दक्कनी तहजीब और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए मशहूर हैदराबाद शहर अलग-अलग संस्कृतियों के अनूठे संगम का प्रतीक है। इसी सांस्कृतिक विविधता के बीच कुतुबुल्लापुर इलाके के जीदीमेटला (सुभाष नगर) में स्थापित श्री आई माताजी मंदिर लोगों के आकर्षण और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लाल बलुआ पत्थरों पर उकेरी गई उत्कृष्ट नक्काशी और पारंपरिक राजस्थानी शिल्प कला के साथ निर्मित यह मंदिर दक्षिण भारत की भूमि पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
सीरवी समाज की पहल और मंदिर की स्थापना
इस पावन धाम की स्थापना फरवरी 2008 में सीरवी समाज ट्रस्ट द्वारा की गई थी। रोजगार और व्यापार के सिलसिले में राजस्थान से आकर हैदराबाद में बसे प्रवासी मारवाड़ी और सीरवी समुदाय के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक रीति-रिवाजों और आस्था को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। आज यह धाम प्रवासी समाज के साथ-साथ स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए भी आध्यात्मिक शांति का केंद्र बन चुका है।
बिलाड़ा धाम की परंपरा और निरंतर प्रज्वलित अखंड ज्योत
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, आई माताजी को शक्ति स्वरूपा मां अंबा हिंगलाज का साक्षात अवतार माना जाता है। देवी का ऐतिहासिक मुख्य धाम राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित बिलाड़ा में है। जब वर्ष 2008 में जीदीमेटला मंदिर की स्थापना की गई थी, तब बिलाड़ा के मुख्य तीर्थ से विशेष रूप से पवित्र अखंड ज्योत लाई गई थी। यह दिव्य ज्योति मंदिर के गर्भगृह में निरंतर प्रज्वलित रहती है और भक्तों में गहरी आस्था का संचार करती है।
राजस्थानी किलों जैसी भव्य वास्तुकला और गर्भगृह का स्वरूप
मंदिर का पूरा स्थापत्य राजस्थान के ऐतिहासिक किलों और प्राचीन राजमहलों की शैली से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। आकर्षक छतरियां, झरोखे, नक्काशीदार लाल बलुआ पत्थर और विशाल प्रवेश द्वार इसके सौंदर्य को विशिष्ट पहचान देते हैं। मंदिर के गर्भगृह में श्वेत संगमरमर से निर्मित आई माताजी की 16 भुजाओं वाली अत्यंत मनमोहक प्रतिमा स्थापित है, जिनके हाथों में विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और दिव्य प्रतीक सुशोभित हैं। गर्भगृह के मुख्य द्वार पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश और संकटमोचन हनुमान जी की प्रतिमाएं विराजमान हैं। इसके अलावा, मुख्य देवी के दाईं ओर क्षेत्रपाल भैरवनाथ तथा बाईं ओर भगवान श्री राधा-कृष्ण के विग्रह प्रतिष्ठापित हैं। पूजा परिसर के भीतर एक विशाल होमकुंड भी बनाया गया है।
धार्मिक उत्सव और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं
मंदिर परिसर में वर्षभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ आयोजित किए जाते हैं। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां नौ दिनों तक विशेष हवन, यज्ञ, चंडी पाठ, कन्या पूजन और व्यापक स्तर पर अन्नदान का आयोजन संपन्न होता है। अन्य राज्यों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले दर्शनार्थियों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में ठहरने के लिए व्यवस्थित भवन और भोजन की भी सुगम व्यवस्था की गई है।



















