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केरल में धार्मिक आयोजनों को लेकर नया विवाद, महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने को लेकर संगठन ने दी कड़ी चेतावनीधर्म
31 अग॰ 2026, 8:49 am (31 दिन पहले)· 2

केरल में धार्मिक आयोजनों को लेकर नया विवाद, महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने को लेकर संगठन ने दी कड़ी चेतावनी

केरल के प्रमुख इस्लामी विद्वान संगठन ने धार्मिक कार्यक्रमों में महिलाओं के सार्वजनिक रूप से शामिल होने पर आपत्ति जताई है। संगठन ने कुरान का हवाला देते हुए महिलाओं को घरों में रहने और पर्दा करने की सलाह दी है।

कोझिकोड स्थित धार्मिक संगठनों के बीच महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। केरल के एक प्रमुख इस्लामी विद्वान निकाय ने आयोजकों से साफ तौर पर कहा है कि वे मजहबी उसूलों का पूरी सख्ती के साथ पालन करें।

सार्वजनिक मंचों और सड़कों पर रोक की मांग

संगठन के पदाधिकारियों ने हिदायत दी है कि किसी भी धार्मिक उत्सव या जलसे के दौरान युवा महिलाओं को ऐसे पुरुषों के बीच नहीं लाया जाना चाहिए जिनसे उनका कोई पारिवारिक रिश्ता न हो। इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद से राज्य के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलकों में महिला स्वतंत्रता और रूढ़िवादी परंपराओं को लेकर बहस छिड़ गई है।

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समस्त केरल जमीयतुल उलेमा का पक्ष

सुन्नी-शाफई इस्लामी विद्वानों की शीर्ष परिषद माने जाने वाले संगठन के कंथापुरम गुट ने जोर देकर कहा है कि सभी मजहबी आयोजनों में तयशुदा सीमाओं का सख्ती से ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर लोगों से अपील की है कि वे धार्मिक सीमाओं को पार करके होने वाले आयोजनों को गंभीरता से लें।

कोच्चि सम्मेलन में दिया गया बयान

कोच्चि में आयोजित एक इस्लामी सम्मेलन के दौरान कंथापुरम ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से गंभीर नुकसान हो सकता है। कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार ने कहा, “यह समझते हुए कि महिलाओं को इस तरह सार्वजनिक मंचों पर लाने से भारी तबाही होती है, इस्लाम ने महिलाओं के लिए पर्दा अनिवार्य किया है।” उन्होंने पवित्र कुरान का हवाला देते हुए यह भी जोड़ा कि महिलाओं को अपने घरों के भीतर रहना चाहिए और खुले में सामने आने से बचना चाहिए।

सदियों पुरानी परंपराओं का हवाला

संगठन के नेताओं का यह भी कहना था कि पिछले सौ वर्षों से स्थानीय धार्मिक विद्वानों द्वारा यही शिक्षा दी जाती रही है। कंथापुरम ने आगे कहा कि इसी वजह से देश की महिलाओं ने अपनी गरिमा और सम्मान को पूरी तरह सुरक्षित रखा है।

मस्जिद समितियों और महल्लू के लिए निर्देश

नेताओं की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया कि महल्लू यानी स्थानीय मस्जिद-समुदाय के पदाधिकारियों के साथ-साथ मदरसों और अन्य संस्थाओं के प्रबंधकों को भी पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से संस्थाओं की है कि कोई भी जलसा या उत्सव धार्मिक अनुशासन की सीमाओं का उल्लंघन न करे। आने वाली युवा पीढ़ी के सामने एक सही नैतिक उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी समाज के हर वर्ग की बताई गई है।

सवाल-जवाब

यह बयान किस संगठन द्वारा जारी किया गया है?
यह बयान समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट द्वारा जारी किया गया है।
संगठन ने किस बात पर रोक लगाने की अपील की है?
संगठन ने युवा महिलाओं को गैर-रिश्तेदार पुरुषों के बीच सार्वजनिक मंचों और सड़कों पर लाने से बचने की अपील की है।
इस बयान की घोषणा कहाँ की गई थी?
यह बयान कोच्चि में आयोजित एक इस्लामिक कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया था।
संगठन के प्रमुख नेता कौन हैं?
इस बयान को संगठन के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम ए. पी. अबूबकर मुसलियार ने जारी किया है।
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