जन्माष्टमी का पावन उत्सव पूरी तरह से भगवान कृष्ण की आराधना को समर्पित माना गया है। इस खास दिन पर देश भर के श्रद्धालु अत्यंत उत्साह के साथ शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग अर्पित किया जाता है और रात्रि के ठीक 12 बजे पंचामृत से उनका अभिषेक कर विधि-विधान से आरती उतारी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष आरतियों का गान करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिनके लिरिक्स और नियम हर भक्त को जरूर पता होने चाहिए।
गणेश वंदना और पूजन के नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी के दिन सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना की जाती है। गणेश जी की आरती संपन्न होने के बाद ही श्रद्धालु भगवान कृष्ण की आरतियों का गान शुरू करते हैं। इस क्रम का पालन करने से सभी प्रकार के विघ्न दूर होते हैं और पूजा पूर्ण मानी जाती है। मुख्य रूप से इस दिन भगवान कृष्ण की प्रसिद्ध आरती यानी आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की का पाठ किया जाता है, जो हर भक्त की जुबान पर रहती है।
आरती कुंजबिहारी की के संपूर्ण बोल
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ इस आरती में भगवान के मनमोहक स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। उनके गले में बैजंती माला सुशोभित होती है और वे मधुर स्वर में मुरली बजाते हैं। उनके कानों में कुंडल झिलमिलाते हैं और वे नंद बाबा के आनंद के रूप में जाने जाते हैं। आकाश के समान उनके अंगों की कांति काली है और उनके पास राधिका जी चमक रही हैं। बनवारी लताओं के बीच खड़े हैं और उनके माथे पर कस्तूरी का तिलक तथा चंद्रमा जैसी झलक दिखाई देती है।
इस अद्भुत छवि के आगे देवता भी दर्शन के लिए तरसते हैं और आकाश से फूलों की वर्षा होती है। ग्वालों के साथ मुरचंग और मृदंग बजते हैं और गोपियों का प्रेम उमड़ पड़ता है। इसके अलावा गंगा के प्रकट होने और उनके स्मरण से मोह भंग होने का प्रसंग भी इस आरती में आता है। वृंदावन की रेणु चमक रही है और चारों तरफ गोपी, ग्वाल और धेनू नजर आते हैं। चांदनी रात में मंद हंसी के साथ भक्तों के भव बंधन कट जाते हैं और भगवान दीन दुखियों की पुकार सुनते हैं।
आरती का सही समय और अन्य भजन
जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान कृष्ण की आरती मुख्य रूप से दो बार की जानी चाहिए। पहली आरती सुबह के समय करनी चाहिए और दूसरी आरती रात के ठीक 12 बजे होनी चाहिए। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को ही हुआ था, जिसके कारण मुख्य अनुष्ठान और उत्सव रात में ही आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही भगवान बांके बिहारी की आराधना करते हुए श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं भजन का गान भी बहुत श्रद्धा के साथ किया जाता है, जो भक्तों को आत्मिक आनंद प्रदान करता है।



















