वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पड़ रही है और वार गुरुवार रहेगा। इस दिन की खगोलीय और धार्मिक स्थिति काफी विशेष बन रही है क्योंकि दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक पंचमी तिथि प्रभावी रहेगी, जिसके ठीक उपरांत षष्ठी तिथि का आगमन होगा। इस बदलाव के चलते पितृ पक्ष के दौरान जिन पूर्वजों का देहावसान पंचमी अथवा षष्ठी तिथि को हुआ था, उनके निमित्त श्राद्ध कर्म इसी दिन संपन्न किए जाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की तृप्ति के लिए सही मुहूर्त में तर्पण और पिंडदान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषीय योग, नक्षत्र और सूर्योदय का समय
दिनभर के खगोलीय संचलन पर दृष्टि डालें तो रात 9 बजकर 21 मिनट की अवधि तक सिद्धि योग का प्रभाव बना रहेगा। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव 1 अक्टूबर की पूरी अवधि और रात्रि काल को पार करते हुए अगले दिन भोर में 4 बजकर 27 मिनट तक जारी रहेगा। प्रातःकालीन सूर्योदय सुबह 06:14 बजे दर्ज होगा, जबकि संध्याकाल में सूर्यास्त शाम 06:07 बजे होगा। इन गणनाओं के आधार पर पूरे दिन के धार्मिक और शुभ अनुष्ठानों की रूपरेखा तैयार की जाती है।
श्राद्ध कर्म के लिए निर्धारित विशेष काल
पितृ पक्ष के अंतर्गत पितरों को जल और भोजन अर्पित करने हेतु मध्याह्न के विशिष्ट पहरों का सर्वाधिक महत्व होता है। इस क्रम में निर्धारित शुभ बेलाएं इस प्रकार हैं
- कुतुप मुहूर्त की समय सीमा 11:47 ए एम से शुरू होकर 12:34 पी एम तक रहेगी।
- रौहिण मुहूर्त का काल खंड 12:34 पी एम से आरंभ होकर 01:22 पी एम तक मान्य होगा।
- अपराह्न काल की विस्तृत अवधि 01:22 पी एम से लेकर 03:45 पी एम तक प्रभावी रहेगी।
दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त
दैनिक पूजा, मंत्र साधना, नए कार्यों के चिंतन तथा धार्मिक संकल्प के लिए विभिन्न समय खंड फलदायी बताए गए हैं
- ब्रह्म मुहूर्त की शुभ अवधि 04:37 ए एम से 05:26 ए एम तक रहेगी।
- प्रातः सन्ध्या का समय 05:01 ए एम से 06:14 ए एम तक निर्धारित है।
- अभिजित मुहूर्त का प्रभाव 11:47 ए एम से 12:34 पी एम तक विद्यमान रहेगा।
- विजय मुहूर्त दोपहर 02:09 पी एम से 02:57 पी एम तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त शाम को 06:07 पी एम से 06:31 पी एम तक मान्य होगा।
- सायाह्न सन्ध्या का समय शाम 06:07 पी एम से 07:20 पी एम तक चलेगा।
- अमृत काल का योग 02 अक्टूबर को तड़के 01:28 ए एम से 02:57 ए एम तक निर्मित होगा।
विभिन्न प्रमुख शहरों में राहुकाल की अवधि
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल की अवधि को किसी भी नए अथवा मांगलिक कार्य के शुभारंभ के लिए वर्जित माना गया है। देश के विभिन्न प्रमुख नगरों में इसका समय इस प्रकार रहेगा
- दिल्ली में यह समय दोपहर 01:40 से दोपहर बाद 03:09 तक रहेगा।
- मुंबई में इसका प्रभाव दोपहर 01:58 से दोपहर बाद 03:28 तक देखा जाएगा।
- चंडीगढ़ में राहुकाल दोपहर 01:41 से दोपहर बाद 03:10 तक प्रभावी रहेगा।
- लखनऊ में यह पहर दोपहर 01:25 से दोपहर 02:54 तक रहेगा।
- भोपाल में दोपहर 01:39 से दोपहर बाद 03:09 तक यह काल खंड रहेगा।
- कोलकाता में दोपहर 12:56 से दोपहर 02:25 तक का समय वर्जित रहेगा।
- अहमदाबाद में दोपहर 01:58 से दोपहर बाद 03:28 तक राहुकाल रहेगा।
- चेन्नई में यह काल दोपहर 01:28 से दोपहर 02:58 तक बना रहेगा।
चन्द्रषष्ठी व्रत की धार्मिक महत्ता
इसी दिवस पर चन्द्रषष्ठी व्रत का अनुष्ठान भी किया जाएगा। यह व्रत मुख्य रूप से कन्याओं द्वारा सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति और दांपत्य जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना से रखा जाता है। व्रती इस दिन चंद्र देवता की विधिपूर्वक आराधना करते हैं। इस उपवास की पूर्णता रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य देकर और जल अर्पित करके पारण के रूप में की जाती है।



















