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भीलवाड़ा का अनोखा रोकड़िया गणेश मंदिर, जहां 21 फीट ऊंची प्रतिमा छत पर विराजमान और मौजूद है हिंगलाज माता का धामधर्म
8 सित॰ 2026, 8:51 pm (22 दिन पहले)· 2

भीलवाड़ा का अनोखा रोकड़िया गणेश मंदिर, जहां 21 फीट ऊंची प्रतिमा छत पर विराजमान और मौजूद है हिंगलाज माता का धाम

भीलवाड़ा के रोकड़िया गणेश मंदिर में भगवान गणेश की 21 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा मंदिर की छत पर स्थापित है। दूर-दूर से आने वाले भक्त संतान प्राप्ति और बिगड़े काम सुधारने के लिए यहां मन्नत का धागा बांधते हैं।

गणेश चतुर्थी का पर्व नजदीक आते ही देशभर के मंदिरों और श्रद्धालुओं में तैयारियां जोर पकड़ने लगती हैं। इस खास अवसर पर लोग भव्य पंडाल सजाते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का रोकड़िया गणेश मंदिर अपनी अद्भुत और अनोखी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश गर्ग गृह के भीतर नहीं बल्कि सीधे मंदिर की छत पर विराजित हैं और उनकी यह विशालकाय प्रतिमा काफी दूर से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

मेवाड़ की सबसे बड़ी प्रतिमा

रोकड़िया गणेश मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की यह भव्य मूर्ति करीब 21 फीट ऊंची है। यह केवल भीलवाड़ा जिले की ही नहीं बल्कि पूरे मेवाड़ क्षेत्र की सबसे विशाल गणेश प्रतिमा मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर आकर गजानंद के दर्शन मात्र से भक्तों की सारी मुरादें पूरी हो जाती हैं। संतान प्राप्ति की कामना लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और मंदिर में मन्नत का धागा बांधकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। इसके अलावा इस धार्मिक स्थल पर पाकिस्तान में स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता का एक मंदिर भी बना हुआ है, जो इसे और भी खास बनाता है।

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सभी देवी-देवताओं का वास और निर्माण का इतिहास

रोकड़िया गणेश सेवा समिति के सचिव प्रह्लाद कुमार गर्ग ने जानकारी दी कि इस परिसर में लगभग सभी देवी-देवताओं का वास है। मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित 21 फीट ऊंचे इन गजानंद जी के दर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस विशाल मूर्ति का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। यह भीलवाड़ा और राजस्थान की पहली ऐसी प्रतिमा है जो किसी मंदिर की तीसरी मंजिल पर इतने ऊंचे स्थान पर स्थापित की गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर दुआ कुबूल होती है और बिगड़े हुए काम भी संवर जाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर भक्त यहां विशेष रूप से प्रसादी का आयोजन भी करवाते हैं।

तीन कलाकारों की मेहनत से बनी मूर्ति

इस अद्भुत प्रतिमा के निर्माण के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। मूर्ति को आकार देने के लिए उस समय तीन अलग-अलग कलाकार आए थे। ओडिशा से आए मूर्तिकार ने मंदिर की तीसरी मंजिल पर इतनी भारी मूर्ति बनाने की योजना सुनकर साफ मना कर दिया था। इसके बाद परबतसर के एक कलाकार ने मिट्टी से गजानंद की प्रतिमा का शुरुआती ढांचा तैयार किया। अंत में हरियाणा के रहने वाले कलाकार रमेश भाई ने पूरे एक साल की कड़ी मेहनत के बाद इस विशालकाय स्वरूप को अंतिम रूप दिया और अंततः इसे मंदिर की छत पर स्थापित किया जा सका।

पाकिस्तान की हिंगलाज माता का धाम

रोकड़िया गणेश मंदिर का आकर्षण केवल भगवान गणेश तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका परिसर कई अन्य देवस्थानों को भी अपने भीतर समेटे हुए है। यहां का सबसे प्रमुख और खास आकर्षण पाकिस्तान में स्थित हिंगलाज माता का मंदिर है। यह क्षेत्र का इकलौता ऐसा मंदिर माना जाता है जहां पाकिस्तान की हिंगलाज माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु माता रानी के दरबार में भी माथा टेकते हैं और अपनी झोली फैलाकर आशीर्वाद मांगते हैं।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा के रोकड़िया गणेश मंदिर की मुख्य विशेषता क्या है?
इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश की 21 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा मंदिर की छत पर स्थापित है।
इस भव्य मूर्ति का निर्माण किस वर्ष करवाया गया था?
भगवान गणेश की इस विशाल प्रतिमा का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में करवाया गया था।
मूर्ति को किसने और कितने समय में तैयार किया था?
हरियाणा के कलाकार रमेश भाई ने एक साल की कड़ी मेहनत के बाद इस मूर्ति को मूर्त रूप दिया था।
मंदिर परिसर में कौन सा अन्य प्रसिद्ध मंदिर स्थित है?
इस मंदिर परिसर में पाकिस्तान की हिंगलाज माता का एक मंदिर भी स्थापित है।
भक्त इस मंदिर में किस मनोकामना के साथ आते हैं?
श्रद्धालु संतान प्राप्ति की कामना और अपने बिगड़े हुए कार्यों को संवारने के लिए यहां मन्नत का धागा बांधते हैं।
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