राजस्थान की 15 वर्षीय युवा निशानेबाज लावण्या कंवर ने एक बार फिर अपनी अद्भुत निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए खेल जगत में अपना दबदबा साबित किया है। उत्तराखंड की राजधानी में आयोजित 45वीं नॉर्थ जोन शूटिंग चैंपियनशिप-2026 के दौरान लावण्या ने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में 300 अंकों में से 284 अंक प्राप्त कर उन्होंने अपनी श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया और शीर्ष भारतीय निशानेबाजों की कतार में अपनी जगह और मजबूत कर ली।
उत्कृष्ट प्रदर्शन और पिछली उपलब्धियां
25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल जैसी प्रतिस्पर्धी स्पर्धा में लावण्या का यह प्रदर्शन उनकी उच्च स्तरीय तैयारी को दर्शाता है। इससे पहले उन्होंने राजस्थान के सीकर शहर में आयोजित CBSE जोनल स्कूल टूर्नामेंट में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। वहां 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भाग लेते हुए उन्होंने 400 में से 386 अंक हासिल कर गोल्ड मेडल जीता था। लगातार मिल रही इन शानदार सफलताओं ने लावण्या को राज्य की सबसे प्रतिभाशाली और उदीयमान पिस्टल निशानेबाजों में शामिल कर दिया है।
राष्ट्रीय मंच पर 8 से अधिक पदक और कड़ा अभ्यास
मात्र 15 वर्ष की आयु में लावण्या कंवर राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए अब तक 8 से भी अधिक पदक जीत चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस निरंतर सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और दैनिक अनुशासन का बड़ा योगदान है। लावण्या रोजाना 6 से 8 घंटे शूटिंग रेंज में अभ्यास करती हैं। उनके परिवार के सदस्यों के अनुसार, लावण्या का ध्यान पढ़ाई से अधिक शूटिंग के अभ्यास पर ही केंद्रित रहता है और वह घर पर बिताए जाने वाले समय में भी अपनी ट्रेनिंग और तकनीक सुधारने पर ही ध्यान देती हैं।
मानसिक संतुलन और तकनीक का सही संयोजन
निशानेबाजी में केवल लक्ष्य पर निशाना लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अत्यधिक मानसिक दबाव के बीच खुद को शांत रखना बेहद जरूरी होता है। लावण्या के अनुसार, शूटिंग खेल में सटीक निशाने के साथ-साथ खिलाड़ी का धैर्य, उच्च स्तर की एकाग्रता और दबाव झेलने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लावण्या इस समय अपने कोच योगेश शेखावत के कुशल मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। कोच योगेश शेखावत का मानना है कि किसी भी निशानेबाज के लिए तकनीकी कमियों को दूर करने के साथ-साथ उसकी मानसिक मजबूती को बेहतर बनाना सबसे अहम पहलू होता है। लावण्या की हालिया सफलताओं को देखते हुए उनके कोच अब उन्हें विशेष एडवांस ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।
'पिस्टल क्वीन' और ओलिंपिक में पदक का सपना
कम उम्र में लगातार राष्ट्रीय और जोनल प्रतियोगिताओं में झंडे गाड़ने के कारण लावण्या कंवर को अब खेल प्रेमियों के बीच 'राजस्थान की पिस्टल क्वीन' के रूप में पहचान मिलने लगी है। लावण्या का मुख्य लक्ष्य भविष्य में ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस युवा खिलाड़ी को लगातार उच्च स्तरीय कोचिंग और आवश्यक सुविधाएं मिलती रहीं, तो वह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करेंगी। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल राजस्थान के युवा एथलीट प्रेरित हो रहे हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी प्रशंसक उनकी इस सफलता की जमकर सराहना कर रहे हैं।



















