूजन करें। सौभाग्य को कई गुना बढ़ाने के लिए शुक्रवार को एक रुपये का सिक्का देवी के समक्ष रखें। मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा के साथ उस सिक्के की भी पूजा करें और दिनभर उसे वहीं रहने दें। अगले दिन शनिवार को उस सिक्के को उठाकर एक लाल कपड़े में लपेटें और हमेशा अपने पास सुरक्षित रख लें।
आरोग्य रक्षा, कलश दान और व्यापारिक यात्रा की सफलता
उत्तम स्वास्थ्य और शारीरिक व्याधियों से मुक्ति के लिए शुक्रवार को देवी लक्ष्मी के किसी भी मंदिर में जाकर एक सुंदर शंख भेंट करना चाहिए। साथ ही भगवती को शुद्ध घी तथा मखाने का नैवेद्य अर्पित करें और हाथ जोड़कर निरोगी काया की प्रार्थना करें। धन-धान्य की अटूट वृद्धि के लिए एक छोटा मिट्टी का कलश लेकर उसे अक्षत (चावल) से भरें, उसके ऊपर एक रुपये का सिक्का और एक साबुत हल्दी की गांठ रखें। कलश को ढक्कन से बंद कर मां लक्ष्मी का स्मरण करें और उसे किसी योग्य मंदिर के पुजारी को दान दे दें। इसके अतिरिक्त यदि आप किसी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावसायिक सौदे, अनुबंध या डील को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को घर से प्रस्थान कर रहे हों, तो निकलने से पूर्व मां लक्ष्मी का चरण वंदन कर आशीर्वाद लें। उसके बाद मुंह में थोड़ा सा दही और चीनी रखकर, जल ग्रहण करें और फिर प्रस्थान करें। यह उपाय सफलता के योग प्रबल करता है।



















