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गुरुवायूर मंदिर में रचा गया नया इतिहास, सात घंटे के भीतर संपन्न हुईं 416 शादियांधर्म
23 अग॰ 2026, 9:10 pm (38 दिन पहले)· 4

गुरुवायूर मंदिर में रचा गया नया इतिहास, सात घंटे के भीतर संपन्न हुईं 416 शादियां

केरल के प्रसिद्ध गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर में एक दिन में सबसे अधिक विवाह होने का नया रिकॉर्ड बना है, जहां महज सात घंटों के भीतर 416 जोड़ों ने सात फेरे लिए।

केरल का प्रसिद्ध गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर इन दिनों एक ऐतिहासिक और अनूठे आयोजन के कारण सुर्खियों में है। रविवार का दिन इस मंदिर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया क्योंकि यहां एक ही दिन में शादियों का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बन गया। मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं और विवाह करने वाले जोड़ों का ऐसा तांता लगा कि सुबह से लेकर दोपहर तक हर तरफ उत्सव का माहौल दिखाई दिया। मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में विवाह संपन्न होना इस धार्मिक स्थल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

चिंगम महीने के पहले रविवार का महत्व

मलयम पंचांग के अनुसार चिंगम महीने का पहला रविवार विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए बेहद पावन और फलदायी माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते इस खास दिन पर अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए सैकड़ों जोड़ों ने इस मंदिर को चुना। पारंपरिक संस्कारों के साथ परिणय सूत्र में बंधने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी जनसमूह उमड़ पड़ा। इस बड़े आयोजन से पहले ही मंदिर में कुल 442 शादियों का शेड्यूल तय किया गया था, जिसमें कुछ स्पॉट बुकिंग के मामले भी शामिल थे। इससे ठीक पहले 8 सितंबर 2024 को यहां एक दिन में सर्वाधिक 334 शादियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था, जिसे इस बार पीछे छोड़ दिया गया है।

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तड़के चार बजे से शुरू हुआ विवाह का दौर

विवाह की रस्मों की शुरुआत भोर में ही हो गई थी जब मंदिर के पूर्वी द्वार के पास बने पहले मंडप में देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ए. वी. गोपीनाथ ने दीप जलाकर इसकी औपचारिक शुरुआत की। इसके तुरंत बाद सुबह 4:10 बजे से पावन मंत्रोच्चार के बीच शादियां शुरू हो गईं जो दोपहर 12:45 बजे तक बिना रुके चलती रहीं। इस दौरान केवल उषापूजा और पंथीराडी पूजा के तय समय पर जब मंदिर के कपाट बंद किए गए, तब रस्मों में थोड़ी देर के लिए विराम आया। दिन का सबसे पहला विवाह थलास्सेरी के अर्णव मोहन कुमार और पझयंगडी की विद्या आनंद राज के बीच पारंपरिक वाद्ययंत्रों और संगीत की धुनों के साथ संपन्न कराया गया, जिसके बाद अन्य सभी मंडपों में भी एक के बाद एक फेरे शुरू हो गए।

भीड़ प्रबंधन और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम

एक साथ सैकड़ों जोड़ों और उनके परिजनों की भारी भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती था, जिससे निपटने के लिए मंदिर परिसर में कुल छह विशेष मंडपों की व्यवस्था की गई थी। किसी भी तरह की अव्यवस्था या अत्यधिक भीड़ से बचने के लिए प्रत्येक दूल्हा-दुल्हन के साथ आने वाले मेहमानों की अधिकतम सीमा 24 तय कर दी गई थी। अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हर घंटे औसतन 60 से अधिक जोड़ों का विवाह कराया गया, जो अपने आप में एक अनूठा प्रबंधन कौशल था।

इस पूरे आयोजन को लेकर देवस्वोम चेयरमैन ए. वी. गोपीनाथ ने विस्तार से जानकारी साझा की

  • भीड़ नियंत्रण: कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
  • आपातकालीन चिकित्सा: किसी भी चिकित्सीय जरूरत के लिए एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम मुस्तैद रखी गई थी।
  • दमकल सेवा: किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकाल से निपटने के लिए फायर एंड रेस्क्यू की टीम भी पूरी तरह तैयार थी।

चेयरमैन ने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय गुरुवायूर के स्थानीय निवासियों और वहां पहुंचने वाले आम श्रद्धालुओं को दिया, जिन्होंने प्रशासन द्वारा लागू की गई सभी पाबंदियों और नियमों का पालन करते हुए पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में भरपूर सहयोग प्रदान किया।

सवाल-जवाब

गुरुवायूर मंदिर में एक दिन में कितनी शादियां हुईं?
गुरुवायूर मंदिर में महज सात घंटे के भीतर रिकॉर्ड 416 शादियां संपन्न हुईं।
इससे पहले एक दिन में सबसे ज्यादा शादियां होने का रिकॉर्ड कब बना था?
इससे पहले 8 सितंबर 2024 को एक दिन में सर्वाधिक 334 शादियां होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
शादियों का यह सिलसिला किस समय शुरू हुआ था?
विवाह की रस्में सुबह 4:10 बजे शुरू हुई थीं जो दोपहर 12:45 बजे तक चलीं।
प्रत्येक जोड़े के साथ कितने मेहमानों की अनुमति थी?
ओवरक्राउडिंग रोकने के लिए प्रत्येक दूल्हा-दुल्हन के साथ आने वाले मेहमानों की संख्या 24 तय की गई थी।
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